Saturday, May 31, 2008

Webinfosys's Hindi News : अंसार बर्नी को भारत ने वापस लौटाया

लंदन से दिल्ली आए पाकिस्तान के मानवाधिकार मामलों के पूर्व मंत्री अंसार बर्नी को शुक्रवार को भारत सरकार के अधिकारियों ने वापस लौटा दिया है।

उनको डिपोर्ट करने या वापस लौटाए जाने के कारणों का पता नहीं चला है लेकिन उनके भाई सारिम बर्नी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि उन्हें कुछ बहाने बनाकर वापस भेज दिया गया है।

अभी यह भी स्पष्ट नहीं हुआ है कि किसके आदेश पर बर्नी को वापस लौटाया गया है।

अंसार बर्नी पाकिस्तान में अंतरिम सरकार में मानवाधिकार मामलों के मंत्री थे।

ंसार बर्नी जामा मस्जिद यूनाइटेड फ़ोरम की ओर से 'अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद' पर दो दिवसीय सम्मेलन में हिस्सा लेने दिल्ली पहुँचे थे।

सम्मेलन के निदेशक सैयद एहसान शम्सी ने कहा "मैं अपने कुछ साथियों के साथ हवाई अड्डे पर बर्नी साहब का स्वागत करने पहुँचा लेकिन वो हवाई अड्डे के बाहर भी निकल सके। उन्हें अधिकारियों ने एक पुर्जा थमाया और वापस लौट जाने को कहा।"

शम्सी बताते हैं, "मुझे नहीं पता चल सका कि पुर्जे में क्या लिखा है। वो सम्मेलन में नहीं आ सकेंगे इसको लेकर हम निराश हैं."

सम्मेलन में पाकिस्तान से आमंत्रित अतिथियों की सूची में मानवाधिकार कार्यकर्ता अस्मा जहाँगीर और अवामी नेशनल पार्टी के महासचिव मोहम्मद हाशिम बाबर का नाम भी शामिल है। कश्मीर सिंह को रिहा किया गया और वो फांसी की सज़ा पा चुके सरबजीत सिंह की सज़ा माफ़ करवाने के लिए भी प्रयास कर रहे हैं।

वापस दुबई

अंसार बर्नी के भाई ने बताया कि अंसार बर्नी लंदन से रवाना हुए थे और दुबई के रास्ते भारत आ रहे थे।

अंसार बर्नी दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर स्थानीय समय के अनुसार रात साढ़े आठ बजे अमीरात एयरवेज़ के विमान से उतरे थे।

वहाँ भारतीय अधिकारियों ने उन्हें वापस दुबई भेज दिया है।

जैसा कि सारिम बर्नी ने बताया, अंसार बर्नी शनिवार को सुबह लंदन पहुँच रहे हैं और तभी सही-सही कारणों का पता चल सकेगा।

यह पूछे जाने पर कि क्या उनके पास भारत आने के लिए आवश्यक दस्तावेज़ नहीं थे, उनके भाई ने कहा, "क्या कोई व्यक्ति लंदन के विमानतल से बिना दस्तावेज़ के भारत की उड़ान ले सकता है?"

उनके भाई का कहना है कि वे उन पाकिस्तानी नागरिकों से मिलने पहुँचे थे जिन्हें पासपोर्ट में कथित तौर पर छेड़छाड़ करने के आरोप में हाल ही में गिरफ़्तार किया गया है।

उल्लेखनीय है कि अंसार बर्नी पिछली अप्रैल में ही भारत आए थे और दिल्ली में उनकी मुलाक़ात भारत के गृहमंत्री शिवराज पाटिल और विदेश सचिव शिवशंकर मेनन से हुई थी।

सरबजीत सिंह के परिवारजनों ने भी अमृतसर में उनसे मुलाक़ात की थी और सरबजीत को माफ़ी दिलवाने की अपील की थी।





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Webinfosys's Hindi News : विकास, विशाल को आजीवन कारावा

दिल्ली की एक स्थानीय अदालत ने नितीश कटारा हत्याकांड के दोषियों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है। इस मामले में विकास और विशाल यादव को दोषी पाया गया था। दोनों को एक लाख साठ हज़ार रुपए का जुर्माना भी भरना होगा।

फ़रवरी 2002 में नितीश कटारा की हत्या कर दी गई थी और हत्या का आरोप विकास यादव और उनके चचेरे भाई विशाल यादव पर लगा था।

ये मामला इसलिए सुर्खियों में आया क्योंकि विकास यादव उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता डीपी यादव के बेटे हैं और नितीश कटारा एक आईएएस अधिकारी के बेटे थे।

सज़ा सुनाए जाने के बाद नितीश कटारा की माँ नीलम कटारा ने कहा वे इस फ़ैसले पर न्यायालय का सम्मान करती हैं।

उधर जब विकास और विशाल को दोषी पाया गया था तब बाहुबली नेता डीपी यादव ने कहा कि अपने बेटे और भतीजे के लिए वो इस फ़ैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगे।

दूसरी ओर नितीश कटारा की माँ नीलम कटारा का कहना था, "बचाव पक्ष को ऊपरी अदालत में जाने का अधिकार है, इससे मैं इनकार नहीं करती हूँ। लेकिन मैं थोड़े बैठी रहूंगी। वहाँ भी न्याय के लिए मेरी लड़ाई जारी रहेगी।"

लंबी सुनवाई

छह साल पुराने इस मामले की सुनवाई के दौरान कई तारीखें पड़ीं और मामला मीडिया की सुर्खियों में रहा।

इस मामले में अभियोजन पक्ष ने कुल 42 गवाह पेश किए। शुरुआत में इस मामले की सुनवाई ग़ाज़ियाबाद की अदालत में चल रही थी लेकिन बाद में नितीश कटारा के परिवार के अनुरोध पर ये मामला दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया।

पुलिस का कहना था कि 16-17 फरवरी, 2002 की रात नितीश कटारा का ग़ाज़ियाबाद से अपहरण किया गया था और फिर उनकी हत्या कर दी गई।

इस मामले में विकास यादव और विशाल यादव को अभियुक्त बनाया गया था।

अभियोजन पक्ष का कहना था कि विकास यादव और विशाल यादव ने नितीश कटारा की इसलिए हत्या की थी क्योंकि उन्हें अपनी बहन भारती यादव से उसकी दोस्ती पसंद नहीं थी।

अभियुक्त विकास यादव और विशाल यादव ने अपने आपको बेक़सूर बताया था।

उनका कहना था कि पुलिस ने ग़लत तरीके से उन्हें फंसाया और उन्होंने पुलिस के सामने कोई बयान नहीं दिया था।

विकास यादव का कहना था कि उसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण फंसाया गया है।




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Webinfosys's Hindi News : शवों को लेकर खींचतान जारी

राजस्थान में चल रहे गूजरों के आंदोलन में शवों को लेकर खींचतान जारी है। अब सरकार शवों को सौंपना चाहती है लेकिन गूजर इसे लेने से इनकार कर रहे हैं।

आंदोलन के दौरान मारे गए गूजरों के शव जयपुर, बयाना और सिकंदरा में रखे हुए हैं और अभी तक उनका पोस्टमार्टम नहीं हुआ है।

इस बीच गूजरों का आंदोलन जारी है। और अब तक गूजरों और सरकार के बीच वार्ता की शुरुआत नहीं हो सकी है।

शुक्रवार को सवाई माधोपुर में पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे गूजरों की उग्र भीड़ पर फ़ायरिंग की जिसमें दो लोग मारे गए हैं।

इस घटना के बाद राज्य में 23 मई को शुरु हुए गूजरों के आंदोलन में मृतकों की संख्या 39 हो गई है.

मृतकों में एक पुलिसकर्मी भी है।

गुरुवार को हरियाणा के पानीपत ज़िले में भी गूजरों के प्रदर्शन के दौरान दो प्रदर्शनकारी मारे गए थे।

गूजर अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की माँग कर रहे हैं।

गूजर इस समय अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल हैं लेकिन उनका मानना है कि अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिलने पर वे नौकरियों और शिक्षा में मिलने वाली आरक्षण की सुविधा का बेहतर फ़ायदा उठा पाएँगे।

शवों की राजनीति

पहले आंदोलन में मारे गए लोगों के परिजन शव माँग रहे थे कि उनका अंतिम संस्कार किया जा सके और सरकार इसके लिए तैयार नहीं दिख रही थी।

अब मामला उलट गया है। अब सरकार चाहती है कि आंदोलन में मारे गए लोगों के शव का पोस्टमार्टम करवा दिया जाए और उन्हें परिजनों को सौंप दिया जाए लेकिन अब गूजर तैयार नहीं हैं।

दौसा में मारे गए 14 लोगों के शव जयपुर के सरकारी अस्पताल में हैं लेकिन गूजर इसे ले नहीं रहे हैं।

अपने एक रिश्तेदार को खो चुके बाबूलाल गूजर कहते हैं, "समाज का सर्वसम्मत फ़ैसला है कि पहले बयाना में रखे गए शवों का पोस्टमार्टम राज्य के बाहर के किसी डॉक्टर के हाथों करवाया जाए, उसके बाद सिकंदरा के शवों का। तभी शवों को अंतिम संस्कार के लिए लिया जाएगा।"

पीलूपुरा में रखे 12 शवों और सिकंदरा में रखे छह शवों का भी अभी फ़ैसला नहीं हो पाया है और ये शव गूजरों के कब्ज़े में हैं।

भाजपा के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के प्रभारी गोपीनाथ मुंडे भी कह चुके हैं कि यदि गूजर तैयार हो जाएँ तो सरकार शवों का पोस्टमार्टम करवाकर उसे सौंपने के लिए तैयार है।

भरतपुर के भाजपा सांसद विश्वेंद्र सिंह गूजरों और सरकार के बीच वार्ता के लिए मध्यस्थता का प्रस्ताव दे चुके हैं और वे भी शवों की राजनीति पर चिंतित दिखते हैं।

वे कहते हैं, "अभी भी शव रखे हुए हैं। हिंदू संस्कृति में यह दुखद स्थिति मानी जाती है कि मृतकों का अंतिम संस्कार नहीं किया जा सके।"

लेकिन फ़िलहाल इसका कोई हल निकलता हुआ नहीं दिख रहा है।

बातचीत की पहल

इस बीच सरकार की ओर से गूजरों के बातचीत की अपील की गई है लेकिन गूजर फ़िलहाल इसके लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं।

भरतपुर के राजघराने के विश्वेंद्र सिंह ने गूजरों से शांति बनाए रखने की अपील की है। वे भरतपुर से भाजपा सांसद भी हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि वार्ता के लिए सरकार और गूजरों के बीच मध्यस्थता के लिए तैयार हैं।

चाहे विश्वेंद्र सिंह जाट हैं लेकिन उनका उस क्षेत्र में काफ़ी प्रभाव है और वे एक गूजर परिवार के दामाद हैं। उनका दावा है कि उनके पास ऐसे उपाय हैं जिससे इस स्थिति का समाधान हो सकता है।

गुरुवार को दिल्ली और आसपास के इलाक़ों में रास्ता रोको आंदोलन के बाद राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने गूजरों को एक बार फिर वार्ता का प्रस्ताव दिया था।

उन्होंने कहा था कि गूजरों को घूमंतू जनजाति या 'डि-नोटिफ़ाइड ट्राइब' जैसी विशेष श्रेणी में रखकर आरक्षण दिए जाने की माँग पूरी तरह से संविधान सम्मत है।




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Friday, May 30, 2008

Webinfosys's Hindi News : वसुंधरा ने फिर दिया वार्ता का प्रस्ताव

गुरुवार को दिल्ली और आसपास के इलाक़ों में रास्ता रोको आंदोलन के बाद राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने गूजरों को एक बार फिर वार्ता का प्रस्ताव दिया है।

उन्होंने कहा कि गूजरों को घूमंतू जनजाति या 'डि-नोटिफ़ाइड ट्राइब' जैसी विशेष श्रेणी में रखकर आरक्षण दिए जाने की माँग पूरी तरह से संविधान सम्मत है।

उधर भरतपुर से भाजपा के सांसद विश्वेंद्र सिंह ने गूजर नेताओं और सरकार के बीच मध्यस्थता का प्रस्ताव दिया है।

ख़बर है कि जयपुर में कुछ गूजर नेता एक अहम बैठक करने जा रहे हैं जिसके बाद वे किरोड़ी सिंह बैंसला से भी मिलने जाएँगे।

इस बीच राज्य सरकार ने जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में रखे 14 आंदोलनकारियों के शवों के पोस्टमार्टम करने के आदेश दिए हैं।

गुरुवार को दिल्ली और आसपास के इलाक़ों में रास्ता रोको आंदोलन के बाद राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने गूजरों को एक बार फिर वार्ता का प्रस्ताव दिया है।

उन्होंने कहा कि गूजरों को घूमंतू जनजाति या 'डि-नोटिफ़ाइड ट्राइब' जैसी विशेष श्रेणी में रखकर आरक्षण दिए जाने की माँग पूरी तरह से संविधान सम्मत है।

उधर भरतपुर से भाजपा के सांसद विश्वेंद्र सिंह ने गूजर नेताओं और सरकार के बीच मध्यस्थता का प्रस्ताव दिया है।

ख़बर है कि जयपुर में कुछ गूजर नेता एक अहम बैठक करने जा रहे हैं जिसके बाद वे किरोड़ी सिंह बैंसला से भी मिलने जाएँगे।

इस बीच राज्य सरकार ने जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में रखे 14 आंदोलनकारियों के शवों के पोस्टमार्टम करने के आदेश दिए हैं।

माचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार राज्य में पार्टी नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा के बाद उन्होंने कहा है कि वार्ता का नया प्रस्ताव गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला के पास पीलूपुरा भेजा जाएगा।

हालांकि गूजर नेताओं ने इन प्रस्तावों पर कोई जवाब नहीं दिया है लेकिन ये संकेत रहे हैं कि गूजर भी इसके लिए सहमति बना रहे हैं।

समाचार एजेंसी यूएनआई ने किरोड़ी सिंह बैंसला के क़रीबी नेता डॉ रुप सिंह के हवाले से कहा है कि कई बड़े गूजर नेता शुक्रवार को जयपुर के गूजर हॉस्टल में एक बैठक करने जा रहे हैं।

डा रुप सिंह के अनुसार इसके बाद ये नेता पीलूपुर जाकर किरोड़ी सिंह बैंसला से भी मिलेगे।

आंदोलन

गुरुवार को दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में गुरुवार को गूजर समुदाय के लोग एक दिन का 'रास्ता रोको' आंदोलन किया।

उधर हरियाणा के पानीपत ज़िले में गूजरों के प्रदर्शन के दौरान दो प्रदर्शनकारी मारे गए।

दिल्ली को आसपास के इलाक़ों से जोड़ने वाली कई सड़कों को कई घंटे के लिए जाम कर दिया गया था।

पूर्वी दिल्ली के गाज़ीपुर इलाक़े में नेशनल हाइवे-24 पर यातायात कई घंटे बंद रहा।

दिल्ली-हापुर हाइवे और दिल्ली-नोएडा एक्सप्रेस हाइवे पर भी वाहनों का आना-जाना कई घंटे तक रुका रहा।

फ़रीदाबाद-गुड़गाँव सड़क पर भी गूजरों ने जाम लगा दिया और प्रदर्शन कर रहे गूजरों ने महरौली-गुड़गाँव रोड पर बसों को आग भी लगाने की कोशिश की थी। प्रशासन ने इन कोशिशों को नाकाम कर दिया।

दादारी इलाक़े में सुबह-सुबह गूजरों ने कुछ लोकल ट्रेनों को भी रोका।

गूजरों के इस 'एनसीआर रोको' आंदोलन की वजह से दिल्ली में दूध और सब्ज़ियों की आपूर्ति पर कुछ असर दिखाई पड़ा।

पानीपत में हिंसा

पानीपत में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प मे कम से कम दो लोगों की मौत हो गई है, और चार प्रदर्शनकारी गंभीर रूप से घायल हैं, जिनमे से एक की हालत नाज़ुक है।

जबकि प्रदर्शनकारियों का कहना है की इस संघर्ष मे कम से कम 6 लोग मारे गए हैं। मारे गए दो लोगों के शव ज़िला चिकित्सालय मे हैं जहाँ उनका पोस्टमार्टम किया जा रहा है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुडा ने मृतकों के परिवारजनों को पाँच-पाँच लाख मुआवज़ा देने की घोषणा की है।

पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों मे से एक वरिष्ठ डॉक्टर ने नाम ना बताने की शर्त पर बीबीसी को बताया की एक मौत सीने पर गोली लगने से हुई है और उसकी बाजू पर भी गोली लगी है जबकी दूसरी मौत सिर पर गंभीर चोट लगने से हुई है।

इन शवों को लेने अभी तक कोई परिजन या गाँववाले लेने नही आए हैं। प्रशासन की कोशिश है की प्रदर्शनकारियों को मना कर इन शवों का जितनी जल्दी हो सके दाहसंस्कार कर दिया जाए, लेकिन पट्टीकल्याणा गांव के लोग जहाँ के इन दो लोगों की मौत हुई है, प्रशासन से किसी तरह की बातचीत नही चाहते।

उनकी मांग है की पहले दोषी अधिकारियों के ख़िलाफ कार्रवाई की जाए।

पूर्व मंत्री और गूर्जर नेता कटारसिंह का कहना है, " हम सरकार से क्या बात करें, ये सब सरकार ने ही तो किया है, पहले सरकार दोषी पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दायर करे, उन पर हत्या के आरोप तय हों तब हम सरकार से बात कर सकते हैं, और हमे सरकार क्या दे सकती है, क्या सरकार हमारे मारे गए लोगों को ज़िन्दा कर सकती है।"

घटना के कारण बताते हुए प्रशासन का कहना था कि पुलिस को फ़ायरिंग अंतिम उपाय के तौर पर करनी पड़ी क्योंकि भीड़ हिंसक हो गई थी और सार्वजनिक संपति को नुकसान पहुँचा रही थी।

पानीपत के ज़िला उपायुक्त महेन्द्र कुमार कहते हैं, "अगर प्रदर्शनकारी बेक़ाबू हो जाएँ, सरकारी संपति को नुकसान पहुँचाएँ, तो पुलिस के पास उन्हे भगाने के अलावा क्या उपाय बचता है, और ऐसे में जो हुआ वो स्वभाविक है।"

लेकिन प्रदर्शनकारीयों का कहना है कि उन्होंने रास्ता ज़रूर रोका था पर कोई हिंसक कार्रवाई नही की।

उनका कहना है की प्रदर्शनकारियों के नेताओं से पुलिस की बातचीत हो रही थी और रास्ता खोलने पर सहमति बन चुकी थी की एक अधिकारी ने लाठीचार्ज का आदेश दे दिया और फिर पुलिस ने फ़ायरिंग कर दी।

फ़िलहाल हालात तनावपूर्ण हैं और प्रदर्शनकारी बङी तादाद मे पट्टीकल्याणा गांव मे जमा हैं और आगे की
रणनीति बना रहे हैं, उधर प्रशासन के आला अधिकारी भी घटनास्थल पर भारी पुलिस बल के साथ तैनात हैं।





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Webinfosys's Hindi News : नितीश हत्याकांड: सज़ा पर फ़ैसला संभव

दिल्ली की स्थानीय अदालत आज नितीश कटारा हत्याकांड के दोषियों को सज़ा सुना सकती है। इस मामले में विकास और विशाल यादव को दोषी पाया गया था।

छह साल पहले नीतिश कटारा की हत्या कर दी गई थी और हत्या का आरोप विकास यादव और उनके चचेरे भाई विशाल यादव पर लगा था।

ये मामला इसलिए सुर्खियों में आया क्योंकि विकास यादव उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता डीपी यादव के बेटे हैं और नितीश कटारा एक आईएएस अधिकारी के बेटे थे।

डीपी यादव ने अपने बेटे और भतीजे को सज़ा सुनाए जाने के बाद कहा था कि वो इस फ़ैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगे।

दूसरी ओर नितीश कटारा की माँ नीलम कटारा का कहना था, "बचाव पक्ष को ऊपरी अदालत में जाने का अधिकार है, इससे मैं इनकार नहीं करती हूँ। लेकिन मैं थोड़े बैठी रहूंगी। वहाँ भी न्याय के लिए मेरी लड़ाई जारी रहेगी।"

हलाकि बातचीत में उन्होंने कहा, "शुक्रवार को सज़ा सुनाए जाने की संभावना कम है क्योंकि दोपहर बाद दो बज़े ये मामला अदालत के समक्ष आएगा और सज़ा पर बहस भी होगी। इसलिए हो सकता है कि फ़ैसला शनिवार या सोमवार तक के लिए सुरक्षित रख लिया जाए।"

लंबी सुनवाई

छह साल पुराने इस मामले की सुनवाई के दौरान सैकड़ों तारीखें पड़ीं और मामला मीडिया की सुर्खियों में रहा।

इस मामले में अभियोजन पक्ष ने कुल 42 गवाह पेश किए।

शुरुआत में इस मामले की सुनवाई ग़ाज़ियाबाद की अदालत में चल रही थी लेकिन बाद में नितीश कटारा के परिवार के अनुरोध पर ये मामला दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया।

पुलिस का कहना था कि 16-17 फरवरी, 2002 की रात नितीश कटारा का ग़ाज़ियाबाद से अपहरण किया गया था और फिर उनकी हत्या कर दी गई।

इस मामले में विकास यादव और विशाल यादव को अभियुक्त बनाया गया था।

अभियोजन पक्ष का कहना था कि विकास यादव और विशाल यादव ने नितीश कटारा की इसलिए हत्या की थी क्योंकि उन्हें अपनी बहन भारती यादव से उसकी दोस्ती पसंद नहीं थी।

अभियुक्त विकास यादव और विशाल यादव ने अपने आपको बेक़सूर बताया था।

उनका कहना था कि पुलिस ने ग़लत तरीके से उन्हें फंसाया और उन्होंने पुलिस के सामने कोई बयान नहीं दिया था।

विकास यादव का कहना था कि उसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण फंसाया गया है।




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