गुरुवार को दिल्ली और आसपास के इलाक़ों में रास्ता रोको आंदोलन के बाद राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने गूजरों को एक बार फिर वार्ता का प्रस्ताव दिया है।
उन्होंने कहा कि गूजरों को घूमंतू जनजाति या 'डि-नोटिफ़ाइड ट्राइब' जैसी विशेष श्रेणी में रखकर आरक्षण दिए जाने की माँग पूरी तरह से संविधान सम्मत है।
उधर भरतपुर से भाजपा के सांसद विश्वेंद्र सिंह ने गूजर नेताओं और सरकार के बीच मध्यस्थता का प्रस्ताव दिया है।
ख़बर है कि जयपुर में कुछ गूजर नेता एक अहम बैठक करने जा रहे हैं जिसके बाद वे किरोड़ी सिंह बैंसला से भी मिलने जाएँगे।
इस बीच राज्य सरकार ने जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में रखे 14 आंदोलनकारियों के शवों के पोस्टमार्टम करने के आदेश दिए हैं।
गुरुवार को दिल्ली और आसपास के इलाक़ों में रास्ता रोको आंदोलन के बाद राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने गूजरों को एक बार फिर वार्ता का प्रस्ताव दिया है।
उन्होंने कहा कि गूजरों को घूमंतू जनजाति या 'डि-नोटिफ़ाइड ट्राइब' जैसी विशेष श्रेणी में रखकर आरक्षण दिए जाने की माँग पूरी तरह से संविधान सम्मत है।
उधर भरतपुर से भाजपा के सांसद विश्वेंद्र सिंह ने गूजर नेताओं और सरकार के बीच मध्यस्थता का प्रस्ताव दिया है।
ख़बर है कि जयपुर में कुछ गूजर नेता एक अहम बैठक करने जा रहे हैं जिसके बाद वे किरोड़ी सिंह बैंसला से भी मिलने जाएँगे।
इस बीच राज्य सरकार ने जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में रखे 14 आंदोलनकारियों के शवों के पोस्टमार्टम करने के आदेश दिए हैं।
माचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार राज्य में पार्टी नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा के बाद उन्होंने कहा है कि वार्ता का नया प्रस्ताव गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला के पास पीलूपुरा भेजा जाएगा।
हालांकि गूजर नेताओं ने इन प्रस्तावों पर कोई जवाब नहीं दिया है लेकिन ये संकेत रहे हैं कि गूजर भी इसके लिए सहमति बना रहे हैं।
समाचार एजेंसी यूएनआई ने किरोड़ी सिंह बैंसला के क़रीबी नेता डॉ रुप सिंह के हवाले से कहा है कि कई बड़े गूजर नेता शुक्रवार को जयपुर के गूजर हॉस्टल में एक बैठक करने जा रहे हैं।
डा रुप सिंह के अनुसार इसके बाद ये नेता पीलूपुर जाकर किरोड़ी सिंह बैंसला से भी मिलेगे।
आंदोलन
गुरुवार को दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में गुरुवार को गूजर समुदाय के लोग एक दिन का 'रास्ता रोको' आंदोलन किया।
उधर हरियाणा के पानीपत ज़िले में गूजरों के प्रदर्शन के दौरान दो प्रदर्शनकारी मारे गए।
दिल्ली को आसपास के इलाक़ों से जोड़ने वाली कई सड़कों को कई घंटे के लिए जाम कर दिया गया था।
पूर्वी दिल्ली के गाज़ीपुर इलाक़े में नेशनल हाइवे-24 पर यातायात कई घंटे बंद रहा।
दिल्ली-हापुर हाइवे और दिल्ली-नोएडा एक्सप्रेस हाइवे पर भी वाहनों का आना-जाना कई घंटे तक रुका रहा।
फ़रीदाबाद-गुड़गाँव सड़क पर भी गूजरों ने जाम लगा दिया और प्रदर्शन कर रहे गूजरों ने महरौली-गुड़गाँव रोड पर बसों को आग भी लगाने की कोशिश की थी। प्रशासन ने इन कोशिशों को नाकाम कर दिया।
दादारी इलाक़े में सुबह-सुबह गूजरों ने कुछ लोकल ट्रेनों को भी रोका।
गूजरों के इस 'एनसीआर रोको' आंदोलन की वजह से दिल्ली में दूध और सब्ज़ियों की आपूर्ति पर कुछ असर दिखाई पड़ा।
पानीपत में हिंसा
पानीपत में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प मे कम से कम दो लोगों की मौत हो गई है, और चार प्रदर्शनकारी गंभीर रूप से घायल हैं, जिनमे से एक की हालत नाज़ुक है।
जबकि प्रदर्शनकारियों का कहना है की इस संघर्ष मे कम से कम 6 लोग मारे गए हैं। मारे गए दो लोगों के शव ज़िला चिकित्सालय मे हैं जहाँ उनका पोस्टमार्टम किया जा रहा है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुडा ने मृतकों के परिवारजनों को पाँच-पाँच लाख मुआवज़ा देने की घोषणा की है।
पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों मे से एक वरिष्ठ डॉक्टर ने नाम ना बताने की शर्त पर बीबीसी को बताया की एक मौत सीने पर गोली लगने से हुई है और उसकी बाजू पर भी गोली लगी है जबकी दूसरी मौत सिर पर गंभीर चोट लगने से हुई है।
इन शवों को लेने अभी तक कोई परिजन या गाँववाले लेने नही आए हैं। प्रशासन की कोशिश है की प्रदर्शनकारियों को मना कर इन शवों का जितनी जल्दी हो सके दाहसंस्कार कर दिया जाए, लेकिन पट्टीकल्याणा गांव के लोग जहाँ के इन दो लोगों की मौत हुई है, प्रशासन से किसी तरह की बातचीत नही चाहते।
उनकी मांग है की पहले दोषी अधिकारियों के ख़िलाफ कार्रवाई की जाए।
पूर्व मंत्री और गूर्जर नेता कटारसिंह का कहना है, " हम सरकार से क्या बात करें, ये सब सरकार ने ही तो किया है, पहले सरकार दोषी पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दायर करे, उन पर हत्या के आरोप तय हों तब हम सरकार से बात कर सकते हैं, और हमे सरकार क्या दे सकती है, क्या सरकार हमारे मारे गए लोगों को ज़िन्दा कर सकती है।"
घटना के कारण बताते हुए प्रशासन का कहना था कि पुलिस को फ़ायरिंग अंतिम उपाय के तौर पर करनी पड़ी क्योंकि भीड़ हिंसक हो गई थी और सार्वजनिक संपति को नुकसान पहुँचा रही थी।
पानीपत के ज़िला उपायुक्त महेन्द्र कुमार कहते हैं, "अगर प्रदर्शनकारी बेक़ाबू हो जाएँ, सरकारी संपति को नुकसान पहुँचाएँ, तो पुलिस के पास उन्हे भगाने के अलावा क्या उपाय बचता है, और ऐसे में जो हुआ वो स्वभाविक है।"
लेकिन प्रदर्शनकारीयों का कहना है कि उन्होंने रास्ता ज़रूर रोका था पर कोई हिंसक कार्रवाई नही की।
उनका कहना है की प्रदर्शनकारियों के नेताओं से पुलिस की बातचीत हो रही थी और रास्ता खोलने पर सहमति बन चुकी थी की एक अधिकारी ने लाठीचार्ज का आदेश दे दिया और फिर पुलिस ने फ़ायरिंग कर दी।
फ़िलहाल हालात तनावपूर्ण हैं और प्रदर्शनकारी बङी तादाद मे पट्टीकल्याणा गांव मे जमा हैं और आगे की
रणनीति बना रहे हैं, उधर प्रशासन के आला अधिकारी भी घटनास्थल पर भारी पुलिस बल के साथ तैनात हैं।

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