फ़रवरी 2002 में नितीश कटारा की हत्या कर दी गई थी और हत्या का आरोप विकास यादव और उनके चचेरे भाई विशाल यादव पर लगा था।
ये मामला इसलिए सुर्खियों में आया क्योंकि विकास यादव उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता डीपी यादव के बेटे हैं और नितीश कटारा एक आईएएस अधिकारी के बेटे थे।
सज़ा सुनाए जाने के बाद नितीश कटारा की माँ नीलम कटारा ने कहा वे इस फ़ैसले पर न्यायालय का सम्मान करती हैं।
उधर जब विकास और विशाल को दोषी पाया गया था तब बाहुबली नेता डीपी यादव ने कहा कि अपने बेटे और भतीजे के लिए वो इस फ़ैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगे।
दूसरी ओर नितीश कटारा की माँ नीलम कटारा का कहना था, "बचाव पक्ष को ऊपरी अदालत में जाने का अधिकार है, इससे मैं इनकार नहीं करती हूँ। लेकिन मैं थोड़े बैठी रहूंगी। वहाँ भी न्याय के लिए मेरी लड़ाई जारी रहेगी।"
लंबी सुनवाई
छह साल पुराने इस मामले की सुनवाई के दौरान कई तारीखें पड़ीं और मामला मीडिया की सुर्खियों में रहा।
इस मामले में अभियोजन पक्ष ने कुल 42 गवाह पेश किए। शुरुआत में इस मामले की सुनवाई ग़ाज़ियाबाद की अदालत में चल रही थी लेकिन बाद में नितीश कटारा के परिवार के अनुरोध पर ये मामला दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया।
पुलिस का कहना था कि 16-17 फरवरी, 2002 की रात नितीश कटारा का ग़ाज़ियाबाद से अपहरण किया गया था और फिर उनकी हत्या कर दी गई।
इस मामले में विकास यादव और विशाल यादव को अभियुक्त बनाया गया था।
अभियोजन पक्ष का कहना था कि विकास यादव और विशाल यादव ने नितीश कटारा की इसलिए हत्या की थी क्योंकि उन्हें अपनी बहन भारती यादव से उसकी दोस्ती पसंद नहीं थी।
अभियुक्त विकास यादव और विशाल यादव ने अपने आपको बेक़सूर बताया था।
उनका कहना था कि पुलिस ने ग़लत तरीके से उन्हें फंसाया और उन्होंने पुलिस के सामने कोई बयान नहीं दिया था।
विकास यादव का कहना था कि उसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण फंसाया गया है।
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