Friday, June 27, 2008

Webinfosys's Hindi News : पहले फ़ील्ड मार्शल सैम बहादुर नहीं रहे

भारत के पूर्व सेना प्रमुख और 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के हीरो माने जाने वाले फ़ील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ का गुरुवार रात निधन हो गया। वो 94 वर्ष के थे।

कई दिनों से उनकी हालत नाज़ुक बनी हुई थी। मानेकशॉ तमिलनाडु के वेलिंग्टन सेना अस्पताल में भर्ती थे।

समाचार एजेंसियों के अनुसार गुरुवार की सुबह डॉक्टरों ने कह दिया था उनकी हालत लगातार बिगड़ रही है।

भारत के सबसे ज़्यादा चर्चित और कुशल सैनिक कमांडर माने जाने वाले 94 वर्षीय मानेकशॉ का जीवन उपलब्धियों से भरा रहा। उन्होंने भारत के लिए कई महत्वपूर्ण जंगों में निर्णायक भूमिका निभाई।

उनकी सबसे बड़ी कामयाबी मानी जाती है- 1971 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ जंग में जीत।

उस समय पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में करीब 93 हज़ार पाकिस्तानी सैनिकों फ़ौज ने भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण किया था।

तब से सैम बहादुर के नाम से लोकप्रिय फ़ील्ड मार्शल मानेकशॉ को एक राष्ट्रीय नायक के रूप में देखा जाता रहा है।

मानेकशॉ का बचपन

फ़ील्ड मार्शल मानेकशॉ का पूरा नाम सैम होर्मुशजी फ़्रेमजी जमशेदजी मानेकशॉ है। उनका जन्म तीन अप्रैल 1914 को अमृतसर में हुआ था।

उनका परिवार पारसी है। उनके पिता डॉक्टर एचएफ मानेकशॉ एक चिकित्सक थे और पंजाब में जाकर बस गए थे।

सैम मानेकशॉ ने प्रारंभिक शिक्षा अमृतसर में ही पाई। बाद में वो नैनीताल के शेरवुड कॉलेज में दाखिल हो गए।

स्कूली शिक्षा के बाद वो उच्च अध्ययन के लिए इंग्लैंड जाना चाहते थे। लेकिन उनके पिता ने उन्हें बहुत छोटा जानकर विदेश नहीं भेजा।

बाद में उन्होंने अमृतसर के हिंदू सभा कॉलेज में दाख़िला लिया। उन दिनों 'ब्रिटिश इंडियन आर्मी' में भारतीयों को सीधा कमीशन मिलने लगा था और देहरादून में 'इंडियन मिलिट्री एकेडमी' की स्थापना की गई थी।

सैम ने भी एकेडमी के पहले बैच में प्रवेश के लिए आवेदन किया और सफल हो गए।

मानेकशॉ पर डॉक्यूमेंट्री

फ़ील्ड मार्शल मानेकशॉ पर एक डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म 'इन वार एंड पीस: द लाइफ़ ऑफ़ फ़ील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ' भी बन चुकी है।

दिल्ली की ग़ैरसरकारी संस्था 'परज़ोर' ने इस डॉक्यूमेंट्री को तैयार किया था ।

ये फ़िल्म एक दादा द्वारा अपने पोते को बताए गए किस्सों पर आधारित थी। जिसमें दादा सैम मानेकशॉ ने अपने पोते को भारत के कुछ यादगार ऐतिहासिक पलों के बारे में बताया था।

फ़िल्म की निर्देशक जेसिका गुप्ता ने वर्ष 2003 में डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म के उदघाटन समारोह के दौरान यह बताया गया की , "सैम बहादुर का जो मज़ाक करने का अंदाज़ है, जो अपनापन है, उससे आपको इस बात का एहसास हो जाता है कि आप किसी हीरो के पास बैठे हुए हैं।"

इस डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म में एक जगह सैम याद करते हैं कि कैसे 1971 की लड़ाई के बाद तब की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें तलब किया और कहा कि ऐसी चर्चा है कि सैम तख़्ता पलटने वाले हैं।

सैम ने मज़ाक करते हुए अपने जाने-माने अंदाज़ में कहा, "क्या आप ये नहीं समझतीं कि मैं आपका सही उत्तराधिकारी साबित हो सकूँगा? क्योंकि आपकी नाक लंबी है और मेरी भी नाक लंबी ही है।"

और फिर सैम ने कहा, "लेकिन मैं अपनी नाक किसी के मामले में नहीं डालता और सियासत से मेरा दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है।"

फिल्म में सैम को ये भी कहते हुए दिखाया गया है कि शिमला समझौते के दौरान भारत ने कश्मीर समस्या सुलझाने का सुनहरा मौक़ा ख़ो दिया।




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Webinfosys's Hindi News : अफ़ग़ानिस्तान में बढ़ते हमलों पर चिंता

अमरीकी रक्षामंत्री राबर्ट गेट्स ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि तालेबान से निपटने की कोशिशों में पाकिस्तान की ओर से ढीलापन चिंताजनक है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी अफ़ग़ानिस्तान से लगी सीमा पर चरमपंथी गतिविधियों को नियंत्रित कर पाने में अक्षम रहा है।

परिणाम यह है कि इस ढीलेपन की वजह से चरमपंथी गतिविधियों में ख़ासी तेज़ी आई है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की इसी लापरवाही की वजह से पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान के हमलों में काफी बढ़ोत्तरी हुई है।

राबर्ट गेट्स ने यह बात अफ़ग़ानिस्तान में बढ़ते चरमपंथी हमलों पर जारी हुई एक रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कही।

अमरीका के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने पिछले दिनों अपनी जाँच में पाया है कि पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान में इस वर्ष तालेबान के हमलों में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

अब अमरीकी रक्षामंत्री तालेबान के बढ़ते हमलों के लिए पाकिस्तान को भी ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं।

राबर्ट गेट्स ने पाकिस्तान के चरमपंथियों से बातचीत करने और समझौते करने जैसी कोशिशों की भी निंदा की।

उन्होंने कहा, "पाकिस्तान सरकार ने पिछले कुछ समय में चरमपंथियों से बातचीत का प्रस्ताव रखकर उनके दबाव को कम किया है। इससे घुसपैठ में तेज़ी आई।"

हालांकि गेट्स ने पाकिस्तान सरकार की इस बात की सराहना भी की कि वे सूबा सरहद के इलाके में अपना नियंत्रण और बढ़ाने का मन बना चुकी है।

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Webinfosys's Hindi News : भारत प्रशासित कश्मीर में जारी हैं प्रदर्शन

भारत प्रशासित कश्मीर में अमरनाथ मंदिर बोर्ड को 40 हेक्टेयर वनभूमि दिए जाने के मुद्दे पर लगातार चौथे दिन भी प्रदर्शनों को दौर जारी है। कश्मीर घाटी में शुक्रवार को जुमे की नमाज़ के मद्देनज़र चौकसी बरती जा रही है।

राजधानी श्रीनगर में सिविल लाइन्स इलाक़े और मौलाना आज़ाद रोड से एक विशाल प्रदर्शन निकाला गया है जिसमें हज़ारों लोगों ने भाग लिया है। अब तक घाटी से कोई अप्रिय घटना होने की ख़बर नहीं है।

अमरनाथ बोर्ड को ज़मीन देने का फ़ैसला उस समय राज्य के राज्यपाल ने लिया था। शुरुआत में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व अलगाववादी संगठनों ने किया था और इन प्रदर्शनों के कारण जन-जीवन ख़ासा प्रभावित हुआ है।

घाटी में सोपोर, अनंतनाग और शोपियान में भी विरोध प्रदर्शन जारी हैं। चार दिनों के प्रदर्शनों के दौरान पुलिस फ़ायरिंग में अब तक तीन लोगों के मारे गए है।

जनजीवन प्रभावित

ग़ौरतलब है कि शुक्रवार को प्रशासन ने केंद्रीय रिज़र्व पुलिस को घाटी में अनेक जगहों से हटा लिया है और उसकी जगह राज्य की पुलिस को तैनात किया गया है।

पिछले कुछ दिनों में सीआरपीएफ़ के ख़िलाफ़ कुछ जगहों पर पथराव करने के आरोप लगे थे।

पिछले कुछ दिनों से प्रदर्शनों के बीच किसी भी वाहन को सड़क पर उतरने नहीं दिया जा रहा था और अस्पताल जा रही एंबुलेंस भी इसमें शामिल थीं।

शुक्रवार को शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसिस के निदेशक डॉक्टर अब्दुल हमीद ने प्रदर्शनकारियों से अपील की थी कि वे एंबुलेंस का रास्ता न रोकें और उन्हें सड़कों से गुज़रने दें। इसके बाद स्थिति में कुछ बदलाव आया है और एंबुलेंस सड़कों से गुज़र रही हैं।

उधर राजनीतिक स्तर पर राज्य के उप मुख्यमंत्री मुज़फ़्फ़र बेग ने उम्मीद जताई है कि राज्य के नए राज्यपाल एनएन वोहरा इस मसले का हल खोजने के लिए कुछ पहल करेंगे।

उम्मीद जताई जा रही है कि अमरनाथ बोर्ड को ज़मीन दिए जाने के ख़िलाफ़ विरोध को देखते हुए वे राज्य सरकार के मंत्रिमंडल को इस बारे में पत्र लिख सकते हैं और स्थिति में कुछ बदलाव हो सकता है।

गुरुवार को जम्मू क्षेत्र में विश्व हिंदू परिषद और भारतीय जनता पार्टी ने हिंदू बाहुल्य जम्मू क्षेत्र में हड़ताल का आहवान किया था जो ख़ासा असरदार रहा था। लेकिन इससे राज्य में सांप्रदायिक स्तर पर विभाजन का ख़तरा भी नज़र आने लगा है ।


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Thursday, June 26, 2008

Webinfosys's Hindi News : लॉर्ड्स पर 25 साल बाद आई मिलन की शाम

पच्चीस जून 1983…शनिवार की उस शाम को लंदन के लॉर्डस मैदान पर जो हुआ वो किसी करिश्मे से कम नहीं था। शतरंज की बिसात पर एक तरफ़ था क्रिकेट की दुनिया का बादशाह वेस्टइंडीज़ और दूसरी ओर मामूली सा प्यादा भारत।

लेकिन उस मामूली से प्यादे ने कुछ ऐसी चाल चली कि बादशाह चारों खाने चित हो गया।

वेस्टइंडीज़ को मात दे 1983 में भारत बना था विश्व क्रिकेट चैंपिय।

उस ऐतिहासिक लम्हे के 25 साल बाद कपिल देव के नेतृत्व में लॉर्डस में इकट्ठा हुए विश्व विजेता टीम के सभी धुरंधर जिसमें शामिल थे सुनील गावस्कर, मदन लाल, मोहिंदर अमरनाथ,रॉजर बिन्नी और संदीप पाटिल जैसे खिलाड़ी।

तारीख़ वही, मैदान वही, ढलती शाम की वही मंज़र....तो कैसा लग रहा था दोबारा लॉर्ड्स आकर फ़ाइनल के हीरो मोहिंदर अमरनाथ को।

वे कहते हैं," सब कुछ वैसा ही है। वैसी ही धूप खिली है, वैसा ही दिन है। यादें एकदम ताज़ा हैं।हम सब खिलाड़ी साथ आए हैं इतने सालों के बाद, बड़ा अच्छा महसूस हो रहा है कि ये वही जगह है जहाँ हमने इतिहास बनाया था जो आज की पीढ़ी के लिए यादगार बन गया है। "

यही थी वो जादूई गेंद

सफ़र अगर 25 साल पुराना हो तो यादों का पिटारा सा खुल जाता है। 1983 विश्व कप में सर्वश्रेष्ठ विकेटकीपर रहे सैयद किरमानी इस मिलन के बारे में कहते हैं, "हमारे बच्चे, पोता-पोती, नाती-नातिन जब कभी इस मिलन का वीडियो देखेंगे तो सोचेंगे कि हमारे दादा, हमारे नाना भारत के लिए खेले थे, आहा वर्ल्ड कप जीते थे। तो उन्हें खुशी होगी और अगर वो कभी भारत का नाम रोशन करना चाहेंगे तो प्रेरणा मिलेगी।"

समारोह में बलविंदर सिंह संधू एक गेंद लेकर घूमते रहे। जब हमने उनसे इस गेंद की ख़ासियत के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि यही वो जादूई गेंद जो वर्ल्ड कप में इस्तेमाल हुई थी और जिससे उन्होंने ग्रीनिज को आउट किया था। ये गेंद तब से सुनील गावस्कर के पास है।

इस ख़ूबसूरत शाम के आयोजन का श्रेय जाता है सुनील गावस्कर को। उन्होने एक साल पहले ही लॉर्ड्स का लॉंग रूम बुक कर लिया था इस खा़स दिन के इंतज़ार में।

लिटिल मास्टर ने अपनी भावनाएँ कुछ यूँ बयां की," उस दिन जब कपिल देव ने अपने सर के ऊपर वर्ल्ड कप उठाया था उससे ज़्यादा फ़क्र मुझे कभी महसूस नहीं हुआ।"

कपिल को चाहिए दूसरा वर्ल्ड कप

पूरे समारोह में जहाँ हर कोई पुरानी यादों में खोया था वहीं एक अच्छे रणनीतिकार की तरह पूर्व कप्तान कपिल देव की नज़र भविष्य पर टिकी हुई थी।

जीत की 25वी सालगिरह पर कपिल देव ने इच्छा जताई कि अगले वर्ल्ड कप में ट्रॉफ़ी फिर भारत लौटे।

कपिल ने उम्मीद जताई कि दस साल बाद फिर से ऐसा ही मिलन होगा और इसी बीच हंसी मज़ाक चलता रहा, पूर्व खिलाड़ियों ने एक दूसरे पर खूब जुमले कसे।

क्लाइमैक्स हुआ जब कपिल देव समेत पूरी टीम बालकनी पहुँची और विश्व कप एक बार फिर थामा। और उसके बाद खुली शैम्पेन की बोतल ठीक वैसे ही जैसे 25 साल पहले खुली थी।

जब किसी ने पूछा कि उस रात जश्न कैसा मनाया था तो कपिल बोले कि खु़शी में सब नशे में इतने चूर थे कि क्या हुआ किसी को याद नहीं है।

1983 में विश्व कप में भारत की ऐतिहासिक जीत की बातें किताबों और अख़बारों में पढ़ी हैं, किस्सों में सुनी है-ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ कपिल देव के वो नाबाद 175 रन, फ़ाइनल में ग्रीनिज को चकमा देती बलविंदर सिंह संधू की गेंद, मदनलाल की गेंद पर रिचर्डस का कैच लेते कपिल देव, फ़ाइनल के हीरो मोहिंदर अमरनाथ की गेंदबाज़ी॥ पर अफ़सोस की बाल मन के स्मृति पटल पर वो यादें दर्ज नहीं हुई।

उस करिश्मे को ख़ुद न देख पाने की टीस हमेशा मन में रही। लेकिन बुधवार शाम यानी 25 जून 2008 को लंदन के लॉर्डस मैदान पर जो मंज़र देखा उसने पुरानी टीस के निशां मिटा दिए।


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Webinfosys's Hindi News : वाम से निराश सोनिया ने की आपात बैठक

अमरीका के साथ परमाणु समझौते के मुद्दे पर यूपीए-वाम दलों की बैठक बेनतीजा ख़त्म होने से उपजे हालात की समीक्षा के लिए कांग्रेस कोर कमेटी की आपात बैठक हुई है।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अगुआई में हुई इस बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी, गृह मंत्री शिवराज पाटिल और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए।

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) और वाम दलों के बीच अमरीका के साथ प्रस्तावित परमाणु समझौते पर कोई सहमति नहीं बनने के तुरंत बाद ये बैठक शुरु हो गई।

समाचार एजेंसियों के मुताबिक बैठक में ज़ोर दिया गया कि वाम दलों के विरोध के बावजूद सरकार अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ सुरक्षा मापदंडों से संबंधित समझौते पर आगे बढ़े।

समाचार एजेंसी यूएनआई के मुताबिक प्रधानमंत्री जहाँ समझौते पर आगे बढ़ने के पक्ष में हैं, वहीं सोनिया गांधी भी इसका समर्थन करती हैं लेकिन वह कम से कम यूपीए के घटक दलों को साथ लेकर चलना चाहती है।

ग़ौरतलब है कि यूपीए में शामिल राष्ट्रीय जनता दल, लोक जनशक्ति पार्टी, डीएमके, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और अन्य दलों के नेताओं से सोनिया गांधी पिछले कुछ दिनों में मिल चुकी हैं।

यूपीए के अधिकतर घटक दल परमाणु समझौते के पक्ष में हैं। हलाँकि कुछ दलों का ये भी कहना है कि समझौता महत्वपूर्ण है लेकिन इस मुद्दे पर ऐसी स्थिति पैदा नहीं हो जिसमें सरकार गिर जाए।

ग़ौरतलब है कि वाम दल अमरीका के साथ प्रस्तावित असैनिक परमाणु समझौते का विरोध करते आए हैं और इस दिशा में आगे बढ़ने पर सरकार से समर्थन वापस लेने की धमकी दे चुके हैं।

बेनतीजा रही बैठक

इससे पहले भारत-अमरीका परमाणु सहयोग समझौते के मुद्दे पर यूपीए और वामदलों की बुधवार को हुई नौवीं बैठक एक बार फिर बिना किसी नतीजे के ख़त्म हो गई ।

विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने बैठक में भाग लेने के बाद कहा कि अगली बैठक जल्द होगी और उसमे समिति अपनी सिफारिशें रखेगी।

विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी और सीपीएम नेता सीताराम यचुरी ने लगभग डेढ घंटे चली बैठक के बाद चार वाक्यों का एक बयान पढा कि दोनों पक्षों ने अपनी अपनी बात रख दी है और इस मसले पर एक और बैठक होगी जिसकी तारीख़ अभी तय नही है।
इस बैठक के बाद जो कहा गया उससे महत्वपूर्ण वो है जो नहीं कहा गया और जो नहीं कहा गया वो ये की वामपंथी पार्टियों ने एक लिखित नोट सरकार को दे दिया है जिसमें उन्होंने साफ़तौर पर कह दिया है की सरकार अतंरराष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी के साथ क़रार पर हस्ताक्षर ना करे वरना वो सरकार से समर्थन वापस ले लेगें, और इसमे कोई नई बात नही है।

जहाँ तक सरकार की बात है उसने वामपंथी पार्टियों को कहा है की भारत अमरिका परमाणु समझौते पर आगे बढने के अलावा कोई विकल्प नही है, हालाँकि इससे पहले वो यूपीए के घटकदलों को ये अहसास कराना चाहती है की उसने वामदलों को साथ रखने की पूरी कोशिश की।

वामदलों के साथ बैठक के बाद विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात की और ख़बर है की प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आगामी शुक्रवार को मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई है।

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Webinfosys's Hindi News : ज़िम्बाब्वे में नेतृत्व की सफलता: मंडेला

रंगभेद के ख़िलाफ़ संघर्ष के प्रतीक नेल्सन मंडेला ने पहली बार ज़िम्बाब्वे में गहराते राजनीतिक संकट के बारे में सार्वजनिक तौर पर बयान देते हुए कहा है कि ज़िम्बाब्वे नेतृत्व की सफलता से जूझ रहा है जो दुखद है।

दक्षिण अफ़्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला ने लंदन में उनके 90वें जन्मदिवास के मौक़े पर एक रात्रिभोज के दौरान ऐसी टिप्पणी की है।

ज़िम्बाब्वे में विपक्ष की मूवमेंट फ़ॉर डेमोक्रेटिक चेंज यानी लोकतांत्रिक बदलाव के लिए अभियान का कहना है कि सत्ताधारी पार्टी के समर्थक सशस्त्र लड़ाकों ने उसके 86 समर्थकों को जान से मार दिया है और दो लाख लोग अपने घर छोड़कर भागने को मजबूर हुए हैं।

मुगाबे का नाइटहुड वापस

नेल्सन मंडेला ने कहा, "हम दुख के साथ दारफुर में हो रही त्रासदी को देख रहे हैं। अपने घर पर नज़र डालें तो अपने ही देश में हमने साथी अफ़्रीकियों के ख़िलाफ़ शुरु हुई हिंसा को देखा है और पड़ोस में जिम्बाब्वे में हम नेतृत्व की असफलता का दुखद नज़ारा देख रहे हैं।"

नेल्सन मंडेला ने ज़िम्बाब्वे के राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे का नाम लेकर उनकी आलोचना नहीं की है और न ही उन्होंने ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ किसी विशेष कार्रवाई का आहवान किया है।

दक्षिण अफ़्रीका के नेताओं ने ज़िम्बाब्वे की सरकार से अनुरोध किया है कि वह शुक्रवार को होने वाले राष्ट्रपति पद के विवादित चुनावों को स्थगित कर दे।

ज़िम्बाब्वे की सरकार से ये अनुरोध भी किया गया है कि वह विपक्ष के साथ बातचीत शुरु करे.

उधर ब्रिटेन ने ज़िम्बाब्वे के राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे को दी गई नाइटहुड की उपाधि के वापस लेने की घोषणा की है।

ब्रितानी सरकार का कहना है कि ये कार्रवाई ज़िम्बाब्वे में मुगाबे की मानवाधिकारों और लाकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति उदासीनता दर्शाती है।

इसके पहले अमरीका ने कहा था कि वो ज़िम्बाब्वे में शुक्रवार को होने वाले चुनावों को मान्यता नहीं देगा।
दक्षिणा अफ़्रीका के राष्ट्रपति थाबो एम्बेकी की ज़िम्बाब्वे में मुख्य वार्ताकार की भूमिका को नुक़सान न पहुँचाने के ख़्याल से नेल्सल मंडेला अब तक चुप थे।
मंडेला कुछ ही शब्द बोले हैं लेकिन उनके शब्दों को ख़ासा वज़न और असर होगा।

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Wednesday, June 25, 2008

Webinfosys's Hindi News : महँगाई पर क़ाबू पाने की कोशिश

बढ़ती महँगाई को क़ाबू करने के लिए रिज़र्व बैंक ने एक बार फिर ब्याज़ दर बढ़ा दिए है। इससे आम लोगों के लिए कर्ज़ लेना अब और महँगा हो सकता है।

भारतीय रिज़र्व बैंक ने मंगलवार देर शाम रेपो रेट और नकद आरक्षी अनुपात यानी सीआरआर में वृद्धि की घोषणा की।

रेपो रेट और सीआरआर दोनों में आधा प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गई है।

रेपो रेट वह दर है जिस पर रिज़र्व बैंक अन्य वाणिज्यिक बैंकों को कर्ज़ देता है।

वहीं सीआरआर वो राशि है जो वाणिज्यिक बैंकों को रिज़र्व बैंक के खजाने में रखनी पड़ती है।

ताज़ा फ़ैसले के बाद रेपो रेट बढ़ कर 8.5 फ़ीसदी और सीआरआर बढ़ कर 8.75 फ़ीसदी हो गया है।

सीआरआर दो चरणों में बढ़ेंगे। पाँच जुलाई से इसमें 0.25 फ़ीसदी की वृद्धि होगी और इतनी ही बढ़ोत्तरी 19 जुलाई से शुरु होने वाले पखवाड़े में लागू होगी।

रेपो रेट बढ़ाए जाने से ख़ुदरा कारोबार करने वाले बैंकों पर भी ब्याज़ दर बढ़ाने का दबाव बनेगा।

इससे होम लोन, निजी लोन और वाहन लोन और महँगे होने की आशंका है।

रिज़र्व बैंक महँगाई को क़ाबू में लाने के लिए इस वित्त वर्ष के दौरान कई बार रेपो रेट बढ़ा चुका है।

लेकिन इसके बावजूद सात जून को समाप्त हुए सप्ताह में महँगाई की दर बढ़ कर 11.05 फ़ीसदी हो चुकी है।

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Webinfosys's Hindi News : पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान में हमले 40 प्रतिशत बढ़े'

अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद अमरीकी सेना के एक क्षेत्रीय कमांडर ने कहा है कि पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान विद्रोहियों के हमलों में पिछले साल के मुकाबले 40 प्रतिशत वृद्धि हुई है।

मेजर जनरल जैफ़री शलोएसर का कहना है कि विद्रोही आर्थिक विकास को बाधित करने के मक़सद से अपने लक्ष्य का चयन कर रहे हैं।

उनकी ये टिप्पणी तब आई है जब नान्गरहार प्रांत में बारूदी सुरंग से किए गए हमले में एक नैटो सैनिक मारा गया।

उधर पाकिस्तान के साथ सटे अफ़ग़ानिस्तान के इलाक़ों में हुए नैटो के हमलों में 14 विद्रोही मारे गए। इससे पहले पाकटिया प्रांत में अफ़ग़ान पुलिस और विद्रोहियों के बीच झड़पें हुई थीं।

मेजर जनरल शलोएसर का कहना था कि पाकिस्तान की सीमा के साथ लगते इलाक़ों में होने वाले विद्रोहियों के हमले कुल हमलों का 12 प्रतिशत थे।

'शरण मिलती है, आज़ादी से घूमते हैं'

इस क्षेत्र में अप्रैल से अब तक अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद गठबंधन सेनाओं के 40 सदस्य - सैनिक और उनसे जुड़े नागरिक - मारे गए हैं।

अमरीकी सैन्य कमांडर ने तालेबान और अल क़ायदा के अफ़ग़ान और पाकिस्तानी सदस्यों को इन हमलों के लिए ज़िम्मेदार ठहराया है।

वाशिंगटन में रिपोर्टरों से वीडियो लिंक के ज़रिए बात करते हुए उन्होंने कहा, "दुश्मनों को शरण मिल रही है और वह सीमांत इलाक़ों में कुछ आज़ादी से घूम-फिर रहे हैं। दुश्मन उग्र तरीक़े से स्कूलों को आग लगा रहे हैं, शिक्षकों और विद्यार्थियों को जान से मार रहे हैं।"

उनका कहना था, "अगर पूरी स्थिति पर नज़र डालें तो आपको दिखाई देगा कि जानबूझकर उन सभी गतिविधियों को निशाना बनाया जा रहा है जिन से आम अफ़ग़ान नागरिक के जीवन का स्तर बेहतर होता है।"

हाल के दिनों में अमरीका के पाकिस्तान के साथ रिश्ते कुछ ख़राब हुए हैं। ऐसा तब से हुआ है जब से पाकिस्तान को 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ जंग' में अहम साथी मानने वाले अमरीका ने पाकिस्तान पर सरहदी इलाक़ों में सक्रिय चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का दबाव बढ़ाया है।

उधर पाकिस्तान ने जून की अमरीकी हवाई कार्रवाई की निंदा की थी जिसमें उसके 11 सैनिक मारे गए थे।




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Webinfosys's Hindi News : यूपीए और वामदलों की अहम बैठक आज

भारत-अमरीका परमाणु समझौते के मुद्दे पर बुधवार को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन और वामदलों की अहम बैठक होने जा रही है। इससे पहले विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी महासचिव प्रकाश कारत के बीच बातचीत हुई है।

इस मुद्दे पर पैदा हुआ गतिरोध यूपीए के घटक दलों के प्रयासों के बावजूद ख़त्म नहीं हो पाया है। दोनों पक्ष राष्ट्रहित, रणनीतिक प्राथमकिताओं और ऊर्जा की ज़रूरतों की दुहाई दे रहे हैं।

जहाँ यूपीए सरकार अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ बातचीत के अंतिम चरण में भाग लेकर भारत का पक्ष रखने को उत्सुक है वहीं वामदल भारत-अमरीका असैनिक परमाणु समझौते के अपने विरोध पर अड़े हुए हैं।

वामदलों ने दोहराया है कि यदि आईएईए के साथ आगे वार्ता होती है तो वे यूपीए सरकार को बाहर से दिया गया अपना समर्थन वापस ले लेंगे।

दूसरी ओर अमरीका लगातार कहता आ रहा है कि यदि भारत इस समझौते को अंजाम तक पहुँचाना चाहता है तो उसके लिए समय कम ही है।

भारत में अमरीकी राजदूत डेविड मलफ़ोर्ड प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री पृथ्वीराज चौहान से मिले हैं।

'समझौता भी, वामदलों का साथ थी

यूपीए में कांग्रेस के सहयोगी दलों - राष्ट्रीय जनता दल और द्रविड़ मुनेत्र कषगम यानी डीएमके ने जहाँ कहा है कि भारत-अमरीका असैनिक परमाणु संधि देश के हित में है। वहीं वे ये भी कह रहे हैं कि वे चुनाव निकट होने की परिस्थिति में वामदलों को साथ लेकर चलना चाहते हैं।

यूपीए के नेताओं - प्रणव मुखर्जी, शरद पवार, लालू प्रसाद यादव और करुणानिधि ने वामपंथी नेताओं के साथ कई बैठकें की हैं। ये नेता अलग से यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मिले हैं।

ग़ौरतलब है कि बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) पहले ही सरकार से
समर्थन वापस ले चुकी है। भले सरकार को इससे तत्काल कोई ख़तरा नहीं है लेकिन वामदलों की धमकी को देखते हुए यूपीए सरकार की स्थिरता पर सवाल खड़े हो गए है ।

उधर हाल में कांग्रेस के क़रीब आई समाजवादी पार्टी ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

मुलायम का रुख़

समाजवादी पार्टी नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने कहा है कि वे संयुक्त राष्ट्रीय प्रगतिशील गठबंधन (यूएनपीए) के नेताओं से तीन जुलाई को बातचीत करेंगे और उसके बाद ही भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर कोई आख़िरी फ़ैसला करेंगे।

यूएनपीए में समाजवादी पार्टी, तेलुगू देशम पार्टी, इंडियन नेशनल लोकदल और असम गण परिषद शामिल हैं। कुछ अन्य दल भी पहले इस गठबंधन में शामिल थे लेकिन अब वे यूएनपीए के साथ हैं या नहीं इस पर उनका रुख़ स्पष्ट नहीं है।

समाजवादी पार्टी नेता अमर सिंह कह चुके हैं कि रातों-रात इस मुद्दे पर उनकी पार्टी अपना रुख़ बदल नहीं सकती क्योंकि सरकार ने ऐसे कोई नए तथ्य नहीं रखे हैं जिनके कारण पार्टी परिवर्तन करना ज़रूरी समझे।

इस बीच वाममोर्चा के घटक फ़ॉरवर्ड ब्लॉक ने बुधवार को हो रही बैठक से पहले धमकी दी है कि अगर इस बैठक से कोई ठोस बात सामने नहीं आई तो वह यूपीए और वामदलों की इस समिति में बने रहने पर फ़ैसला करेगा।

वाममोर्चा का एक घटक रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) पहले ही बैठकों के बावजूद मसले पर प्रगति न होने के कारण इस समिति से बहार आ चुका है ।

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Tuesday, June 24, 2008

Webinfosys's Hindi News :रोनाल्डो कब और कितने में बिकेंगे?

पुर्तगाल और मैनचेस्टर युनाइटेड क्लब के स्टार फुटबॉल खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो को लेकर विवाद लगातार जारी है।

23 वर्षीय रोनाल्डो रियाल मड़्रिड की ओर से खेलना चाहते हैं लेकिन मैनचेस्टर युनाइटेड के करार से बंधे हैं, मैनचेस्टर युनाइटेड का कहना है कि वह रोनाल्डो को 'बेचने' को तैयार नहीं है।

इन विवादों के बीच रोनाल्डो छुट्टियाँ मनाने चले गए हैं जबकि फुटबॉल क्लबों के अधिकारी उनके भविष्य पर विचार विमर्श कर रहे हैं।

रियाल मड्रिड के प्रमुख रामोन काल्ड्रोन ने कहा है कि कोई बातचीत तभी शुरू हो सकती है जबकि "मैनचेस्टर युनाइटेड सौदा करने को तैयार हो।"

काल्ड्रोन ने कहा, "वे इस समय मैनचेस्टर युनाइटेड के खिलाड़ी हैं और हम इस मामले में दख़ल नहीं देना चाहते।"

यूरो 2008 से पुर्तगाल के बाहर होने के बाद रोनाल्डो ने कहा कि वे अपने घायल पैर का ऑपरेशन कराना चाहते हैं लेकिन यह ऑपरेशन उनकी तीन सप्ताह की छुट्टियों के बाद होगा।

मैनेचस्टेर युनाइटेड का कहना है कि वह कोई सौदा नहीं करना चाहता लेकिन रोनाल्डो के बारे में कहा जा रहा है कि वे रियाल मड्रिड से खेलना चाहते हैं।

ऊँची क़ीमत

रोनाल्डो की क़ीमत पाँच करोड़ से आठ करोड़ पाउंड के बीच लगाई जा रही है, रियाल मड्रिड के कोच ब्रेंड शुस्टर का कहना है कि "उन्हें टीम में लाने के ज़रूरी रक़म अदा की जानी चाहिए।"

शुस्टर ने रियाल मड्रिड के प्रमुख से कहा है कि "सबसे ज़रूरी काम चैम्पियंस लीग जीतना है और रोनाल्डो इसमें हमारी मदद कर सकते हैं"।

रोनाल्डो ने कहा, "सबको पता है कि मैं क्या चाहता हूँ लेकिन सब कुछ मेरे हाथ में नहीं है, मैं सारे फ़ैसले नहीं करता लेकिन अपने सपने पूरा करना चाहता हूँ।"

रोनाल्डो का कहना है कि उनके मैनचेस्टर युनाइटेड को छोड़ने के फ़ैसले से कुछ लोग आहत हो सकते हैं लेकिन वे इसके बारे में कुछ नहीं कर सकते ।


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Webinfosys's Hindi News : ज़िम्बाब्वे में चुनाव टाल दिए जाएँ: मून

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने कहा है कि ज़िम्बाब्वे में राष्ट्रपति चुनाव टाल दिए जाने चाहिए क्योंकि वहाँ की विपक्षी पार्टी चुनावी प्रक्रिया से अलग हो गई है।

इस बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक बयान जारी करके "ज़िम्बाब्वे में जारी हिंसा की राजनीति और विपक्षी पार्टी को प्रचार का अवसर न दिए जाने" की कड़ी आलोचना की है।

बान की मून ने कहा कि मुख्य विपक्षी नेता के फ़ैसले की वजह सबकी समझ में आती है, उन्होंने सरकार की कथित मनमानी और हिंसा की राजनीति की निंदा की।

ज़िम्बाब्वे के चुनाव अधिकारियों ने घोषणा की है कि शुक्रवार को पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक़ राष्ट्रपति चुनाव कराए जाएँगे।

इस बीच मूवमेंट फॉर डेमोक्रेटिक चेंज (एमडीसी) के नेता मार्गन चांगिराई ने हरारे में डच दूतावास में शरण ली है।

डच दूतावास के प्रवक्ता ने कहा है कि चांगिराई अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं लेकिन उन्होंने शरण की माँग नहीं की है।
एक डच मंत्री ने बताया कि चांगिराई शांति से अपने अगले क़दम की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि उनका अगला क़दम क्या होगा।

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने कहा, "अगर तय कार्यक्रम पर चुनाव होते हैं तो इससे देश में विभाजन की दरार गहरी होगी और चुनाव परिणाम विश्वसनीय नहीं होंगे। ज़िम्बाब्वे में स्वंतत्र और निष्पक्ष चुनाव का वातावरण नहीं है, हिंसा और आतंक का माहौल है। पूरी दुनिया ने देखा है कि वहाँ कितनी हिंसा हो रही है।"

कई अफ़्रीकी देशों के नेताओं से बातचीत के बाद बान की मून ने कहा कि ज़िम्बाब्वे की सरकार को बहुत साफ़ शब्दों में कहा कि वह चुनाव टाल दे।

क्षेत्रीय राजनीति

बान की मून ने ज़िम्बाब्वे के मामले कोक्षेत्रीय स्थिरता का मसला बताते हुए कहा है कि इसके परिणाम ज़िम्बाब्वे की सीमा से बाहर होंगे।

विपक्षी नेता को उम्मीद है कि उसके पड़ोसी देश राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे पर दबाव बनाएँगे लेकिन पड़ोसी देश अब तक मुगाबे का ही बचाव करते रहे हैं।

ज़िम्बाब्वे के पड़ोसी देश दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति थाबो एम्बेकी इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभाते रहे हैं लेकिन उन्होंने रॉबर्ट मुगाबे की आलोचना नहीं की है।

ज़ाम्बिया के राष्ट्रपति लेवी वानावासा ने अब तक सबसे सख़्त बयान दिया है और उन्होंने ज़िम्बाब्वे के घटनाक्रम को शर्मनाक बताया है।

नामीबिया, बोत्सवाना, अंगोला जैसे सभी देशों ने हिंसा की आलोचना तो की है लेकिन चुनाव के बारे में कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है।

मोज़ाम्बिक ने ज़िम्बाब्वे से निकाले गए कुछ गोरे किसानों को पनाह दी है और माना जाता है कि वह विपक्षी आंदोलन से सहानुभूति रखता है।

तंज़ानिया और कांगो परंपरागत रुप से मुगाबे के समर्थक रहे हैं जबकि मलावी ने निष्पक्ष रवैया अख़्तियार कर रखा है।


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Webinfosys's Hindi News : राजनीतिक सरगर्मियाँ जारी, सपा ने पत्ते नहीं खोले

भारत-अमरीका परमाणु समझौते के मुद्दे पर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन और वामदलों के बीच पैदा हुए गतिरोध को ख़त्म करने के प्रयास जारी हैं।
यूपीए के नेताओं की बैठकों का दौर जारी है और कई वरिष्ठ नेता यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिले हैं।

जहाँ यूपीए सरकार अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ बातचीत के अंतिम चरण में भाग लेकर भारत का पक्ष रखने को उत्सुक है वहीं वामदल भारत-अमरीका असैनिक परमाणु समझौते के अपने विरोध पर अड़े हुए हैं।

वामदलों ने दोहराया है कि यदि आईएईए के साथ आगे वार्ता होती है तो वे यूपीए सरकार को बाहर से दिया जाने वाला समर्थन वापस ले लेंगे। ग़ोरतलब है कि इस मुद्दे पर बनाई गई यूपीए-वाम समनवय समिति की बैठक बुधवार यानी 25 जून को होनी है।

बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) पहले ही सरकार के समर्थन वापस ले चुकी है। चाहे सरकार को इससे तत्काल कोई ख़तरा नहीं है लेकिन वामदलों की धमकी को देखते हुए यूपीए सरकार की स्थिरता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

समाजवादी पार्टी का रुख़

उधर हाल में कांग्रेस के क़रीब आई समाजवादी पार्टी ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। समाजवादी पार्टी नेता अमर सिंह ने कहा है कि वे परमाणु मुद्दे पर अपना रुख़ रातों-रात बदल नहीं सकते।

उनका कहना था कि वे संयुक्त राष्ट्रीय प्रगतिशील गठबंधन (यूएनपीए) के नेताओं और वामपंथी नेताओं से लगातार संपर्क में हैं। यूएनपीए में समाजवादी पार्टी, तेलुगू देशम पार्टी, इंडियन नेशनल लोकदल और असम गण परिषद शामिल है। कुछ अन्य दल भी पहले इस गठबंधन में शामिल थे लेकिन अब वे यूएनपीए के साथ हैं या नहीं इस पर उनका रुख़ स्पष्ट नहीं है।

अमर सिंह ने एक भारतीय टीवी चैनल को बताया, "(कांग्रेस में से) किसी ने मुझसे संपर्क नहीं किया है। हमारे समर्थन के बारे में 'काईट फ़्लाइंग' हो रही है यानी अटकलें लगाई जा रही हैं। हम यूएनपीए में हैं और यूएनपीए की अन्य साथियों से चर्चा के बिना हमारे लिए इस विषय में अकेले कोई फ़ैसला करना उचित नहीं होगा।"

सोनिया से बैठकें

राष्ट्रवादी कांग्रेस के शरद पवार, राष्ट्रीय जनता दल के लालू यादव और लोक जनशक्ति के रामविलास पासवान यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिले है ।

राष्ट्रीय जनता दल के लालू प्रसाद यादव ने कहा है, "ये समय चुनाव का नहीं है। वाम दल और हम एक हैं....पहले महँगाई को ख़त्म करना है...ऊर्जा भी देश के लिए ज़रूरी है..."

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद पवार ने यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश कारत से बातचीत के बाद कहा कि उन्हें विश्वास है कि वार्ता से इस मुद्दे का समाधान निकल आएगा।

उधर लोक जनशक्ति पार्टी के रामविलास पासवान का कहना था, "सरकार जा नहीं रही है। ऐसा कोई मुद्दा नहीं है जिसके बातचीत से हल संभव न हो।"

इससे पहले भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर बने गतिरोध के ख़त्म करने के लिए द्रविड़ मुनेत्र कषगम यानी डीएमके के नेता एम करुणानिधि आगे आए थे। उन्होंने यूपीए नेताओं और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी महासचिव प्रकाश कारत के साथ मुलाक़ात की थी।

उधर संसद में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सत्ता में आने की परिस्थिति में उनकी पार्टी चाहेगी कि 'भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर दोबारा चर्चा हो।' उनका कहना था कि वे चाहते हैं कि अमरीका से 'रणनीतिक संबंध बने रहें लेकिन भारत को अमरीका के हाइड एक्ट के दायरे से बाहर रखा जाए।'

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Monday, June 23, 2008

Webinfosys's Hindi News : विश्व विजेता टीम का सम्मान

ब्रिटेन के प्रसिद्ध ला‌र्ड्स के मैदान में 25 जून, 1983 को क्रिकेट विश्व कप जीतकर इतिहास रचने वाली कपिल देव की टीम का भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने रविवार को दिल्ली में सम्मानित किया।

ग़ौरतलब है कि 25 बरस पहले कपिल देव की टीम ने विश्व कप जीतकर भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक सुनहरा अध्याय लिखा था।

बीसीसीआई के अध्यक्ष शरद पवार और खेल मंत्री एमएस गिल ने 1983 में विश्व कप जीतने वाली टीम के सभी सदस्यों को 25-25 लाख के चेक सौंपे।

विश्व कप विजेता टीम के सभी खिलाड़ी इस समारोह में मौजूद थे।

इन खिलाडियों में कप्तान कपिल देव, उपकप्तान मोहिंदर अमरनाथ, दिलीप वेंगसरकर, सुनील गावस्कर, सैयद किरमानी, संदीप पाटिल, कृष्णामाचारी श्रीकांत, यशपाल शर्मा, मदन लाल, रोजर बिन्नी, बलविंदर सिंह संधू, सुनील वाल्सन, रवि शास्त्री, कीर्ति आजाद और संदीप पाटिल शामिल थे।

इस सम्मान समारोह में कपिल ने कहा,'' विश्व कप जीतने के बाद हमें अपने देश के लोगों से जो प्यार मिला है, वह अनमोल है। मैं अपनी टीम के खिलाड़ियों को धन्यवाद देना चाहता हूँ जिनके बिना ये विश्व कप जीत संभव नहीं हो पाता।''

कपिल की तारीफ़

इस अवसर पर सुनील गावस्कर ने कपिल देव की प्रशंसा की और कहा, '' हमें एक ऐसे व्यक्ति की ज़रूरत थी जो हमें रास्ता दिखा सके। कपिल वही व्यक्ति थे जिन्होंने ज़िम्बाव्वे के ख़िलाफ़ 175 रन की शानदार पारी खेलकर हमें विश्व कप जीतने का आत्मविश्वास दिया।''

बीसीसीआई के अध्यक्ष शरद पवार ने कहा, ''1983 में विश्व कप की जीत पूरी तरह टीम प्रयास की जीत थी। इस जीत ने भारतीय क्रिकेट में नए अध्याय की शुरुआत की। हमने पिछले वर्ष ट्वेंटी 20 विश्व कप जीता और हम उम्मीद करते हैं कि 2011 में होने वाले विश्व कप में हम इतिहास दोहराएंगे।''

इस अवसर पर कपिल और सुनील गावसकर को टीम के बाक़ी सदस्यों के हस्ताक्षर वाला एक विशेष बल्ला भी भेंट किया गया जिसकी बाद में नीलामी की जाएगी।

ग़ौरतलब है कि कपिल देव की कप्तानी में भारत ने 1983 में पहली बार विश्व कप जीता था।

लॉर्ड्स के मैदान पर खेले गए फ़ाइनल में भारत ने दो बार की विजेता वेस्टइंडीज़ को हराया था।


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Webinfosys's Hindi News : ई-कचरे के बढ़ते ख़तरों पर सम्मेलन

इंडोनेशिया के बाली द्वीप में इलेक्ट्रानिक और कंप्यूटर कचरा प्रबंधन पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सोमवार से शुरू हो रहा है जिसमें इसके ख़तरों से आगाह किया जाएगा।

इस सम्मेलन में लगभग 170 देशों के मंत्री हिस्सा लेंगे और इसमें इलेक्ट्रानिक और कंप्यूटर कचरे यानी ई-कचरे से निपटने के लिए एक नई सलाहकार समिति भी गठित की जा सकती है।

सम्मेलन में एक नीति पर भी चर्चा होगी ताकि मेडिकल, केमिकल और कंप्यूटर के नुक़सानदेह कचरे से सुरक्षित तरीके से निपटा जा सके।

हांगकांग स्थित बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ग्रीनपीस नामक संगठन अमरीकी कंप्यूटर कचरे को चीन भेजने के विरोध में अभियान चला रहा है।

चीन में मजदूर अपने स्वास्थ्य को ख़तरे में डाल कर कंप्यूटर सर्किट बोर्डों को गलाते हैं ताकि उनसे बहुमूल्य धातु निकाल सके।

इस बैठक में उन 170 देशों के मंत्री शामिल होंगे जिन्होंने कचरा प्रबंधन पर संयुक्त राष्ट्र के बेसल समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

बेसल समझौता

ग्रीनपीस के एडवर्ड चेन का कहना, ''चीन ने भी उस बेसल समझौते को स्वीकार किया है जो नुकसानदेह कचरे को नियंत्रित करता है।''

उन्होंने कहा, ''हम हांगकांग में इस समस्या पर प्रकाश डालने के लिए अभियान चला रहे हैं क्योंकि इस पर बेसल समझौते के तहत ही नियंत्रण रखा जा सकता है।''

उनका कहना था, ''चीन में इस कचरे के आयात पर प्रतिबंध है लेकिन ई-कचरा अक्सर हांगकांग से तस्करी के माध्यम से चीन पहुँचता है।''

एडवर्ड चेन ने बताया,'' हांगकांग में ई-कचरे के ख़िलाफ़ कानून है लेकिन इसमें सर्किट बोर्ड शामिल नहीं किए गए हैं। यही वजह है कि तस्करी के माध्यम से इन्हें बड़ी मात्रा में दक्षिण चीन पहुँचा दिया जाता है।''

उनका कहना था कि हमारी समझ से पिछले 10 साल से हांगकांग देश ई-कचरे को भेजने का माध्यम बना हुआ है।

बेसल समझौता तो 16 साल पुराना है लेकिन अभी इसमें काफ़ी काम किया जाना बाकी है।

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Webinfosys's Hindi News : गैस पाइपलाइन पर निर्णय शीघ्र: देवड़ा

भारत का कहना है कि वो जल्द ही ईरान और पाकिस्तान के साथ गैस पाइपलाइन समझौते पर हस्ताक्षर कर देगा।

रविवार को जेद्दा में ईरानी तेल मंत्री ग़ुलाम हुसैन नज़ारी से बातचीत के बाद भारतीय तेल मंत्री मुरली देवड़ा ने एक भारतीय टीवी चैनल से ये बात कही।

मुरली देवड़ा सऊदी शहर जेद्दा में तेल मंत्रियों की बैठक में हिस्सा ले रहे थे।

बातचीत के बाद मुरली देवड़ा ने कहा कि ईरान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइपलाइन में कुछ दिक्कतें थीं जिन्हें सुलझा लिया गया है।

मुरली देवड़ा ने कहा,'' पाकिस्तान के साथ भी कुछ मुद्दे थे, उनको भी सुलझा लिया है।''

उनका कहना था,'' पाकिस्तान के तेल मंत्री बदल गए हैं इसलिए हम नए मंत्री के साथ बातचीत कर रहे हैं और हम जल्द ही ईरान और पाकिस्तान के साथ समझौते पर हस्ताक्षर कर सकेंगे।''

अटकी योजना

ग़ौरतलब है कि कुछ समय पहले ईरान के राष्ट्रपति अहमदीनेजाद अप्रैल के अंत में भारत यात्रा पर आए थे और उन्होंने भारतीय नेताओं के साथ बातचीत के बाद कहा था कि पाइपलाइन को लेकर सभी मुद्दे 45 दिनों में सुलझा लिए जायेंगे ।

उल्लेखनीय है कि भारत पेट्रोलियम पदार्थों का एशिया में तीसरा बड़ा उपभोक्ता है और वह ईरान से गैस ख़रीदने की परियोजना पर पिछले एक दशक से बातचीत कर रहा है।

प्राकृतिक गैसों के भंडार के मामले में दुनिया के दूसरे सबसे संपन्न देश ईरान ने वर्ष 1995 में ही भारत को गैस बेचने पर सहमति जताई थी।

तीनों देशों के संयुक्त कार्यदल की अब तक कई बैठकें हो चुकी हैं लेकिन कोई अंतिम फ़ैसला नहीं हुआ है। ईरान की योजना है कि 2011 तक पाकिस्तान को गैस की आपूर्ति शुरू कर दी जाए.

पाइपलाइन पर 1995 में बनी सहमति के बाद से गैस की क़ीमतें कई गुना बढ़ चुकी हैं और इसकी क़ीमत पर पेंच फंसा हुआ है।

इस तरह की ख़बरें आती रही हैं कि अमरीकी दबाव के कारण ईरान के साथ गैस परियोजना में देरी हो रही है। हालांकि भारत इससे इनकार करता आया है।

ऐसे ख़बरें भी आईं थीं कि इस परियोजना से भारत के बाहर निकलने पर ईरान उसकी जगह पर चीन को शामिल कर सकता है। इसके बाद से भारत और सक्रिय हो गया है।

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Friday, June 20, 2008

Webinfosys's Hindi News : फ्रांस में कौमार्य पर बहस

एक फ़्रांसीसी अदालत ने उस आदेश को स्थगित कर दिया है जिसके तहत देश की एक ऐसी मुस्लिम महिला कि शादी रद्द कर दी गई थी जिस पर यह आरोप था कि उसने अपने कौमार्य को लेकर अपने पति से झूठ बोला।

इस नए फ़ैसले का अर्थ है कि यह शादी सितम्बर में एक अपीलीय अदालत के निर्णय के आने तक वैध है।

शादी को रद्द करने का मूल फ़ैसला पिछले माह आया था जिसमें अदालत ने माना था कि महिला के पति को शादी में फँसाया गया है।

शादी रद्द करने के अदालती फ़ैसले ने देश में एक बहस छेड़ दी थी। नारीवादियों का कहना था कि ये महिलाओं कि स्वतंत्रता का उल्लंघन है।

महिला ने शादी रद्द करने के फ़ैसले पर आपत्ति जताई थी और उसके वकील का कहना था कि महिला ख़ुद तलाक़ लेकर इस विवाद का अंत करना चाहती है।

मामला

अख़बारों में प्रकाशित समाचारों के अनुसार वर्ष 2006 में महिला, जो कि एक प्रशिक्षु नर्स थी, उसकी शादी तीस साल के एक इंजीनियर से हुई थी।

शादी के पहले महिला ने कथित रुप से यह भरोसा दिलाया था कि उसका पहले कोई पुरूष मित्र नहीं रहा है।

फ्रांसीसी कानून के तहत ऐसी कोई भी शादी रद्द की जा सकती है जिसमें दोनों में से किसी भी पक्ष ने शादी के बारे में "ज़रूरी क़ाबिलियत" को लेकर झूठ बोला हो। इस मामले में कौमार्य को लेकर ऐसा था।

शादी रद्द करने के इस फ़ैसले पर फ़्रांस सरकार ने अपने वकील से इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करने को कहा था।

सरकार को अंदेशा था कि कहीं लोग इस फ़ैसले को उदहारण बना कर कौमार्य को शादी की ज़रुरी शर्त ना बना दें।

अगर सितम्बर में अदालत शादी रद्द करने के फ़ैसले को ख़ारिज कर देती है तो महिला और उसके पति को अलग होने के लिए तलाक़ की अर्ज़ी लगानी होगी।


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Webinfosys's Hindi News : 'सहारा सिटी में सारे निर्माण कार्य अवैध'

उत्तर प्रदेश सरकार ने सहारा उद्योग समूह को चेतावनी देते हुए कहा है कि लखनऊ स्थित सहारा सिटी में उसके सारे निर्माण कार्य अवैध हैं।

इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहारा सिटी में बुधवार रात कई इमारतों को गिराने की कार्रवाई के तरीके पर आपत्ति की और अंतरिम आदेश के तहत कहा है कि राज्य सरकार सहारा सिटी की ज़मीन को 24 घंटे के अंदर वापस लौटा दे।

राज्य सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की घोषणा की है।

इसके बाद गुरुवार शाम लखनऊ विकास प्राधिकरण ने एक विज्ञप्ति जारी की। इसमें कहा गया है कि सरकारी ज़मीन पर अवैध क़ब्ज़ा करने वालों से सख़्ती से निपटा जाएगा, चाहे वो कितने ही प्रभावशाली क्यों न हों।

विज्ञप्ति में कहा गया है, "सहारा सिटी में जितने भी निर्माण कार्य कराए गए उनमें से एक का भी नक़्शा पास नहीं है। इसलिए ये सभी ग़ैर क़ानूनी हैं।"

मनमाना उपयोग

प्राधिकरण का कहना है, "सहारा सिटी जिस भूखंड पर स्थापित है वो लखनऊ विकास प्राधिकरण और नगर निगम ने केवल लाइसेंस पर दिए थे। इनमें 140 एकड़ ज़मीन ग्रीन बेल्ट के लिए और केवल 130 एकड़ ज़मीन आवासीय या व्यावसायिक उपयोग के लिए दी गई थी।"

प्राधिकरण का कहना है कि सहारा इंडिया कंपनी ने समस्त क़ानूनों का उल्लंघन करते हुए इस ज़मीन का मनमाने ढंग से उपयोग किया।

राज्य सरकार ने सहारा इंडिया के उस आरोप को बेबुनियाद बताया है जिसमें कहा गया है कि बुधवार रात को जो कार्रवाई की गई वो अंबेडकर पार्क का विस्तार करने के लिए की गई थी।

प्राधिकरण के प्रवक्ता ने कहा कि सहारा समूह ने मास्टर प्लान को धता बताकर तीस मीटर चौड़ी सड़क की ज़मीन अपनी चहारदीवारी के अंदर ले ली और इसे निजी संपत्ति बना लिया।

उन्होंने कहा कि 13 जून को इस मसले पर सहारा समूह के लोगों के साथ बैठक भी हुई थी और इसी अवैध क़ब्ज़े को हटाने के लिए बुधवार रात कार्रवाई की गई।

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Webinfosys's Hindi News : 'युद्ध में हथियार न बने बलात्कार'

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एकमत से कहा है कि युद्ध में बलात्कार का हथियार की तरह इस्तेमाल रोका जाना चाहिए क्योंकि इससे विश्वशांति को ख़तरा हो सकता है।

इस पर सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव रखा गया था जिस पर सभी ने सहमति दी।

इस प्रस्ताव में विवरण दिए गए हैं कि किस तरह बलात्कार को सोची समझी रणनीति में शामिल करने से अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा पैदा हो रहा है।

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने कहा कि कुछ ऐसे समाज जो अभी विवाद से उबर रहे हैं वहाँ 'महिलाओं की स्थिति अकथनीय' है।

संयुक्त राष्ट्र एक जाँच समिति भी बना रहा है जो अगले साल जून में इस बात की रिपोर्ट देगा कि यह समस्या कितनी बड़ी है और इससे किस तरह निपटा जा सकता है।

मानवाधिकार संगठनों ने इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक बताया है।

हथियार

चाहे वह पश्चिमी सूडान में दारफ़ूर का विवाद हो या फिर कांगो का, रवांडा हो या फिर लाइबेरिया, हर जगह महिलाओं के साथ बलात्कार होता है, जीतने के लिए या फिर धमकाने के लिए।

कई बार तो महिलाओं के साथ वो शांति सैनिक बलात्कार करते हैं जिनका काम उनको सुरक्षा देना होता है।
कांगो में तो हर रोज़ 40 महिलाओं के साथ बलात्कार होता है.

यह पहली बार है कि संयुक्त राष्ट्र ने स्वीकार किया है कि बलात्कार का उपयोग युद्ध में हथियार की तरह किया जाता है।

और यह भी कि इससे विश्व शांति को ख़तरा हो सकता है।

जब इस प्रस्ताव को तैयार करते हुए चर्चा चल रही थी तो चीन, रूस, इंडोनेशिया और वियतनाम सभी ने हिचकिचाहट दिखाते हुए पूछा था कि क्या सचमुच बलात्कार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का मसला है?

जिन देशों में विद्रोह की स्थिति बनी हुई है उनको डर था कि इसके बाद संयुक्त राष्ट्र यौन हिंसा के मामलो की जाँच करने लगेगा।

लेकिन इस पर चर्चा का अंत सर्वसम्मति पर हुआ।

ख़ामोश युद्ध

यह प्रस्ताव अमरीका ने रखा था और इसे सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यों ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया।

इस प्रस्ताव में कहा गया है, "यौन हिंसा एक ऐसी रणनीति है जो अपमानित करने, दबदबा क़ायम करने, डर पैदा करने, बिखराव पैदा करने और किसी समुदाय या जाति विशेष के लोगों को ज़बरदस्ती विस्थापित करने के लिए उपयोग में लाई जाती है।"

प्रस्ताव में कहा गया है कि इस तरह की हिंसा 'सशस्क्ष संघर्ष को बढ़ा सकता है और इससे विश्व में शांति और सुरक्षा क़ायम रखने में बाधा पहुँचा सकती है।'

सुरक्षा परिषद में इस बहस में हिस्सा लेते हुए बान की मून ने कहा, "महिलाओं और लड़कियों के ख़िलाफ़ इस ख़ामोश युद्ध से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नेताओं की ज़रुरत है।"

इस प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने की।

उन्होंने कहा कि अब दुनिया को समझ में आ रहा है कि यौन हिंसा न केवल महिलाओं के स्वास्थ्य को नुक़सान पहुँचाती है बल्कि यह देश की राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता पर भी विपरीत असर डालती है।

इस प्रस्ताव को एक बड़ा सांकेतिक क़दम माना जा रहा है।

इसका अगला चरण महत्वपूर्ण होगा जब अगले साल जून में दुनिया भर में इस तरह की घटनाओं की रिपोर्ट आएगी और इससे निपटने के लिए उपाय सुझाए जायेंगे ।


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Thursday, June 19, 2008

Webinfosys's Hindi News : फिर विवादों में घिरे श्रीसंत

भारतीय तेज़ गेंदबाज़ एस श्रीसंत फिर विवादों में हैं। बंगलौर में होटल कर्मचारियों से झगड़ा करने के मामले में बोर्ड ने उनसे सफाई माँगी है।

श्रीसंत राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के कैंप में भाग लेने के लिए उस होटल में रुके थे।

बीसीसीआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रत्नाकर शेट्टी ने पत्रकारों को बताया है कि होटल मैनेजमेंट और श्रीसंत को पत्र लिखकर विस्तार से जानकारी मांगी गई है कि उस दिन क्या हुआ था।

उनका कहना था,"वह शिविर के दौरान उस होटल में रुके थे और हमने उनका कमरा बुक कराया था। अखबारों में इस घटना के बारे में पढ़ने के बाद हम जानना चाहते हैं कि आख़िर हुआ क्या था।"

विवाद

ख़बरों के मुताबिक श्रीसंत ने कमरे के एयर कंडिशनर से काफी आवाज़ निकलने की शिकायत की थी और इसी मुद्दे पर वो होटल के कर्मचाकरियों से उलझ गए।

होटल कर्मचारियों ने उनसे आधे घंटे सब्र करने के लिए कहा लेकिन वह तड़के ही अपना कमरा बदलना चाहते थे और उस समय कोई कमरा उपलब्ध नहीं था।

इससे पहले श्रीसंत आईपीएल में हरभजन सिंह के साथ थप्पड़ कांड के कारण विवादों में रहे थे।

आईपीएल के दौरान बाजू में आए खिंचाव का इलाज कराने के लिए श्रीसंत इन दिनों बंगलौर में हैं।

इस चोट की वजह से वो पूरे महीने क्रिकेट नहीं खेल पाएंगे। इससे पहले वह बांग्लादेश में त्रिकोणीय सीरीज से भी बाहर रहे और एशिया कप भी नहीं खेल सकेंगे ।

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Webinfosys's Hindi News : गूजर आंदोलन ख़त्म करने की घोषणा

गूजरों के लिए अतिपिछड़ा वर्ग की विशेष श्रेणी बनाकर उनके लिए पाँच प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करने पर राजस्थान सरकार की सहमति के बाद गूजरों के नेता किरोड़ी सिंह बैंसला ने आंदोलन ख़त्म करने की औपचारिक घोषणा कर दी है।

उन्होंने पीलूपुरा में गूजरों की एक सभा में इसकी घोषणा की।

इसके साथ ही गूजरों का लगभग चार हफ़्ते पुराना आंदोलन ख़त्म हो गया है।

चार हफ़्ते चला यह आंदोलन कई बार हिंसक हुआ और इसमें दो पुलिस कर्मियों सहित 41 लोगों की जानें गई हैं। आंदोलन के दौरान कई हफ़्तों तक सड़क और रेलमार्ग बाधित रहा और इससे करोड़ों रुपयों का नुक़सान भी हुआ है।

घोषणा

बुधवार को जयपुर में राजस्थान सरकार के साथ सहमति की घोषणा करते हुए किरोड़ी सिंह बैंसला ने कहा था कि वे पीलूपुरा जाकर आंदोलन ख़त्म करने की औपचारिक घोषणा करेंगे।

और वे बुधवार की रात ही पीलूपुरा पहुँच गए थे। चूंकि लोग सो रहे थे इसलिए रात में यह घोषणा नहीं की गई।

गुरुवार की सुबह आंदोलनकारियों की एक सभा में किरोड़ी सिंह बैंसला ने यह औपचारिकता पूरी की।

इस सभा में गूजर आंदोलन का नेतृत्व करने वाले विभिन्न नेताओं का सम्मान किया गया।

किरोड़ी सिंह बैंसला ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि अब यह समाज और व्यक्तियों पर निर्भर करता है कि वे इस अवसर का लाभ किस तरह उठाते हैं।

इस घोषणा के साथ ही राजस्थान में जगह-जगह लगा जाम हटाने का काम शुरु हो गया है।

दौसा ज़िले के सिकंदरा में रास्ता बुधवार की शाम ही ख़ाली कर दिया गया था।

इसके बाद अब सरकार को मुंबई-दिल्ली रेलमार्ग में रेल पटरियों को ठीक करवाने का काम करवाना होगा।

इस रेलमार्ग से हर दिन कोई 30 ट्रेनें गुज़रती हैं और आँदोलन के कारण इसे गूजरों ने बंद कर रखा था और कई जगह पटरियों को नुक़सान भी पहुँचाया है।

इसी तरह जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग और सवाईमाधोपुर-मध्यप्रदेश मार्ग को भी साफ़ करना होगा। इन दोनों की मार्गों को गूजरों ने बंद कर रखा था।

किरोड़ी सिंह बैंसला और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने आंदोलन के दौरान आमलोगों को हुई असुविधा के लिए खेद जताया है।

आरक्षण

इससे पहले बुधवार को गूजरों के लिए अतिपिछड़ा वर्ग की विशेष श्रेणी बनाकर उनके लिए पाँच प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करने पर राजस्थान सरकार सहमत हो गई थी।

महत्वपूर्ण है कि इसी विशेष श्रेणी में आरक्षण का लाभ गूजरों के साथ-गूसाथ तीन अन्य जातियों - गाड़िए लुहार, बंजारा और रहबर को मिलेगा।

गूजर इस समय अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल हैं और प्राप्त जानकारी के अनुसार वे उस श्रेणी में भी आरक्षण का लाभ उठाते रहेंगे।

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पत्रकारों को बताया, "मुझे संतोष है कि आंदोलन का दौर समाप्त हो गया है। जो आरक्षण दिया जा रहा है उससे जो वर्ग वर्तमान में आरक्षण की सुविधा का लाभ उठा रहे हैं, उन पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। आज की आवश्यकता है कि कुछ वर्गों को विशेष सुविधा दी जाए।"

ग़ौरतलब है कि राजस्थान सरकार ने चार जातियों - ब्राह्मण, राजपूत, कायस्थ और बनियों में आर्थिक दृष्टि से पिछड़े लोगों की स्थिति सुधारने के लिए पहले से शशिकांत आयोग गठित कर रखा है।

इस आयोग की सिफ़ारिश पर इन जातियों में आर्थिक रूप से पिछड़ों के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान की भी धोषणा की गई है।

फ़िलहाल इन घोषणाओं के बाद कुछ प्रमुख मुद्दे स्पष्ट नहीं हुए हैं।

भारत का सुप्रीम कोर्ट पहले ही अनुसूचित जातियों, जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए कुल 49।5 प्रतिशत के आरक्षण का आदेश दे चुका है और साथ ही 50 प्रतिशत से ज़्यादा आरक्षण को असंवैधानिक बता चुका है।

इस संदर्भ में राजस्थान में अतिपिछड़ा वर्ग की विशेष श्रेणी के तहत पाँच प्रतिशत और चार तथाकथित उच्च जातियों में आर्थिक रूप से पिछड़ों के लिए अलग से 14 प्रतिशत आरक्षण संवैधानिक दृष्टि से स्वीकार्य होगा या नहीं, यह एक बड़ा मुद्दा है।



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Webinfosys's Hindi News : लखनऊ के सहारा शहर में बड़ी तोड़फोड

उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर लखनऊ स्थित सहारा इंडिया के मुख्यालय सहारा शहर के एक हिस्से को बुधवार देर रात ध्वस्त कर दिया गया।

तोड़फोड़ की यह कार्रवाई गुरुवार को सुबह पाँच बजे तक चलती रही।


सुबह शहर ने देखा कि सड़क के किनारे 30 मीटर चौड़ाई में एक फर्लांग तक चहारदीवारी टूट गई है और इस दायरे में आने वाली इमारतों को गिरा दिया गया है।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि सहरा समूह ने मास्टर प्लान के तहत छोड़ी गई 30 मीटर चौड़ी सड़क का अतिक्रमण कर उसे अपनी संपत्ति में मिला लिया था।

अधिकारियों का कहना है कि सड़क को अवैध क़ब्ज़े से मुक्त कराने के लिए ये कार्रवाई की गई है।

परिसर में मौजूद सहारा समूह के वकील ने सरकार की इस कार्रवाई को एकतरफ़ा बताया।

उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है जिस पर गुरुवार को सुनवाई होने की उम्मीद है।

लखनऊ में सहारा परिवार की धाक रही है और लोग मानते रहे हैं कि उन्हें कोई छू नहीं सकता या उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता, लेकिन इस कार्रवाई ने उनकी धाक पर असर तो डाला ही है।

तोड़फोड़

बुधवार देर रात लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारी लगभग एक दर्जन बुल्डोज़र और भारी संख्या में पुलिसकर्मियों के साथ गोमतीनगर के अभेद्य माने जाने वाले सहारा शहर परिसर पहुँचे।

पहले पूर्वी हिस्से की चहारदीवारी को तोड़ा गया फिर चहारदीवारी तोड़ कर अंदर दाख़िल हुए बुल्डोज़र निर्माण ढहाने के काम में लग गए।

रात में एक बड़े ऑडिटोरियम और एक गेस्ट हाउस को ध्वस्त किया गया।

इस ऑडिटोरियम में विदेशों से आयातित उपकरण लगाए गए थे और बहुत खर्च किया गया था।

इस तोड़फोड़ से करोड़ों की संपत्ति को नुक़सान पहुँचा है।

सहारा की दलील

सहारा समूह को वर्ष 1994 में इस इलाक़े में 270 एकड़ ज़मीन दी गई थी।

सहारा समूह के वकील ने कहा, "ये ज़मीन विकास प्राधिकरण से ग्रीन बेल्ट और मनोरंजन पार्क बनाने के लिए लीज़ पर मिली थी। इस पर निर्माण कार्य बनाए रखने के लिए सहारा ने वर्ष 1997 में अदालत से स्थगन आदेश लिया हुआ है।

जबकि सहारा के महाप्रबंधक बीएम त्रिपाठी का कहना है कि इस तोड़फोड़ से पहले सहारा को कोई नोटिस नहीं दिया गया।

उनका कहना था, "नियमानुसार हमें सुनवाई का एक मौक़ा तो दिया ही जाना चाहिए लेकिन वह भी हमें नहीं मिला।"

उन्होंने इस कार्रवाई को ग़ैरक़ानूनी बताया।

जानकारों का कहना है कि लखनऊ के सबसे महँगे गोमतीनगर में सहारा के क़ब्ज़े में 70 एकड़ ज़मीन मूलत: नगर निगम की है जिसे शुरु में सहारा समूह ने ग्रीन बेल्ट बनाने के लिए लाइसेंस पर लिया और बाद में अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर इसे अपने अधीन कर लिया।

कल्याण सिंह की अगुआई वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने सहारा परिसर में अतिक्रमण वाले इलाक़े को खाली कराने की कोशिश की थी लेकिन राजनीतिक दबाव में वो आगे नहीं बढ़ सके।

इसके बाद भाजपा और समाजवादी पार्टी की सरकार के साथ सहरा समूह के अच्छे रिश्ते रहे।

अब मुख्यमंत्री मायावती सहारा शहर से सटी ज़मीन पर अपना अपना ड्रीम प्रोजेक्ट अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल बना रही हैं।

सहारा परिवार की समाजवादी पार्टी और भाजपा के नेताओं से निकटता रही है।

सहारा के प्रमुख सुब्रत रॉय सहारा ने मायावती के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी राजनीतिक क्षमताओं की तारीफ़ भी की थी लेकिन बहुजन समाज पार्टी से सहारा की निकटता अभी नहीं बन सकी है।


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Wednesday, June 18, 2008

Webinfosys's Hindi News : रनवे पर जानवरों की धमाचौकड़ी

मॉनसून की झमाझम बारिश से तर हुए गीदड़, छिपकली जैसे छोटे-मोटे जानवरों ने दिल्ली हवाई अड्डे के रनवे पर डेरा डाल विमानों की रफ़्तार थाम दी।

हवाई अड्डे के अधिकारियों का कहना है कि सोमवार को बारिश के दौरान भींगे ये जानवर अपने को सुखाने के लिए रनवे पर आ गए।

इनके कारण विमानों के परिचालन में घंटों की देरी हुई और इसका ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ा हवाई यात्रियों को।

हालाँकि अधिकारी हरकत में आए। रनवे पर से छिपकलियों को हटाने और और गीदड़ों को खदेड़ने के बाद ही विमान उड़ान भर सके।

इस बार राजधानी दिल्ली में मॉनसून ने समय से पहले दस्तक दी है।

इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के प्रवक्ता अरूण अरोड़ा ने अपने बयान में एक मीटर तक लंबे छिपकलियों का ज़िक्र किया जो रनवे पर आ गए थे।

मॉनसून के दौरान जून से सितंबर के बीच भारी बारिश के समय पूरे भारत में विमानों के परिचालन पर असर पड़ता है।

ताज़ा मामले पर भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने बीबीसी से बात करने से इनकार कर दिया।


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Webinfosys's Hindi News : राजस्थान में गूजरों के साथ समझौता

राजस्थान में अनुसूचित जनजाति के तहत आरक्षण देने की माँग पर पिछले 26 दिनों से आंदोलन कर रहे गूजरों और राज्य सरकार के बीच समझौता हो गया है।

राजस्थान की राजधानी जयपुर में गूजरों की ओर से निर्णायक दौर की वार्ता की अगुआई कर रहे कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने इसे ऐतिहासिक जीत बताया है।

राज्य सरकार की ओर से प्रतिनिधिमंडल में शामिल रामदास अग्रवाल और बैंसला ने एकसाथ इस समझौते की जानकारी पत्रकारों को दी।

दोनों ने कहा कि वे समझौते से खुश हैं। हालाँकि समझौते का दस्तावेज़ अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है।

कर्नल बैंसला ने कहा, "बुधवार को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के साथ मैं समझौते पर औपचारिक दस्तख़त करुंगा और उसके बाद इसे सार्वजनिक किया जाएगा।"

कर्नल बैंसला ने सिर्फ़ इतना बताया, "समझौते के तहत आरक्षण की जो व्यवस्था की गई है उससे किसी अन्य वर्ग को नुकसान नहीं होगा।"

उन्होंने सबका शुक्रिया अदा किया और सफल बातचीत के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।

चार से छह फ़ीसदी आरक्षण

गूजर नेता रामसिंह विधूड़ी ने कहा कि बताया है कि समझौते में गूजरों को चार से छह फ़ीसदी आरक्षण देने की व्यवस्था की गई है और यह अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के कोटे के भीतर ही होगी।

यानी ओबीसी कोटे में रहते हुए गूजरों के लिए चार से छह फ़ीसदी सीटें अलग से आरक्षित की जाएंगी।

विधूड़ी ने कहा कि कर्नल बैंसला बुधवार को ख़ुद पीलूपुरा जाएंगे और आंदोलन वापस लेने की औपचारिक घोषणा करेंगे।

इससे आंदोलन प्रभावित इलाक़ों में राहत महसूस की जा रही है।

राज्य सरकार और गूजरों के बीच चार दौर की वार्ता में कोई नतीजा नहीं निकल सका था।

लेकिन पहले से संभावना जताई जा रही थी कि पाँचवा दौर निर्णायक सब्ती होगा ।

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Webinfosys's Hindi News : फिर होगी वामदलों की मनाने की कोशिश

अमरीका के साथ परमाणु समझौते पर आगे बढ़ने के लिए वामदलों को मनाने के यूपीए के प्रयास जारी हैं और इसके लिए बुधवार को फिर एक बैठक होने जा रही है।

सरकार पिछले महीने से कोशिश कर रही है कि वामदल कम से कम अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ सुरक्षा समझौते की अनुमति दे दें।

लेकिन इस बैठक से पहले भी वामदलों से साफ़ कर दिया है कि वे ऐसी किसी अनुमति के पक्ष में नहीं हैं क्योंकि वे मानते हैं कि आईएईए से समझौता दरअसल परमाणु समझौते को हरी झंडी देने जैसा होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु समझौते पर वामपंथी दलों को मनाने के लिए सरकार के पास आख़िरी मौक़ा है और इसके बाद उसे कोई निर्णय लेना ही होगा।

यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दलों का कहना है कि अमरीका के साथ परमाणु समझौता देशहित में नहीं है और अगर सरकार इस पर आगे क़दम बढ़ाती है तो वे सरकार से समर्थन वापस ले लेंगे।

माना जा रहा है कि अगले महीने जी-8 देशों की बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मुलाक़ात अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से होने वाली है और इससे पहले यूपीए सरकार कोई फ़ैसला लेना चाहती है।

वामदलों का रुख़ वही

पिछले साल नवंबर में यूपीए-वामदलों की समिति के गठन के बाद से यह नौवीं बैठक है।

इस बैठक से पहले यूपीए-वामदलों की समिति के संयोजक और विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने सोमवार की शाम मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के महासचिव प्रकाश कारत से मुलाक़ात की थी।

हालांकि दोनों नेता इस बैठक के विवरण नहीं दे रहे हैं।

लेकिन ख़बरें हैं कि प्रणव मुखर्जी ने सीपीएम नेता को एक बार फिर मनाने की कोशिश की कि वे आईएईए के साथ समझौते की अनुमति दे दें। लेकिन उन्होंने इसे एक बार फिर ठुकरा दिया है।

इसके बाद मंगलवार को प्रकाश कारत ने अपने सहयोगी दल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के महासचिव एबी बर्धन से मुलाक़ात की थी।

इस बैठक के बाद हालांकि एबी बर्धन ने कहा कि दोनों के बीच परमाणु मसले पर कोई बात नहीं हुई लेकिन उन्होंने यह साफ़ कर दिया कि कुछ नहीं बदला.

समाचार एजेंसियों के अनुसार उन्होंने कहा, "हमारे रुख़ की जानकारी सबको है। उसमें कोई परिवर्तन नहीं हुआ है और बुधवार की बैठक में भी हमारा यही रुख़ रहेगा।"

यह पूछने पर कि क्या यह यूपीए-वामपंथी दलों की आख़िरी बैठक होगी, उन्होंने कहा, "मैं नहीं जानता कि आख़िरी बैठक जैसी कोई बात है।"

'आख़िरी मौक़ा'

वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक सिद्धार्थ वरदराजन मानते हैं कि वामपंथियों के साथ मिलकर किसी नतीजे तक पहुँचने के लिए सरकार के पास आख़िरी मौक़ा है।

उनका कहना है कि सरकार यदि इस पर आगे बढ़ने का मन बनाती भी है तो पहले आईएईए के साथ समझौते के लिए एक महीने चाहिए होगा और फिर परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों (एनएसजी) से समझौते में दो महीने लगेंगे।

सिद्धार्थ वरदराजन का कहना है कि यदि इससे देर हुई को जॉर्ज बुश के कार्यकाल में इसके पूरा होने की संभावना नहीं बचेगी।

आईएईए से समझौते के लिए वामदलों की आपत्ति पर वे कहते हैं कि वामदलों को ऐसा लगता है कि यदि आईएईए से समझौता हो गया तो फिर अमरीका ही इसे लेकर एनएसजी के पास चला जाएगा और वही होने लगेगा जिसका वो विरोध कर रहे हैं, तो वामदल ग़लत भी नहीं सोच रहे हैं।

उनका कहना है कि यूपीए के लोगों को आईएईए से समझौते पर वामदलों से थोड़ी नरमी की उम्मीद थी लेकिन उनका रुख़ देखकर लगता है कि बुधवार की बैठक के सफल होने की संभावना कम ही है।


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Tuesday, June 17, 2008

Webinfosys's Hindi News : मारे गए पत्रकारों की स्मृति में स्मारक

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने लंदन में एक स्मारक का अनावरण किया। यह उन पत्रकारों की याद में तैयार किया गया है जो रिपोर्टिंग करते मारे गए।

'ब्रीदिंग' नाम का यह स्मारक बीबीसी के मुख्यालय ब्रॉडकास्टिंग हाउस की छत पर स्थापित किया गया है।

यह एक रोशनी का एक स्तंभ है जिसकी ऊँचाई 32 फ़ुट है। इसका प्रकाश रात को आकाश में एक किलोमीटर तक चमकेगा।

हर रात आधा घंटे यह उस समय रौशन होगी जब बीबीसी का प्रमुख समाचार बुलैटिन प्रसारित होता है। यानी रात दस बजे.

यह स्मारक उन सभी पत्रकारों और उनके साथ काम करने वाले लोगों को समर्पित है, जो अपना काम करते हुए मारे गए, इनमें ड्राइवर हैं और अनुवादक भी।

पिछले दस सालों में औसतन हर हफ़्ते दो ऐसे पत्रकार मारे गए हैं जो युद्ध की रिपोर्टिंग करते हैं, कई अन्य पत्रकार भ्रष्टाचार की रिपोर्टिंग करते हुए मारे गए हैं।

श्रद्धांजलि

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने उन पत्रकारों को श्रद्धांजलि अर्पित की है जो रिपोर्टिंग करते हुए मारे गए।

बान की मून ने कहा, "यह स्मारक उन लोगों की याद में खड़ा किया गया है जिन्होने अपनी जान गवाँ दी जिससे हम तक ख़बर पहुंच सके। लेकिन यह उन पत्रकारों के लिए भी है जो इस समय ख़तरों का सामना कर रहे हैं और रिपोर्टें भेजने के लिए अपनी जान को जोख़िम में डाल रहे हैं।"

इस स्मारक के अनावरण के अवसर पर बीबीसी के महानिदेशक मार्क टॉमसन ने कहा कि समाचार जुटाने का काम दिन पर दिन ख़तरनाक होता जा रहा है। पिछले दस सालों में औसतन हर सप्ताह दो पत्रकार मारे जाते रहे हैं और 90 प्रतिशत मामलों में किसी पर मुक़दमा नहीं चला है।

अनावरण समारोह में उन पत्रकारों के परिजन भी आए थे जो या तो मारे गए या जिनकी हत्या हुई।

इनमें बीबीसी की प्रोड्यूसर केट पेटन के परिवार वाले थे जो 2005 में सोमालिया में मारी गई थीं और कैमरामैन साइमन कम्बर्स के सगे संबंधी भी जो सउदी अरब में मारे गए थे।

इस अवसर पर बीबीसी के वरिष्ठ पत्रकार जॉन सिम्पसन जो वर्ष 2003 में स्वयं एक अमरीकी मिसाइल हमले में मरते-मरते बचे थे उन्होंने जेम्स फ़ैंटन की एक कविता पढ़कर सुनाई।

पूर्व युद्ध रिपोर्टर और कवि जेम्स फ़ैंटन ने यह कविता विशेष तौर पर बीबीसी के लिए लिखी है।


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Webinfosys's Hindi News : 'चीन से सतर्क रहने की ज़रूरत'

भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल दीपक कपूर ने कहा है कि चीन अंतरिक्ष में तेज़ी से सैन्य क्षमता बढ़ा रहा है और भारत को इससे सतर्क रहने की ज़रूरत है।

उन्होंने कहा कि भारत को अपने उपग्रहों और अंतरिक्ष में अन्य परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए क़दम बढ़ाने चाहिए।

थल सेनाध्यक्ष ने इसके लिए तीनों सेनाओं के साझा अंतरिक्ष कमान की पैरवी की।

चीन ने पिछले साल के शुरु में उपग्रह को मिसाइल से नष्ट कर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया था।

भारत अब तक अंतरिक्ष के सैन्य इस्तेमाल का विरोध करता रहा है।

जनरल दीपक कपूर ने कहा कि अंतरिक्ष का सैन्य इस्तेमाल रोकने के लिए तमाम अंतरराष्ट्रीय समझौते हैं लेकिन हक़ीकत यह है कि इसके बावजूद अंतरिक्ष का सैन्य इस्तेमाल बढ़ रहा है।

रक्षामंत्री एके एंटनी ने हाल ही में एकीकृत अंतरिक्ष प्रकोष्ठ के गठन की घोषणा की है।

जनरल कपूर ने माना कि आदर्श स्थिति यही है कि अंतरिक्ष को सैन्य गतिविधियों से दूर रखा जाए लेकिन जब दूसरी ताकतें ऐसा कर रही हैं तो भारत पीछे नहीं रह सकता।

उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष में ताकत बढ़ने से ज़मीनी जंग पर निर्णायक असर पड़ना तय है ख़ासकर जब निगरानी, ख़ुफ़िया जानकारी, दिशा-निर्देशन, संचार और सटीक निशाना लगाने के काम में उपग्रहों की अहम भूमिका है।




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Webinfosys's Hindi News : आज निर्णायक वार्ता की संभावना

गूजरों को अनुसूचित जनजाति में शामिल करके आरक्षण देने के मसले पर गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के मसले पर मंगलवार को एक अहम बैठक होने जा रही है।

इस बैठक में दोनों पक्षों के कई बड़े नेता भी उपस्थित रहेंगे।

दोनों पक्षों ने सोमवार की बैठक से संतोष ज़ाहिर किया है और उम्मीद जताई है कि मंगलवार की बैठक में कोई निर्णय ले लिया जाएगा।

संकेत हैं कि दोनों ही पक्षों में कोई सहमति हो गई है हालांकि दोनों ही इसके विवरण नहीं दे रहे हैं।

इस बीच राज्य में विभिन्न स्थानों पर गूजरों का धरना जारी है।

उल्लेखनीय है कि गूजर समुदाय आरक्षण की माँग को लेकर आंदोलन कर रहा है और पिछले तीन हफ़्तों में पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच हुई झड़पों और पुलिस फ़ायरिंग में दो पुलिसकर्मियों समेत 41 लोग मारे गए हैं।

'संतोषजनक'

पहले जयपुर आने से लगातार इनकार कर रहे किरोड़ी सिंह बैंसला आख़िर सोमवार को वार्ता में भाग लेने बयाना से हैलिकॉप्टर से उड़कर जयपुर पहुंचे ।

गूजर नेताओं और सरकार की ओर से वार्ता में बैठे प्रतिनिधियों ने पूरा दिन दोनों पक्षों को स्वीकार्य प्रारुप का स्वरुप ढूढ़ने में बिताया।

इस बैठक को जहाँ किरोड़ी सिंह बैंसला ने संतोषजनक कहा वहीं सरकार की ओर से प्रतिनिधि रामदास अग्रवाल ने कहा कि दोनों पक्ष '-चार क़दम आगे बढ़े हैं।'

उन्होंने चौथे दौर की वार्ता के बाद कहा, "उम्मीद है कि अब जब भी वार्ता होगी, वह अंतिम दौर की वार्ता होगी।"

रामदास अग्रवाल ने कहा है कि वे मानते हैं कि गूजर नेता राजस्थान के पाँच करोड़ जनता के हितों के बारे में भी सोचते हैं और वे गूजरों के अलावा पूरे राजस्थान के हित में कोई फ़ैसला करेंगे।

संभावना

ख़बरें हैं कि सरकार ने गूजरों के सामने आरक्षण देने के लिए कई तरह के प्रस्ताव दिए हैं।

लेकिन जिन दो प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार हुआ और जो विकल्प की तरह उभरे उनमें एक तो यह है कि गूजरों को जनजाति सदृश्य जाति का दर्जा देकर आरक्षण दे दिया जाए और दूसरा यह कि उन्हें घुमंतू श्रेणी में आरक्षण का प्रावधान कर दिया जाए।

इस आरक्षण के लिए जगह बनाने के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से लेकर अन्य कई श्रेणी में आरक्षण में कटौती जैसे प्रस्तावों पर भी विचार चल रहा है।

हालांकि ओबीसी में आने वाले जाट भी बहुत ताक़तवर हैं और उन्हें इसके लिए मनाना सरकार के लिए कठिन होगा।

सरकार आख़िर में किस प्रस्ताव के साथ सामने आएगी वह अब बहुत देर की बात नहीं है।

लेकिन इस पूरी प्रक्रिया पर राजस्थान के मीणा समुदाय ने नज़र गड़ाए रखी है और उन्होंने चेतावनी दे दी है कि यदि जनजाति श्रेणी में आरक्षण में कोई छेड़छाड़ की गई तो इसके परिणाम ठीक नहीं होंगे।

इस बीच मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने जनजाति विधायकों के साथ चर्चा की है। ख़बरें हैं कि उन्होंने मीणा नेताओं से भी फ़ोन पर चर्चा की है.

धरना जारी

इस बीच राज्य में तीन प्रमुख स्थानों पर गूजरों का धरना जारी है।

भरतपुर ज़िले के बयाना में, दौसा में सिकंदरा और सवाईमाधोपुरा के कुशालपुरा में गूजर रास्ता रोके बैठे हैं।

पीलूपुरा से जयपुर आने से पहले किरोड़ी सिंह बैंसला ने अपने लोगों को आश्वासन दिया है कि जब तक आरक्षण वैसा नहीं मिलेगा जैसा वे चाहते हैं वे समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे।

और इसके बाद उन्होंने अपने लोगों से कहा कि जब तक समझौते पर हस्ताक्षर न हो जाए और जब तक वे आकर संदेश न दें धरना जारी रहे।

उन्होंने गूजरों से भीड़ जुटाए रखने की अपील की है ।

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Monday, June 16, 2008

Webinfosys's Hindi News : रणनीति में चूक हुई: महेंद्र सिंह धोनी

त्रिकोणीय सिरीज़ के फ़ाइनल में पाकिस्तान से हारने के बाद भारतीय टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने स्वीकार किया कि उन्होंने बल्लेबाज़ी क्रम में ऊपर नहीं आकर ग़लती की।

महेंद्र सिंह धोनी ने कहा, ''मुझसे ग़लती हुई, मुझे सुरेश रैना से पहले छठे नंबर पर बल्लेबाज़ी करने के लिए उतरना चाहिए था। हालांकि मैंने रैना को पहले भेजने का फ़ैसला सकरात्मक सोच के तहत किया था।''

उनका कहना था,'' यदि युवराज सिंह क्रीज़ पर टिके रहते और रैना एक-एक रन लेते हुए बल्लेबाज़ी का क्रम बदलते तो हम 40 ओवर के बाद अच्छी स्थिति में होते। उसके बाद मेरे और इरफ़ान पठान के लिए जीत के लिए ज़रूरी लक्ष्य हासिल करना मुश्किल नहीं होता।''

उन्होंने कहा, '' पिच बहुत सपाट थी और यहाँ पर आख़िरी सात ओवर में यदि विकेट हाथ में होते तो 300 रन का लक्ष्य आसानी से हासिल किया जा सकता था। लेकिन हमें अच्छी शुरुआत नहीं मिल सकी और नियमित अंतराल पर हमारे विकेट भी गिरते रहे।''

जल्दी विकेट गंवाए

भारतीय कप्तान का कहना था,'' हमें प्रति ओवर छह के औसत से रन बनाने थे जिसके लिए कुछ ख़तरे उठाकर शॉट खेलने थे। लेकिन हमारे बल्लेबाज़ों ने कई ऐसे ख़राब शॉट खेले जो सीधे फील्डरों के हाथों में गए। इसके कारण हम लगातार विकेट गंवाते रहे।''

साथ ही उन्होंने कहा कि भारतीय पारी के दौरान प्रारंभिक क्रम के बल्लेबाज़ों के बीच अच्छी साझेदारी नहीं बन पाना भी टीम की हार का एक कारण रहा।

धोनी ने पाकिस्तानी बल्लेबाजों सलमान बट और यूनुस ख़ान की तारीफ़ की और कहा कि ये दोनों बल्लेबाज़ कामरान अकमल के जल्दी आउट होने के बाद भी रन बनाते रहे और टीम को बडे स्कोर तक पहुँचाने में मदद की।

भारतीय कप्तान का मानना था कि सलमान बट और यूनुस ख़ान की अच्छी बल्लेबाज़ी से हमारे गेंदबाज़ दबाव में आ गए और हम कभी इससे उबर नहीं पाए।

उनका कहना था कि हमने सारे तरीके अपनाए। गेंदबाज़ों ने कुछ गलतियाँ कीं लेकिन आप उन्हें दोष नहीं दे सकते। दरअसल पाकिस्तान की बल्लेबाज़ी शानदार रही।

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Webinfosys's Hindi News :सऊदी अरब तेल उत्पादन बढ़ाएगा

सऊदी अरब ने संयुक्त राष्ट्र से कहा है कि वह अगले महीने से तेल का उत्पादन प्रति दिन दो लाख बैरल बढ़ा देगा।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने सऊदी अरब के तेल मंत्री अली अल नैमी के साथ रविवार को मुलाक़ात के बाद इस बात की जानकारी दी।

पिछले महीने सऊदी अरब ने तेल की क़ीमतों में कमी लाने के लिए अपने तेल उत्पादन में तीन लाख बैरल प्रति दिन की बढ़ोत्तरी की।

सऊदी अरब की दलील है कि तेल की क़ीमतें में बढ़ोत्तरी की तेल की कमी की वजह से नहीं बल्कि इसको लेकर लगाई जा रही अटकलों के कारण बढ़ा है।

शुक्रवार को ऐसी ख़बरों के बाद कि सऊदी अरब तेल उत्पादन में बढोत्तरी कर देगा, तेल की क़ीमतों में दो डॉलर की कमी आई।

अमरीका में कच्चे तेल का कारोबार 134।86 डॉलर की कीमत के आसपास हो रहा था।

'असामान्य क़ीमत'

इसके पहले संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने सऊदी अरब के शाह अब्दुल्ला से भी मुलाक़ात की।

महासचिव ने बताया था कि शाह अब्दुल्ला भी तेल की इन क़ीमतों को 'असामान्य रूप से अधिक' मानते हैं।

ग़ौरतलब है कि सऊदी अरब तेल का सबसे बड़ा उत्पादक देश है।

बान की मून का कहना था,'' उन्होंने (शाह अब्दुल्ला) ने स्वीकार किया कि मौजूदा तेल की क़ीमतें असामान्य रूप से अधिक हैं। इसकी वजह अटकलें और कुछ देशों की नीतियाँ हैं।''

संयुक्त राष्ट्र महासचिव का कहना था,'' वो तेल की क़ीमतों को उचित स्तर पर लाने के लिए आवश्यक क़दम उठाने के लिए तैयार हैं।''

सऊदी समाचार एजेंसी के अनुसार सऊदी अरब के तेल मंत्री अली अल नैमी ने कहा कि तेल निर्यातकों और आयातकों की इस महीने के आख़िर में जेद्दा में एक बैठक होगी जिसमें क़ीमतों को लेकर कोई हल निकालने का प्रयास किया जाएगा।

ख़बरों में कहा जा रहा है कि बढ़ती माँग और राजनीतिक तनाव के कारण जुलाई महीने के अंत तक कच्चे तेल की क़ीमत 150 अमरीकी डॉलर को भी पार कर सकती है ।

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Webinfosys's Hindi News : वार्ता के लिए बैंसला आज जयपुर आएँगे

गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला आख़िर राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार से जयपुर जाकर चर्चा करने को तैयार हो गए हैं।

सोमवार को वे पीलूपुरा से जयपुर पहुँचकर इस अहम चर्चा में हिस्सा लेंगे।

हालांकि गूजर नेता और सरकार दोनों पक्ष इस मसले पर कुछ नहीं कह रहे हैं लेकिन इस चर्चा से मसले में प्रगति की उम्मीद की जा रही है।

यह उम्मीद इसलिए भी की जा रही है क्योंकि रविवार को राज्य सरकार से चर्चा के बाद दो गूजर नेता समझौते का एक मसौदा लेकर किरोड़ी सिंह बैंसला के पास गए थे और उन्होंने इस मसौदे में कुछ परिवर्तन करने के सुझाव दिए थे।

उल्लेखनीय है कि गूजर समुदाय अनुसूचित जनजाति में शामिल कर आरक्षण देने की माँग को लेकर आंदोलन कर रहा है और पिछले तीन हफ़्तों में पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच हुई झड़पों और पुलिस फ़ायरिंग में दो पुलिसकर्मियों समेत 41 लोग मारे गए हैं।

बैंसला आएँगे

गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला रविवार से पहले तक कह रहे थे कि वे राजस्थान सरकार से बातचीत के लिए जयपुर नहीं जाएँगे।

उनका कहना था कि जब निर्णायक बातचीत होगी तब वे जयपुर जाएँगे।

कई दौर की बातचीत में गूजर नेताओं और सरकार के बीच ऐसी कोई स्थिति बनती दिख नहीं रही थी कि किरोड़ी सिंह बैंसला को जयपुर आना पड़ता।

लेकिन रविवार को उन्हें पीलूपुरा से जयपुर आने का संदेश भेजा गया।

गूजर नेता मसूद चौधरी और रामवीर सिंह ने रविवार को बैंसला से मुलाकात की और बताया कि बैंसला ने बैठक में हिस्सा लेने का फ़ैसला किया है।

रामवीर सिंह दिल्ली के गूजर नेता हैं और गूजरों की ओर से गठित 28 सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य हैं जो सरकार के साथ वार्ता कर रहा है।

कहा जा रहा है कि मसूद चौधरी और रामवीर सिंह अपने साथ समझौते का कोई मसौदा लेकर गए थे जिस पर किरोड़ी सिंह बैंसला ने कुछ सुझाव दिए।

हालांकि दोनो ही पक्ष इस पर कुछ कह नहीं रहे हैं।

सत्तारुढ़ भाजपा के वरिष्ठ नेता रामदास अग्रवाल कहते हैं, "आपको ऐसा समझना चाहिए कि अगर दोनों पक्ष मिलकर बात कर रहे हैं तो कोई न कोई निर्णय तो होना ही है।"

हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया, "गूजरों की सारी माँगें यथावत हैं। हमने कोई मसौदा नहीं दिया है सिर्फ़ चर्चा की है।"

मसूद चौधरी ने भी ऐसे ही संकेत दिए, "आप देख रहे हैं कि मैं बहुत रिलेक्स सा हूँ। उम्मीद करना चाहिए कि कोई हल निकलेगा।"

अभी तय नहीं है कि किरोड़ी सिंह बैंसला कब आएँगे। लेकिन राज्य सरकार ने मौसम को देखते हुए उन्हें लेने के लिए अपना हैलिकॉप्टर भेजा है।

मीणा नाराज़

लेकिन गूजरों की इस माँग को लेकर राजस्थान के आदिवासी मीणा समुदाय में विरोध भी है।

वे नहीं चाहते कि गूजरों को भी मीणा की तरह अनुसूचित जनजाति में शामिल किया जाए।

भाजपा के तीन मीना विधायकों - किरोड़ी लाल मीणा, कांतिलाल मीणा और कन्यालाल मीणा ने विधानसभा से इस्तीफ़ा दे दिया है।

मीणा नेताओं को लगता है कि सरकार गूजरों के साथ एकतरफ़ा बातचीत कर रहे हैं।

किरोड़ी लाल मीणा नाराज़गी के साथ कहते हैं, "सरकार ने 28 गूजर नेताओं को बिठा रखा है, दो गूजर मंत्रियों को भी बिठा रखा है. यह एकतरफ़ा बातचीत है, हम क्या इसे मान लेंगे?"

उनका कहना था, "राज्य में तीन मीणा मंत्री हैं, 31 विधायक हैं उनमें से कुछ को तो इस बैठक में बिठाया जाना चाहिए था।"

जयपुर में होने जा रही बैठक के नतीजे अगर सकारात्मक रहते हैं तो यह एक समुदाय में उत्साह का संचार करेगा तो दूसरे समुदाय में मायूसी पैदा करेगी।

फ़िलहाल सरकार के लिए अभी रास्ता लंबा दिख रहा है।


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