गूजरों के लिए अतिपिछड़ा वर्ग की विशेष श्रेणी बनाकर उनके लिए पाँच प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करने पर राजस्थान सरकार की सहमति के बाद गूजरों के नेता किरोड़ी सिंह बैंसला ने आंदोलन ख़त्म करने की औपचारिक घोषणा कर दी है।
उन्होंने पीलूपुरा में गूजरों की एक सभा में इसकी घोषणा की।
इसके साथ ही गूजरों का लगभग चार हफ़्ते पुराना आंदोलन ख़त्म हो गया है।
चार हफ़्ते चला यह आंदोलन कई बार हिंसक हुआ और इसमें दो पुलिस कर्मियों सहित 41 लोगों की जानें गई हैं। आंदोलन के दौरान कई हफ़्तों तक सड़क और रेलमार्ग बाधित रहा और इससे करोड़ों रुपयों का नुक़सान भी हुआ है।
घोषणा
बुधवार को जयपुर में राजस्थान सरकार के साथ सहमति की घोषणा करते हुए किरोड़ी सिंह बैंसला ने कहा था कि वे पीलूपुरा जाकर आंदोलन ख़त्म करने की औपचारिक घोषणा करेंगे।
और वे बुधवार की रात ही पीलूपुरा पहुँच गए थे। चूंकि लोग सो रहे थे इसलिए रात में यह घोषणा नहीं की गई।
गुरुवार की सुबह आंदोलनकारियों की एक सभा में किरोड़ी सिंह बैंसला ने यह औपचारिकता पूरी की।
इस सभा में गूजर आंदोलन का नेतृत्व करने वाले विभिन्न नेताओं का सम्मान किया गया।
किरोड़ी सिंह बैंसला ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि अब यह समाज और व्यक्तियों पर निर्भर करता है कि वे इस अवसर का लाभ किस तरह उठाते हैं।
इस घोषणा के साथ ही राजस्थान में जगह-जगह लगा जाम हटाने का काम शुरु हो गया है।
दौसा ज़िले के सिकंदरा में रास्ता बुधवार की शाम ही ख़ाली कर दिया गया था।
इसके बाद अब सरकार को मुंबई-दिल्ली रेलमार्ग में रेल पटरियों को ठीक करवाने का काम करवाना होगा।
इस रेलमार्ग से हर दिन कोई 30 ट्रेनें गुज़रती हैं और आँदोलन के कारण इसे गूजरों ने बंद कर रखा था और कई जगह पटरियों को नुक़सान भी पहुँचाया है।
इसी तरह जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग और सवाईमाधोपुर-मध्यप्रदेश मार्ग को भी साफ़ करना होगा। इन दोनों की मार्गों को गूजरों ने बंद कर रखा था।
किरोड़ी सिंह बैंसला और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने आंदोलन के दौरान आमलोगों को हुई असुविधा के लिए खेद जताया है।
आरक्षण
इससे पहले बुधवार को गूजरों के लिए अतिपिछड़ा वर्ग की विशेष श्रेणी बनाकर उनके लिए पाँच प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करने पर राजस्थान सरकार सहमत हो गई थी।
महत्वपूर्ण है कि इसी विशेष श्रेणी में आरक्षण का लाभ गूजरों के साथ-गूसाथ तीन अन्य जातियों - गाड़िए लुहार, बंजारा और रहबर को मिलेगा।
गूजर इस समय अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल हैं और प्राप्त जानकारी के अनुसार वे उस श्रेणी में भी आरक्षण का लाभ उठाते रहेंगे।
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पत्रकारों को बताया, "मुझे संतोष है कि आंदोलन का दौर समाप्त हो गया है। जो आरक्षण दिया जा रहा है उससे जो वर्ग वर्तमान में आरक्षण की सुविधा का लाभ उठा रहे हैं, उन पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। आज की आवश्यकता है कि कुछ वर्गों को विशेष सुविधा दी जाए।"
ग़ौरतलब है कि राजस्थान सरकार ने चार जातियों - ब्राह्मण, राजपूत, कायस्थ और बनियों में आर्थिक दृष्टि से पिछड़े लोगों की स्थिति सुधारने के लिए पहले से शशिकांत आयोग गठित कर रखा है।
इस आयोग की सिफ़ारिश पर इन जातियों में आर्थिक रूप से पिछड़ों के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान की भी धोषणा की गई है।
फ़िलहाल इन घोषणाओं के बाद कुछ प्रमुख मुद्दे स्पष्ट नहीं हुए हैं।
भारत का सुप्रीम कोर्ट पहले ही अनुसूचित जातियों, जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए कुल 49।5 प्रतिशत के आरक्षण का आदेश दे चुका है और साथ ही 50 प्रतिशत से ज़्यादा आरक्षण को असंवैधानिक बता चुका है।
इस संदर्भ में राजस्थान में अतिपिछड़ा वर्ग की विशेष श्रेणी के तहत पाँच प्रतिशत और चार तथाकथित उच्च जातियों में आर्थिक रूप से पिछड़ों के लिए अलग से 14 प्रतिशत आरक्षण संवैधानिक दृष्टि से स्वीकार्य होगा या नहीं, यह एक बड़ा मुद्दा है।

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