Wednesday, March 26, 2008

Webinfosys's Hindi News : गुजरात दंगों की जाँच के लिए विशेष दल

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को निर्देश दिया है कि वो वर्ष 2002 के सांप्रदायिक दंगों की नए सिरे से जाँच के लिए दस दिन में विशेष जाँच दल गठित करने की अधिसूचना जारी करे।

अरजित पसायत की अध्यक्षतावाली खंडपीठ ने इसके लिए पाँच सदस्यीय विशेष जाँच दल गठित करने का निर्देश दिया है।

इसका नेतृत्व सीबीआई के पूर्व निदेशक आरके राघवन करेंगे।

इस जाँच दल में पूर्व पुलिस महानिदेशक सीबी सत्पथी के अलावा गुजरात के तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारी गीता जौहरी, शिवानंद झा और आशीष भाटिया को शामिल किया है।

अदालत ने कहा है कि ये दल तीन महीने में जाँच पूरी कर अपनी रिपोर्ट उसे सौंपेगा।

इसके बाद अगस्त के अंतिम सप्ताह में इस मामले पर विचार किया जाएगा .

व्यापक हिंसा

इस जाँच में सांप्रदायिक हिंसा के 10 प्रमुख मामले शामिल हैं जिनमें ब्रितानी नागरिक इमरान मोहम्मद सलीम दाऊद के परिवारजनों की हत्या का भी मामला भी है ।

इसके अलावा सरदारपुरा, नरोदापाटिया, गुलबर्ग सोसाइटी और आनंद के ओट इलाक़े में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बड़े मामलों की भी जाँच की जाएगी।

दरअसल राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जाँच के दौरान कथित रूप से प्रत्यक्षदर्शियों को डराने-धमकाने और कई गवाहों के मुकर जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच की माँग की थी।

सिटीजंस फ़ॉर जस्टिस एंड पीस की तीस्ता सीतलवाड़ ने बताया, "हमने और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने माँग की थी कि गुजरात की राजनीतिक व्यवस्था को देखते हुए वहाँ स्वतंत्र जाँच मुमकिन नहीं है। वहाँ पर पुलिस काफ़ी दबाव में काम कर रही है. सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले से उम्मीद है कि लोगों को इंसाफ़ मिलेगा।"

उल्लेखनीय है कि गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में लगी आग में 59 हिंदुओं के मारे जाने के बाद दंगे भड़क उठे थे।

सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़ वर्ष 2002 में गुजरात में हुए दंगों के दौरान एक हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे जिनमें अधिकतर मुसलमान थे।

हालाँकि कई स्वतंत्र एजेंसियाँ मरने वालों की संख्या दो हज़ार तक बताती हैं ।




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Webinfosys's Hindi News : दक्षिण अफ़्रीका पहले बल्लेबाज़ी को उतर

चेन्नई टेस्ट में खेले जा रहे पहले टेस्ट में टॉस दक्षिण अफ़्रीका के कप्तान ग्रैम स्मिथ ने जीता और पहले बल्लेबाज़ी का फ़ैसला किया है।

कप्तान ग्रैम स्मिथ और नील मैकेंज़ी पारी की शुरुआत के लिए उतरे हैं।

भारतीय गेंदबाज़ी की कमान आरपी सिंह, श्रीसंत, हरभजन और कुंबले संभाल रहे हैं।

सौरव गांगुली, सचिन तेंदुलकर और वीरेंदर सहवाग अतिरिक्त गेंदबाज़ की कमी पूरी कर सकते हैं।

भारत ने इरफ़ान पठान, पीयूष चावला और युवराज सिंह को 11 में स्थान नहीं दिया है।

भारतीय कप्तान का कहना है कि दक्षिण अफ़्रीका से सिरीज़ जीतकर उनकी टीम आईसीसी रैंकिंग में दूसरे नंबर पर बने रहना चाहती है।

कुंबले का कहना था कि भारतीय टीम तैयार है और हम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे।

पिच के बारे में उन्होंने कहा कि विकेट में उछाल अच्छी होती है, बाद में यह स्पिनरों की मदद करेगी।

कुंबले ने कहा कि दक्षिण अफ़्रीका टीम को शान पोलाक की कमी खलेगी।

उनका कहना था कि ये हमेशा कठिन चुनौती देने वाली टीम रही है।

पहला टेस्ट मैच चेन्नई में 26 से 30 मार्च तक खेला जाएगा। दूसरा टेस्ट मैच तीन से सात अप्रैल तक अहमदाबाद और आख़िरी मैच 11 से 15 अप्रैल तक कानपुर में खेला जाएगा।

भारतीय टीम

अनिल कुंबले (कप्तान), महेंद्र सिंह धोनी (विकेटकीपर), सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, सौरभ गांगुली, वीवीएस लक्ष्मण, वसीम जाफ़र, वीरेंदर सहवाग, हरभजन सिंह, एस श्रीसंत और रुद्र प्रताप सिंह।





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Webinfosys's Hindi News : मनमोहन को बेहतर संबंधों की उम्मी

भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गीलानी से फ़ोन पर बात की और उन्हें बधाई दी।

उन्होंने भारत-पाक संबंधों को और बेहतर बनाने की उम्मीद जताई।

मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को शपथ दिलाए जाने के कुछ ही घंटों बाद उन्हें फ़ोन कर बधाई दी।

भारतीय प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि वो द्विपक्षीय संबंधों को और बेहतर बनाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्रियों बेनजीर भुट्टो, नवाज शरीफ़ और राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की गई पहल को और आगे बढ़ाएंगे।

मनमोहन ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री गीलानी को एक पत्र भी लिखा है जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के साथ दोस्ती और सहयोग को और मजबूत करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया है।

उनका कहना है कि भारत एक स्थिर, समृद्ध और लोकतांत्रिक पाकिस्तान देखना चाहता है।

प्रधानमंत्री ने शांति प्रक्रिया को तेज करने और द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने को और मजबूत करने की बात कही है।

इसके पहले मंगलवार को पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता यूसुफ़ रज़ा गीलानी ने मंगलवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी।

राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने इस्लामाबाद में उन्हें पद की शपथ दिलाई।

यूसुफ़ रज़ा गीलानी मुस्लिम लीग़ (नवाज़) के साथ मिलकर बनने वाली गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में चुने जाने के बाद यूसुफ़ रज़ा गीलानी के तेवर तीख़े लग रहे हैं।

संसद में चुने जाने के बाद उन्होंने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को विवादित मुद्दों पर चुनौती दे डाली थी।

पहले तो उन्होंने नज़रबंद जजों की रिहाई का वादा किया तो दूसरी ओर पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या की संयुक्त राष्ट्र से जाँच कराने की बात कह डाली थी।





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Webinfosys's Hindi News : टाटा-जगुआर-लैंड रोवर सौदे की घोषणा संभव

भारतीय कंपनी टाटा मोटर्स बुधवार को अमरीकी कंपनी फ़ोर्ड के दो ब्रितानी ब्रांड जगुआर और लैंड रोवर की ख़रीद की घोषणा कर सकती है।

इस संदर्भ में बातचीत और ख़रीद के दाम पर बातचीत का काम पूरा हो चुका है। बताया जा रहा है कि टाटा इन दोनों कंपनियों के लिए दो अरब अमरीकी डॉलर अदा कर रही है।

हालांकि सौदे की रक़म को लेकर भी कोई स्पष्ट जानकारी आधिकारिक तौर पर नहीं दी गई है और बुधवार को जब सौदे की घोषणा होगी तो लोगों की नज़र सौदे के लिए तय रक़म पर होगी।

व्यापार जगत के लोगों की नज़र इस बात पर भी होगी कि किन शर्तों पर टाटा इन ब्रांडों को ख़रीद रहा है।

जगुआर और लैंड रोवर मूल रूप से ब्रितानी कारें हैं जिसे अमरीकी ऑटोमोबाइल कंपनी फ़ोर्ड ने ख़रीद लिया था।

फ़ोर्ड ने अपनी इन दोनों कंपनियों को बेचने की मंशा जाहिर की थी जिसके बाद टाटा के साथ पिछले वर्ष जून से ही इस सौदे के संदर्भ में बातचीत चल रही थी।

टाटा का प्रभाव

टाटा मोटर्स का भारतीय बाज़ार में व्यापक प्रभाव है। टाटा का भारत के ट्रक बाज़ार के आधे से भी बड़े हिस्से पर कब्ज़ा है और साथ ही कार बाज़ार में भी 20 प्रतिशत की हिस्सेदारी है।

जगुआर और लैंड रोवर ब्रिटेन में लोकप्रिय और भरोसेमंद कारें मानी जाती हैं।

टाटा ने सबसे पहले अगस्त 2007 में कहा था कि वह इन कंपनियों को ख़रीदने में दिलचस्पी रखती है। हालाँकि इस सौदे में एक और निजी कंपनी- वन इक्विटी ने भी दिलचस्पी दिखाई थी।

एक अन्य भारतीय कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा ने भी ख़ुद को जगुआर और लैंड रोवर कंपनियों का एक संभावित ख़रीदार बताया था।

ग़ौरतलब है कि टाटा ने इसी वर्ष की शुरुआत में एक लाख की कार भारतीय बाज़ार में उतारने की घोषणा करके दुनियाभर के कार बाज़ार में खलबली मचा दी थी।

अब जगुआर और लैंड रोवर ख़रीदने के साथ ही टाटा की कार बाज़ार पर पकड़ और भी मज़बूत हो जाएगी।





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Friday, March 21, 2008

Webinfosys's Hindi News : धोनी को कप्तान बनाने में सचिन थे सूत्रधार

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष शरद पवार ने यह राज़ खोला है कि मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने ही महेंद्र सिंह धोनी को एक दिवसीय टीम का कप्तान बनाने का प्रस्ताव रखा था।

समाचार एजेंसी के साथ बातचीत में पवार ने कहा कि पिछले साल इंग्लैंड दौरे के क्रम में ही तत्कालीन कप्तान राहुल द्रविड़ ने कप्तानी छोड़ने की इच्छा व्यक्त की थी।

शरद पवार ने बताया, "उस समय राहुल द्रविड़ ने मुझे बताया कि वे अपने खेल पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं और उन्होंने मुझे किसी और को कप्तान बनाने की सलाह दी।"

बीसीसीआई अध्यक्ष ने बताया कि कुछ चयनकर्ता सचिन तेंदुलकर को कप्तान बनाना चाहते थे और मैंने सचिन को ये बता दिया। लेकिन सचिन ने ऐसा ना करने को कहा।

शरद पवार के मुताबिक़ जब उन्होंने सचिन से यह पूछा कि किसे टीम का कप्तान बनाना चाहिए तो उन्होंने कहा- धोनी जैसे खिलाड़ी को। सचिन ने पवार से कहा- धोनी को मौक़ा दीजिए। खिलाड़ियों के साथ उनके संबंध बेहतर हैं।

सलाह

सचिन की सलाह पर पवार ने कहा कि वे चयन में दख़ल तो नहीं करेंगे लेकिन चयनकर्ताओं तक उनकी बात ज़रूर पहुँचा देंगे। और अंत में कप्तानी धोनी को ही मिली।

शरद पवार ने सचिन तेंदुलकर और उनके साथी अनुभवी खिलाड़ियों राहुल द्रविड़, सौरभ गांगुली और अनिल कुंबले की इस बात के लिए सराहना की कि ट्वेन्टी 20 टीम में उन्होंने युवा खिलाड़ियों के लिए रास्ता छोड़ा।

बीसीसीआई अध्यक्ष ने इंग्लैंड दौरे को याद किया और बताया, "जब भारतीय टीम इंग्लैंड दौरे पर थी तो उस मैं भी वहाँ था। सचिन ने मुझसे मुलाक़ात की और कहा कि आप टीम चयन में दख़ल नहीं देते लेकिन आप चयनकर्ताओं से कहें कि वे मेरे जैसे वरिष्ठ खिलाड़ियों को ट्वेन्टी 20 टीम में ना रखें क्योंकि हमारी पीढ़ी के खिलाड़ी इसके लिए फ़िट नहीं हैं। इसलिए युवा खिलाड़ियों को मौक़ा दीजिए।"

पवार ने कहा कि आज के माहौल में कौन आकर आपसे कहता है कि आप उन्हें टीम में शामिल नहीं कीजिए। उन्होंने कहा- हम भाग्यशाली हैं कि हमारे पास सचिन, सौरभ, द्रविड़ और कुंबले जैसे खिलाड़ी हैं। टीम को लेकर उनकी प्रतिबद्धता पर सवाल नहीं उठाए जा सकते हैं।

सराहना

शरद पवार ने महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी की सराहना की और कहा कि उनके नेतृत्व में ही टीम ने ट्वेन्टी 20 विश्व कप जीता और फिर ऑस्ट्रेलिया में त्रिकोणीय सिरीज़ पर भी क़ब्ज़ा किया।

उन्होंने कहा, "कप्तान के रूप में धोनी ने बहुत बढ़िया काम किया है। वे खिलाड़ियों में जोश भर सकते हैं और खिलाड़ियों के साथ उनके रिश्ते भी काफ़ी अच्छे हैं। वे दबाव में संयम भी बनाए रखते हैं "

लेकिन बातचीत से लगा कि शरद पवार कुंबले से ज़्यादा प्रभावित हैं। ख़ासकर ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सिरीज़ के दौरान उनकी परिपक्वता और नस्लवादी टिप्पणी के मामले में उनकी सूझ-बूझ से पवार ख़ासे प्रभावित लगे।

उन्होंने कहा, "कप्तान के रूप में कुंबले शानदार रहे हैं। मैदान के अंदर और बाहर उनका व्यवहार भी बेहतरीन रहा है। वे देश के राजदूत के रूप में हैं और हमें गर्व है कि सिडनी में हुई घटना के बाद उन्होंने काफ़ी सूझ-बूझ दिखाई "

सिडनी टेस्ट के दौरान हरभजन सिंह और एंड्रयू साइमंड्स के बीच तकरार और फिर भज्जी पर नस्लभेदी टिप्पणी के आरोप लगने के बाद कप्तान के रूप में अनिल कुंबले के व्यवहार की काफ़ी सराहना हुई थी।




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Webinfosys's Hindi News : राजस्थान में धर्मांतरण विधेयक पर फिर विवाद

राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले धर्मांतरण विरोधी क़ानून लागू कराने की इच्छुक वसुंधरा राजे सरकार ने तीसरी बार इस विधेयक को विधानसभा से पारित कराया है।

इस विधेयक में जबरन या प्रलोभन के ज़रिए धर्मांतरण कराने पर दंड की व्यवस्था की गई है। विधेयक को क़ानून बनने के लिए अभी राज्यपाल की मंज़ूरी मिलनी बाक़ी है।

लेकिन विपक्षी कांग्रेस पार्टी, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अल्पसंख्यक संगठनों ने इस विधेयक का विरोध करने का ऐलान किया है।

इन संगठनों ने कहा है कि वे अदालत का दरवाज़ा खटखटाएँगे और राज्यपाल से आग्रह करेंगे कि वे इस विधेयक को वापस लौटा दें.

इस विधेयक को पहली बार तत्कालीन राज्यपाल प्रतिभा पाटिल ने लौटा दिया था लेकिन सरकार ने जब दूसरी बार इसे पारित कराकर भेजा तो पाटिल ने उसे राष्ट्रपति के पास बढ़ा दिया था।

इस समय पाटिल ही देश की राष्ट्रपति हैं और वह विधेयक राष्ट्रपति भवन में विचाराधीन है।

'संविधान की भावना के ख़िलाफ़'

पहले से ही धर्मांतरण विरोधी क़ानून लागू करने के विरोध में खड़ी कांग्रेस ने राष्ट्रपति के पास इसी से जुड़ा एक विधेयक लंबित रहते, दूसरा विधेयक पारित कराने को संविधान की भावना के ख़िलाफ़ बताया है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सीपी जोशी कहते हैं, "जब पहले ही एक विधेयक राष्ट्रपति के पास विचाराधीन है तो दूसरा विधेयक लाना संविधान की भावना के विपरीत है।"

जोशी ने कहा कि इस विधेयक को मंज़ूरी न मिले, इसके लिए कांग्रेस हर स्तर पर विरोध करेगी।

पीपुल्स यूनियन फ़ॉर सिविल लिबर्टीज़ (पीयूसीएल) की कविता श्रीवास्तव कहती हैं, "यह क़ानून धार्मिक आज़ादी का हनन करता है। इसका मक़सद अल्पसंख्यक समुदाय को आतंकित करना है। किसी भी राज्य में ऐसा क़ानून नहीं है।"

श्रीवास्तव कहती है, "भाजपा विधानसभा चुनावों से पहले अपने हिंदुत्व के एजेंडे पर लौट आई है।" उन्होंने राज्यपाल से अपील की है कि वे इस विधेयक को बिना हस्ताक्षर किए लौटा दें।

गुरुवार को जब विधानसभा में इस विधेयक को पारित कराया जा रहा था तब कांग्रेस ने इसका जमकर विरोध किया। अल्पसंख्यक और मानवाधिकार संगठनो ने इसके विरोध में विधानसभा के सामने प्रदर्शन किया।

कांग्रेस नेता रघु शर्मा कहते हैं कि जब सरकार के पास विकास का कार्यक्रम नहीं होता है तभी वह धर्म और जाति का सहारा लेती है।

क्या है विधेयक में...

राज्य के सामाजिक न्याय मंत्री मदन दिलावर कहते हैं, "राज्य में धर्मांतरण की गतिविधियाँ रुक नहीं रही थीं। लिहाजा हमें क़ानून बनाना पड़ा है। इसका राजनीतिक अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए।"

विधेयक में प्रावधान है कि अगर कोई आदमी प्रलोभन और जोर-जबर्दस्ती से धर्म परिवर्तन कराने में शामिल पाया गया तो उसे पाँच साल तक की सजा हो सकती है।

अब धर्मांतरण के लिए ज़िला मजिस्ट्रेट से एक माह पहले अनुमति लेनी होगी। लेकिन कोई आदमी अपने मूल धर्म मे लौटना चाहे तो उस पर ये क़ानून लागू नही होगा।

इस विधेयक को लेकर अल्पसंख्यक संगठनों के मन में कई तरह के सवाल हैं।

ईसाई समाज के विजय पाल कहते है, "राज्य में कोई ईसाई संगठन धर्मांतरण में शामिल नहीं है। ऐसे में इसका मक़सद अल्पसंख्यक समुदाय को निशाने पर लेने के अलावा और क्या हो सकता है।"

यह देखना दिलचस्प होगा कि विधानसभा चुनाव से कुछ पहले आए इस विधेयक पर राजभवन क्या रुख़ अपनाता है।





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Webinfosys's Hindi News : तिब्बत- विश्व की अंतरात्मा को चुनौती: नैन्स पलोस

अमरीकी प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैन्स पलोसी ने धर्मशाला में तिब्बतियों की एक सभा को संबोधित करते हुए कहा है कि 'तिब्बत में जो स्थिति है वह विश्व की अंतरात्मा के लिए चुनौती है ।'

हनैन्सी पलोसी ने ये विचार धर्मशाला में निर्वासित तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के साथ मुलाकात के बाद एक सभा में व्यक्त किए हैं। पलोसी के साथ प्रतिनिधि सभा के नौ अन्य सदस्य भी हैं।

इससे पहले अमरीका की विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने चीन के नेताओं से अनुरोध किया था कि वे तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के साथ बातचीत शुरु करें।

उधर तिब्बत में प्रदर्शनों के बाद बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती जारी है। गान्सु प्रांत की राजधानी में चारो ओर सुरक्षाबलों के नाके लगे हैं।

तिब्बत में प्रदर्शन 10 मार्च को शुरु हुए थे जब दुनिया भर में रह रहे तिब्बतियों ने चीनी शासन के ख़िलाफ़ विद्रोह की 49वीं वर्षगाँठ मनाई थी।

चीन ने गुरुवार को पहली बार स्वीकार किया है कि सुरक्षाबलों ने तिब्बती प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाई थी।
अमरीका तिब्बतियों के साथ'

नैन्सी पलोसी ने धर्मशाला में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा - "यदि दुनिया में आज़ादी चाहने वाले लोग चीन के दमनचक्र की बारे में और तिब्बत के बारे में अब भी बात नहीं करते, तो हमें विश्व में कहीं भी मानवाधिकारों के बारे में बात करने का अधिकार नहीं होगा।"

उनका कहना था कि इस दुखद समय में अमरीका तिब्बत के लोगों के साथ है। उन्होंने ये भी कहा कि दुनिया में जो लोग भी आज़ादी की कदर करते हैं उन्हें इस समय अपनी आवाज़ बुलंद करनी चाहिए। उनका ये भी कहना था कि वे 'इस चुनौती का सामना करने के लिए तिब्बतियों के साथ हैं।'

उनका कहना था कि ये पता चलना चाहिए कि तिब्बत में क्या हो रहा है और ये ज़रूरी है कि दुनिया के सामने सच आए।

हालाँकि नैन्सी पलोसी की यात्रा प्रदर्शनों से कई हफ़्ते पहले ही तय हो गई थी दलाई लामा के समर्थक नैन्स पलोसी की इस यात्रा को अमरीका की ओर से मिल रही सहानुभूति के तौर पर देख रहे हैं।

अन्य पर्यवेक्षक नैन्सी पलोसी के विचारों को तिब्बत में प्रदर्शनकारियों के लिए एक प्रमुख अमरीकी नेता की हिमायत के तौर पर देख रहे हैं।

चीन नैन्स पलोसी की दलाई लामा के साथ मुलाक़ात का विरोध कर चुका है और माना जा रहा है कि चीन की सरकार की उनकी इस यात्रा पर नजर है।





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Monday, March 17, 2008

Webinfosys's Hindi News : परमाणु समझौते पर अहम बैठक

भारत और अमरीका के बीच परमाणु समझौते को लेकर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) और वामपंथी दलों की सोमवार को अहम बैठक हो रही है।

परमाणु समझौते के मुद्दे पर घटक दलों के बीच सहमति बनाने और सरकार के भविष्य को सुरक्षित रखने की दृष्टि से ये बैठक ख़ासी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इससे पहले शनिवार को भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा था कि वो यूपीए सरकार और वामपंथी दलों के बीच भारत-अमरीका परमाणु समझौते के मुद्दे पर सहमति बनने को लेकर आशान्वित हैं।

हालांकि वामदल अब भी इस समझौते के कुछ प्रावधानों से सहमत नहीं हैं और इसका विरोध कर रहे हैं।

विदेशमंत्री ने उम्मीद जताई कि जल्द ही वामपंथी दलों और यूपीए सरकार के बीच परमाणु समझौते संबंधी मतभेद सुलझा लिए जाएंगे।

उनका कहना था कि इस दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं और वो वामपंथी दलों के साथ लगातार संपर्क में हैं।

ग़ौरतलब है कि अमरीका के साथ परमाणु समझौते का वामदल यह कहते हुए विरोध करते रहे हैं कि इससे देश की संप्रभुता को ख़तरा है और अमरीका का इस समझौते पर रवैया पक्षपातपूर्ण है।

विदेशमंत्री इसी महीने की 23 तारीख को अमरीका की यात्रा पर जा रहे हैं और जानकारों का मानना है कि इस यात्रा से पहले विदेशमंत्री समझौते की अड़चनें कम करना चाहते हैं।

जानकारों की मानें तो विदेशमंत्री अपनी अमरीका यात्रा से पहले इस बात की पूरी कोशिश करेंगे कि केंद्र सरकार के घटक दलों और बाहर से समर्थन दे रहे वामदलों के बीच समझौते पर सहमति बन जाए।





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Webinfosys's Hindi News : 'तिब्बतियों पर गोली नहीं चलाई गई'

एक वरिष्ठ चीनी अधिकारी ने इस बात से इनकार किया है कि तिब्बत के शहर ल्हासा में प्रदर्शनकारियों पर घातक हथियारों का प्रयोग किया गया।

तिब्बत के क्षेत्रीय गवर्नर क्यूंग्बा पुनकॉग का कहना था कि जैसे जैसे प्रदर्शनकारियों के लिए समयसीमा निकट आती जा रही है, शांति वापस लौट रही है।

उनका कहना था कि प्रदर्शन के दौरान 13 लोगों की मौत हुई जबकि दलाई लामा का कहना है कि चीन की कार्रवाई में कम से कम 80 लोग मारे गए।

पत्रकारों से बातचीत में तिब्बत के गवर्नर ने कहा कि सुरक्षा बलों ने घातक हथियारों का प्रयोग नहीं

दूसरी ओर ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि ल्हासा में हिंसक प्रदर्शनों के बाद तिब्बतियों का आंदोलन कई अन्य प्रांतों में फैल गया है।

अबा और सिचुआन प्रांतों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच संघर्ष हुआ। इस दौरान पुलिस चौकी पर भी हमला किया गया.

उल्लेखनीय है कि तिब्बत में चीन के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे लोगों को वहाँ के अधिकारियों ने आत्मसमर्पण करने के लिए सोमवार तक का समय दिया है।

चीन की सरकारी एजेंसी शिन्हुआ के हवाले से आए एक बयान में सरकार ने कहा है कि लोग सोमवार आधी रात तक ख़ुद को प्रशासन के हवाले कर दें। प्रशासन का कहना है कि ऐसे लोगों के प्रति नरमी बरती जाएगी।

चीन सरकार ने कहा है कि तिब्बत की राजधानी ल्हासा में स्थितियां अब लगभग नियंत्रित हो चुकी है।

इस दौरान भारी हथियारों से लैस सैकड़ों की संख्या में पुलिसकर्मी शहर की सड़कों पर गश्त लगा रहे हैं।

चीन सरकार ने विदेशी लोगों को ल्हासा छो़ड़ने की सलाह दी है और जो पर्यटक वहाँ आना चाहते थे, उनकी यात्राओं को निलंबित कर दिया गया है।

दलाई लामा की चिंता

दूसरी ओर तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रमुख और आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने कहा है कि चीन ने तिब्बत में जो हिंसा की है उसकी जाँच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होनी चाहिए।

उनका कहना था, '' मैं एक ज़िम्मेदार अधिकारी होने के नाते कह सकता हूँ कि गोली बिल्कुल नहीं चलाई गई।'

उन्होंने तिब्बत में मारे गए प्रदर्शनकारियों के लिए चीन को आड़े हाथों लेते हुए इसे 'सांस्कृतिक जनसंहार' करार दिया है।

दलाई लामा ने कहा कि चीन सरकार ने प्रदर्शनकारियों के आत्मसमर्पण के लिए सोमवार तक की जो समयसीमा तय की है, उसे लेकर वो ख़ासे चिंतित हैं और असहाय महसूस कर रहे हैं।

तिब्बती गुरू ने आशंका व्यक्त की कि अभी तक प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ हुई कार्रवाइयों में 100 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं।

हालांकि चीन सरकार का कहना है कि इस हिंसा में कुल 10 लोग ही मारे गए हैं।

मारे गए प्रदर्शनकारियों को श्रद्धांजलि देने के लिए भारत में धर्मशाला स्थित निर्वासित तिब्बती सरकार के लोगों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर एक शांतिमार्च निकाला।

दलाई लामा ने आशंका जताई है कि यदि चीन अपनी नीति नहीं बदलता है तो तिब्बत में और मौतें हो सकती हैं।

उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को ल्हासा में हुए हिंसक प्रदर्शन के दौरान कई लोग हताहत हुए थे।

अमरीका सहित दुनिया के कई देशों ने चीन से संयम बरतने की अपील की है।

सन् 1989 के बाद से तिब्बत में हुई ये सबसे बड़ी हिंसक घटना है।





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Saturday, March 15, 2008

Webinfosys's Hindi News : चीनी आग्रह पर नेपाल ने रोकी एवरेस्ट यात्रा

एवरेस्ट पर चढ़ाई कुछ दिनों के लिए रोकने के चीनी आग्रह को नेपाल ने मान लिया है। चीन को आशंका है कि तिब्बती विरोध करने के लिए हिमालय की चोटी पर भी पहुँच सकते हैं .

नेपाल के पर्यटन मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग ने कहा है कि 10 मई तक किसी भी पर्वतारोही को एवरेस्ट के बेस कैंप से आगे जाने की इजाज़त नहीं दी जाएगी।

मंत्री ने बताया कि चीन के अनुरोध पर यह क़दम उठाया गया है।

चीन ने अगस्त में होने वाले बीजिंग ओलंपिक की मशाल को एवरेस्ट की चोटी तक ले जाने की योजना बना रखी है।

तिब्बती विद्रोह की 49 वें सालगिरह से शुरू हुए प्रदर्शनों के दौर से चीन चिंतित है। उसे लगता है कि एवरेस्ट पर मशाल ले जाने के दौरान विरोध कर रहे तिब्बती भी वहाँ पहुँच सकते हैं.

फैलता विरोध, बढ़ती चिंता

चीन एक तरफ़ ओलंपिक खेलों की तैयारियों में जुटा है तो दूसरी तरफ़ तिब्बत क्षेत्र की राजधानी ल्हासा में बौद्ध भिक्षुओं ने अपना आंदोलन तेज़ कर दिया है।

तिब्बती शरणार्थी भारत और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों में भी प्रदर्शन कर रहे हैं। कहीं उन्हें बलपूर्वक तितर-बितर किया जा रहा है तो कहीं हिरासत में लिया जा रहा है।

इस बीच नेपाली राजधानी काठमांडू में पुलिस ने तिब्बती शरणार्थियों की एक सभा पर चालू सप्ताह में दूसरी बार बलप्रयोग किया।

प्रत्यक्षदर्शिंयों ने बताया कि सभा में रही बौद्ध भिक्षुणियों पर भी लाठी बरसाने में पुलिस ने कोई परहेज़ नहीं किया।

नेपाली पर्यटन मंत्री ने समाचार एजेंसी रायटर से कहा कि चीन के आग्रह पर 10 मई तक एवरेस्ट की चढ़ाई रोक दी गई है।

उन्होंने कहा, "ऐसा इसलिए किया गया है ताकि जब वे मशाल लेकर चोटी पर जाएँ तब कोई घुसपैठ कर उसमें व्यवधान न पैदा कर सके।"

अभी तक चीन ने मशाल को एवरेस्ट पर ले जाने की तारीख़ तय नहीं की है लेकिन ख़बर है कि अप्रैल के अंत या मई की शुरुआत में यह यात्रा हो सकती है।

वैसे मई महीने को 8,848 मीटर की ऊंचाई वाली दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है।




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Webinfosys's Hindi News : पीड़ित दलित परिवार से मिले राहुल

कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी ने शनिवार को इटावा ज़िले के अमीनाबाद गाँव जाकर उस दलित परिवार से मुलाक़ात की है जिसके पाँच सदस्यों की हत्या कर दी गई थी.

इस परिवार में चार अबोध बच्चियाँ ही बची हैं।

राहुल गांधी ने इन बच्चियों के लिए ढाई लाख रुपए की रकम बैंक में जमा करवाने की घोषणा की है।

ख़बरें हैं कि इन दलितों की हत्या ज़मीन के विवाद के कारण हुई थी लेकिन अब यह राजनीतिक मामला बन गया है।

बुधवार को हुई हत्या पर प्रशासन की नज़र वैसी नहीं थी जैसी कि राहुल गांधी के वहाँ जाने की घोषणा के बाद हो गई।

इसके बाद आनन-फ़ानन में मुख्यमंत्री मायावती ने भी अमीनाबाद जाने का फ़ैसला किया और शुक्रवार की शाम वहाँ जा पहुँचीं।

मुख्यमंत्री मायावती वाराणसी में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगवानी के बाद आला अधिकारियों के साथ सीधे इटावा पहुँचीं।

उन्होंने पीड़ित परिवारों के लोगों से मुलाक़ात की और सहायता का ऐलान किया।

मायावती ने घोषणा की कि हत्याकांड से अनाथ हुई चारों बच्चियों की परवरिश और शादी तक का इंतज़ाम प्रदेश सरकार करेगी।

मुख्यमंत्री ने माना कि सरकारी अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई की होती तो हत्याकांड टाला जा सकता था। उन्होंने लापरवाही के आरोप में वहाँ के थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया।

राहुल का दौरा

राहुल गांधी ने इस परिवार की बच्चियों से 40 मिनट अकेले में बात की और उनकी दिक़्कतों के बारे में पूछताछ की।

उन्होंने एक बच्ची को गोद में उठा लिया और उससे बात करते रहे।

कांग्रेस महासचिव ने इन बच्चियों के लिए बैंक में ढाई लाख रुपए का फ़िक्स्ड डिपॉज़िट करवाने की घोषणा की है।

इससे पहले वहाँ जाते हुए रास्ते में राहुल गांधी एक किसान से मिलने के लिए रुके और किसान के साथ रोटियाँ भी खाईं।

हालांकि राहुल गांधी ने पत्रकारों से बात नहीं की लेकिन प्रेक्षकों का कहना है कि यह संदेश वे दे ही गए कि कांग्रेस के ख़िलाफ़ दलित विरोधी होने की शिकायतों को वे दूर करने में जुट गए हैं।

समाजवादी पार्टी भी

ऐसा नहीं है कि राजनीति सिर्फ़ कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी के बीच चल रही है।

इटावा समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह का गृह जनपद है लेकिन उनकी पार्टी का भी कोई नेता सांत्वना देने नहीं पहुँचा था।

लेकिन राहुल का दौरा घोषित होते ही सपा महासचिव रामगोपाल यादव तत्काल मायावती के बाद वहाँ पहुँच गए.

दरअसल मायावती पिछले कुछ महीनों में रैलियाँ और सभाएँ करके कांग्रेस पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाती रही हैं।

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की पिछले विधानसभा चुनावों में ख़राब स्थिति की वजह दलित वोट बैंक का मायावती के साथ जाना माना जाता है।




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Webinfosys's Hindi News : प्रदर्शनों के लिए दलाई लामा को दोष

तिब्बत की राजधानी ल्हासा में पिछले बीस सालों में सबसे हिंसक चीन विरोधी दंगे और हिंसक प्रदर्शन हुए हैं.

प्रदर्शनकारियों ने पुराने शहर में इमारतों में आग लगा दी है, चीनी मूल के व्यापारियों की दुकानें लूट ली गई हैं और उनकी दुकानों को नष्ट कर दिया गया है।

ल्हासा से मिल रही तस्वीरों में सड़कों पर उल्टी पड़ी कारें दिख रही हैं, यहाँ-वहाँ आग लगने के बाद उठता काला धुँआ दिख रहा है और सड़कों पर चीनी फ़ौजें और बख़्तरबंद गाड़ियाँ दिखाई दे रही हैं।

इन हिंसक प्रदर्शनों में कम से कम दस लोगों के मारे जाने की ख़बरें हैं. चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने कहा है कि मारे गए सभी लोग व्यावसायी हैं।

चीन सरकार ने इन उग्र प्रदर्शनों के लिए तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रमुख और धार्मिक नेता दलाई लामा को दोषी ठहराया है।

लेकिन दलाई लामा के प्रवक्ता ने दिल्ली में इन आरोपों का खंडन किया है।

इस बीच ख़बरें मिल रही हैं कि तिब्बत के घटनाक्रम से चीन के लोग नावाकिफ़ हैं क्योंकि सरकार ने इन ख़बरों को सेंसर कर दिया है।

पिछले सोमवार से तिब्बती लोगों का प्रदर्शन ऐसे समय में शुरु हुआ है जब चीन सरकार ओलंपिक की तैयारियों में लगी हुई है।

इस बीच अमरीका और यूरोपीय संघ ने घटनाक्रम पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि चीन को तिब्बत के निर्वासित नेता दलाई लामा से बात करनी चाहिए।

हिंसक प्रदर्शन

इस बीच तिब्बति प्रदर्शनकारी विरोध प्रदर्शनों को आगे बढ़ाने की तैयारियाँ कर रहे हैं।

लेकिन चीनी प्रशासन ने कहा है कि 'अलगाव की षडयंत्र' से सख़्ती से निपटा जाएगा।

चीन प्रशासन ने इन ख़बरों का खंडन किया है कि वहाँ प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षाबलों ने गोलियाँ चलाई हैं।

उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को ल्हासा में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हुए संघर्ष में कई लोगों की मौत हुई है और अनेक घायल हुए हैं।

अमरीकी रेडियो फ्री एशिया को प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्होंने ल्हासा की सड़कों पर दो लोगों के शव पड़े देखे हैं।

उधर भारत की राजधानी दिल्ली में पुलिस ने ऐसे लगभग 50 तिब्बती प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार कर लिया जिन्होंने चीनी दूतावास में घुसने की कोशिश की।

अशांत स्थिति

मानवाधिकार संगठनों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि ल्हासा में बौद्ध भिक्षुओं के इस सप्ताह शुरू हुए विरोध के बाद सुरक्षा बलों ने शुक्रवार को तीन बौद्ध मठों को घेर लिया।

चश्मदीदों का कहना था कि गुरुवार को ड्रेपुंग और सेरा मठों में पुलिस पहुँच गई. अमरीका से काम करने वाले एक मानवाधिकार संगठन का कहना है कि गंडेन में एक तीसरे मठ को भी घेरा गया।

चीनी शासन के विरोध में बौद्ध भिक्षुओं के दो दिनों तक चले विरोध के बाद यह क़दम उठाया गया।

गुरुवार को चीन ने बौद्ध भिक्षुओं के प्रदर्शन की बातें तो मानी थीं लेकिन यह भी कहा था कि हालात स्थिर हैं।

तिब्बत से किसी भी ख़बर की पुष्टि कर पाना मुश्किल है क्योंकि वहाँ मीडिया और आने-जाने वालों पर कड़ा सरकारी नियंत्रण है।

ख़बरें हैं कि प्रदर्शन की ख़बरों को चीन सरकार ने देशी मीडिया पर सेंसर कर दिया है. सरकारी टेलीविज़न सीसीटीवी पर इन प्रदर्शनों की कोई ख़बर नहीं दिखाई गई।

इस बीच विदेशी चैनलों पर नज़र रखी जा रही है. 'बीबीसी वर्ल्ड' भी नहीं दिखाया जा रहा है।

संवाददाताओं का कहना है कि जब भी तिब्बत का ज़िक्र होता है तो चीन सरकार का रवैया आमतौर पर ऐसा ही होता है।

लामा पर दोष

चीन ने ल्हासा की घटनाओं के लिए दलाई लामा को ज़िम्मेदार ठहराया है।

चीन के सरकारी मीडिया ने कहा है कि ये प्रदर्शन 'पूर्वनियोजित' थे और इसके पीछे दलाई लामा हैं।

लेकिन दलाई लामा के प्रवक्ता चाइम आर छोयकयापा ने दिल्ली में इन आरोपों को सिरे से ख़ारिज कर दिया है।

उनका कहना है कि चीन सरकार तिब्बतियों की समस्या को बंदूक से नहीं सुलझा सकती और उसे तिब्बतियों का मन पढ़ने की कोशिश करनी चाहिए।

उधर तिब्बतियों के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने कहा है कि ल्हासा की स्थिति को लेकर वो गंभीर रूप से चिंतित हैं।

दलाई लामा ने एक प्रेस वक्तव्य जारी करके चीन से माँग की है वह ल्हासा में बर्बर तरीके से बलप्रयोग करना बंद ।

उन्होंने कहा है कि तिब्बतियों ने जो प्रदर्शन किए हैं वो चीनी शासन के ख़िलाफ़ लंबे समय से चले आ रहे असंतोष का प्रतीक हैं।




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Thursday, March 6, 2008

Webinfosys's Hindi News : टाइम्स स्क्वेयर के पास छोटा धमाका

अमरीका के न्यूयॉर्क शहर में एक छोटे धमाके की शिकायत के बाद पुलिस ने मशहूर टाइम्स स्क्वेयर के एक हिस्से को घेर लिया है।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक़ वहाँ एक छोटा धमाका हुआ है।

पुलिस ने उस इलाक़े में लोगों के आने-जाने पर फ़िलहाल रोक लगा दी है।

रिपोर्ट के मुताबिक़ धमाका एक सैनिक भर्ती केंद्र के बाहर हुआ।

न्यूयॉर्क पुलिस का बम निरोधक दस्ता और फ़ायर ब्रिगेड के कर्मचारी मौक़े पर पहुँच गए है ।





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Webinfosys's Hindi News :श्रेय पूरी टीम को जाता है: द्रविड़

ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर हराकर लौट रही भारतीय क्रिकेट टीम को बधाई देते हुए पूर्व भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ ने कहा है कि टीम ने बहुत ही मुश्किल काम पूरा किया, जिसका पूरा श्रेय टीम और उससे जुड़े लोगों को जाता है।

भारतीय टीम के पूर्व कप्तान द्रविड़ ने कहा है, "इतने लंबे दौरे में अंत तक अच्छा प्रदर्शन करते रहना काफ़ी चुनौती भरा काम था और टीम ने इस दौरान बहुत ही ज़बरदस्त क्रिकेट खेला."


अब 'एक मुलाक़ात' कार्यक्रम को नई श्रृंखला के तहत अलग अंदाज़ में पेश किया जाएगा। पहली बार कुछ आमंत्रित लोगों की मौजूदगी में 'एक मुलाक़ात' सवाज-जवाब और बातचीत के प्रारूप में सुनाई देगा.
भारत संपादक संजीव श्रीवास्तव का इस मौक़े पर कहना था, "हर ख़बर के पीछे कोई न कोई कहनी छिपी होती है. हम 'एक मुलाक़ात' के ज़रिए ख़बर बनाने वाली जानी-मानी हस्तियों के असल व्यक्तित्व को श्रोताओं के सामने लाने की कोशिश करते हैं, उनका कम सार्वजनिक चेहरा श्रोताओं को दिखाने की कोशिश करते हैं."

इसकी पहली कड़ी में महमान हैं राहुल द्रविड़ जिन्होंने मैदान के बाहर भी सवालों के बाउंसर का बख़ूबी सामना किया है.

'काजोल हैं पसंदीदा अभिनेत्री'

बातचीत में द्रविड़ ने ये भी माना कि जब वो क्रिकेट खेल नहीं रहे होते तो उतनी नज़दीक़ी से उस पर नज़र नहीं रखते और परिवार के साथ समय ज़्यादा बिताते हैं.

द्रविड़ ने बताया कि उसकी टीम के सदस्यों से जीत के बाद बात तो नहीं हुई मगर कुछ लोगों को उन्होंने मोबाइल पर एसएमएस के ज़रिए बधाई ज़रूर दी।

आमिर ख़ान और अमिताभ बच्चन का अभिनय पसन्द करने वाले राहुल द्रविड़ ने पसंदीदा अभिनेत्री का नाम पूछने पर काजोल का नाम लिया और उनका कहना था कि उनके जीवन का पहला और आख़िरी प्यार उनकी पत्नी ही हैं.

('एक मुलाक़ात' बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के अलावा, बीबीसी हिंदी – मीडियम वेव 212 मीटर बैंड पर और शॉर्टवेव 19, 25, 41 और 49 मीटर बैंड पर - भारतीय समयानुसार हर रविवार रात आठ बजे प्रसारित होता है. दिल्ली और मुंबई में श्रोता इसे रेडियो-वन एफ़एम 94.3 पर भारतीय समयानुसार रविवार दोपहर 12 बजे भी सुन सकते हैं.




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Webinfosys's Hindi News : गज़ा के हालात 40 सालों में सबसे ख़राब'

ब्रिटेन की सहायता एजेंसियों का कहना है कि गज़ा में 1967 में इसराइली कब्ज़े के बाद से अब तक की सबसे ख़राब मानवीय परिस्थितियाँ हैं।

ब्रिटेन की इन एजेंसियों ने वहाँ रह रहे 15 लाख फ़लस्तिनियों के अनुभवों के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार की है।
इस एजेंसियों में एमनेस्टी इंटरनेशनल, सेव द चिल्ड्रन, ऑक्सफ़ैम और क्रिस्चन एड शामिल हैं।

सहायता एजेंसियों ने कहा है कि इसराइल ने गज़ा पर जो प्रतिबंध लगा रखे हैं वह अवैधानिक सामूहिक सज़ा है जो सुरक्षा भी प्रदान नहीं कर पा रही है.

दूसरी ओर इसराइल का कहना है कि उसकी सैन्य कार्रवाई और दूसरे क़दम क़ानूनी और जायज़ हैं और इसराइल पर रॉकेट हमले रोकने के लिए ज़रुरी भी हैं.

त्रासदी

इसराइल ने गज़ा पर लगाए गए प्रतिबंधों को और सख़्त कर दिया था जब पिछले साल जून में हमास गुट ने इलाक़े पर कब्ज़ा कर लिया था.

संयुक्त राष्ट्र कई बार चेतावनी दी है कि इसराइल ने जो घेरेबंदी कर रखी है उसके चलते गज़ा में आवश्यक सेवाएँ भी ध्वस्त होने की कगार पर हैं.

अब ब्रितानी सहायता एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट में गज़ा की मानवीय परिस्थितियों का ज़िक्र करते हुए यूरोपीय संघ से अनुरोध किया है कि वे हमास गुट से चर्चा करें.

गज़ा के लोग खाद्य सहायता पर निर्भर करते हैं. एक लाख दस हज़ार लोग जो निजी क्षेत्रों में नौकरी कर रहे थे, उनमें से 75 हज़ार अपनी नौकरियाँ गँवा चुके हैं.

केयर इंटरनेशनल, यूके के ज्योफ़्री डेनिस का कहना है, "अब अगर घेरेबंदी ख़त्म नहीं हुई तो गज़ा को इस त्रासदी से वापस निकालना संभव नहीं होगा और वहाँ शांति की संभावना ख़त्म हो जाएगी."

जनवरी के बाद से इसराइल ने गज़ा की घेरेबंदी और बढ़ा दी है.

पिछले हफ़्ते इसराइली फ़ौज ने उत्तरी गज़ा पर हमला किया था जिसमें कम से कम 120 लोगों की जानें गई थीं. हताहत होने वालों में कई नागरिक भी थे.

दूसरी ओर फ़लस्तीनी चरमपंथियों ने इसराइल पर रॉकेट हमले जारी रखे हैं. पिछले हफ़्ते दक्षिणी इसराइल के भीतर कर रॉकेट हमले किए गए.

ब्रितानी एजेंसियों का कहना है कि इसराइल को यह अधिकार तो है कि वह अपने नागरिकों की रक्षा करे.

एजेंसियों ने दोनों ही पक्षों में अपील की है कि वे नागरिकों पर अवैधानिक हमले रोकें.

उन्होंने इसराइल से कहा है कि गज़ा के लोगों को भोजन, पीने का साफ़ पानी, बिजली और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने की अपनी ज़िम्मेदारी पूरी करे.

एमनेस्टी, यूके के निदेशक केट एलन का कहना है, "गज़ा के नागरिकों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखकर उन्हें सज़ा देने को जायज़ नहीं ठहराया जा सकता."

उनका कहना है, "यह त्रासदी मानव निर्मित है और इसे बदलना चाहिए."

एजेंसियों ने हमास और फ़तह दोनों ही गुटों से अपील की है कि वे इस त्रासदी को ख़त्म करने के लिए क़दम उठाएँ.

हमास गुट का गज़ा पर कब्ज़ा है और वह इसराइल को मान्यता देने से इनकार करता है. जबकि फ़तह गुट ने महमूद अब्बास के नेतृत्व में पश्चिमी तट पर नियंत्रण संभाल रखा है.

क्रिस्चन एड के दलीप मुखर्जी का कहना है, "गज़ा में तब तक शांति स्थापना नहीं हो सकती जब तक इसराइल, फ़तह और चौगुट (अमरीका, संयुक्त राष्ट्र, यूरोप और रूस) मिलकर हमास से बात न करें और गज़ा के लोगों के भविष्य के प्रति आश्वस्त करें."

लेकिन अपीलें काम नहीं आ रहीं हैं क्योंकि इस बीच इसराइली मंत्रिमंडल ने गज़ा की घेरेबंदी जारी रखने की अनुशंसा की है.





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