Tuesday, April 15, 2008

Webinfosys's Hindi News :चोली के आकार से उलझनें...

जानकारों का कहना है कि अगर महिलाएँ सही आकार की ब्रा का चयन करें तो उन्हें कई तरह की परेशानियों से निजात मिल सकती है।

लंदन के एक अस्पताल का कहना है कि अस्पतालों में 'ब्रा फिटिंग क्लीनिक' खोल दिए जाएँ तो उन हज़ारों महिलाओं को फ़ायदा होगा जिन्हें अपने स्तन का आकार कम करने के लिए सर्जरी करानी पड़ती है।

ये अस्पताल ब्रा चयन का सही तरीक़ा भी बताता है। इसका कहना है कि अब तक जितनी महिलाएँ अस्पताल के इस विभाग में आई हैं, उनमें से कोई भी सही आकार का ब्रा नहीं पहन रही थी।

डॉक्टरों के मुताबिक अगर ब्रा सही आकार की ना हों तो गले, पीठ और कंधों में दर्द हो सकता है और ये इतना बढ़ सकता है कि सर्जरी करानी पड़ जाए।

एक वरिष्ठ स्तन सर्जन का कहना है कि आम तौर पर महिलाएँ ज़रूरत से बड़े आकार की ब्रा पहनती हैं।

ब्रिटेन में अक़्सर बड़े आकार के स्तनों से परेशान महिलाएँ सर्जरी कराना चाहती हैं और कुछ इलाक़ों में तो यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना का हिस्सा है जिसके तहत पैसे न के बराबर लगते हैं।

इसके बावजूद महिलाएँ ख़ुद हज़ारों पाउंड ख़र्च करके भी स्तर ऑपरेशन करवाती हैं।

एक अनुमान के मुताबिक ब्रिटेन में हर साल लगभग दस हज़ार महिलाएँ स्तर का आकार छोटा करने के लिए सर्जरी कराती हैं।

हालाँकि लंदन के रॉयल फ़्री अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉक्टर एलेक्स क्लार्क का कहना है कि ये पैसे की बर्बादी है और ज़रूरत है तो सिर्फ़ सही आकार की ब्रा पहनने की।




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Webinfosys's Hindi News : बर्लुस्कोनी तीसरी बार सरकार बनाएंगे

इटली के मीडिया मुगल और क़द्दावर राजनीतिक नेता सिलवियो बर्लुस्कोनी ने आम चुनाव में फिर से जीत हासिल की है।

सिलवियो बर्लुस्कोनी ने तीसरी बार इटली के आम चुनाव में जीत हासिल की है जिसके बाद उन्होंने कहा कि वह देश की अर्थव्यवस्था में सुधार आगे बढ़ाने के लिए विपक्ष के साथ मिलकर काम करने के इच्छुक हैं।

71 वर्षीय मध्य-दक्षिणपंथी नेता सिलवियो बर्लुस्कोनी ने हालाँकि चेतावनी के अंदाज़ में कहा कि आने वाले कुछ महीने काफ़ी मुश्किल हो सकते हैं।

बर्लुस्कोनी ने यह बयान प्रतिद्वंद्वी नेता वॉल्तर वेल्तरोनी के हार स्वीकार करने के तुरंत बाद दिया है। इन चुनाव नतीजों में जीत हासिल करने के बाद बर्लुस्कोनी तीसरी बार इटली के प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं।

हालाँकि इटली में संवैधानिक प्रावधानों को देखा जाए तो अभी आम चुनाव में तीन साल बचे थे लेकिन देश की रोमानो प्रोदी सरकार बीच में ही गिर जाने की वजह से चुनाव कराने पड़े। रोमानो प्रोदी की सरकार मध्य-वामपंथी विचारधारावाली थी।

अब सिलवियो बर्लुस्कोनी जो सरकार बनाएंगे वह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इटली की 62वीं सरकार होगी।


नतीजे

आम चुनाव के लगभग सभी नतीजे आ चुके हैं और इटली के गृह मंत्रालय ने कहा है कि सिलवियो बर्लुस्कोनी की मध्य-दक्षिणपंथी पार्टी को सीनेट में 47 प्रतिशत वोट मिले हैं जबकि विपक्षी मध्य-वामपंथी पार्टी को 38 प्रतिशत वोट हासिल

आधिकारिक नतीजों के अनुसार बर्लुस्कोनी के गठबंधन को इतालवी संसद के निचले सदन - चैंबर ऑफ़ डिपुटीज़ में 46।5 प्रतिशत मत हासिल हुए हैं जबकि मध्य-वामपंथी गठबंधन को लगभग 38 प्रतिशत वोट मिले हैं।


इटली में हालाँकि सिलवियो बर्लुस्कोनी के समर्थकों ने उनकी जीत पर ख़ुशियाँ मनाई हैं लेकिन सोमवार को इटली की सड़कों पर आमतौर पर ख़ामोशी ही नज़र आई।

बहोत कम लोग ऐसे हैं जिन्हें यह भरोसा है कि राजनेता देश में कोई बेहतर बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं और बहुत से लोगों ने इस आम चुनाव में अनिच्छा से हिस्सा लिया था।

नतीजे आने के बाद अब सरकार गठन के लिए गठबंधन की जोड़-तोड़ वाली राजनीति शुरू होगी। जीत के बाद सिलवियो बर्लुस्कोनी ने एक टेलीविज़न चैनल से बातचीत में कहा कि उनकी सरकार का आकार काफ़ी छोटा होगा जिसमें 12 मंत्री होंगे और उनमें चार महिलाएँ होंगी।

सिलवियो बर्लुस्कोनी ने अपनी जीत के लिए मतदाताओं को धन्यावाद देते हुए कहा कि आने वाले कुछ महीने काफ़ी मुश्किलों भरे हो सकते हैं जिनका सामना करने के लिए बड़ी ताक़त और हौसले की ज़रूरत होगी।




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Webinfosys's Hindi News :संसद में सरकार को घेरने की तैयारी

भारतीय संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज से शुरू हो रहा है जिसमें विपक्ष महँगाई और आरक्षण के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रही है।

जनता पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डालने वाला बजट पेश होने के बाद अब हालात बदल गए हैं।

पिछले दो महीनों में रोज़-मर्रा की ज़रूरतों के सामानों में हुई मूल्य-वृद्धि ने सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी है।

ताज़ा आँकड़ों के मुताबिक महँगाई दर पिछले लगभग साढ़े तीन साल के सर्वोच्च स्तर पर है।

इस मामले पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अगुआई में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) पहले ही आंदोलन छेड़ने की घोषणा कर चुका है।

वामपंथी भी नाराज़

ख़ुद यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दलों ने भी बढ़ती महँगाई को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि सरकार को इसका राजनीतिक ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ सकता है।

संसद सत्र शुरू होते ही वामपंथी दल न सिर्फ़ सदन के भीतर बल्कि उसके बाहर भी आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।

वाम दलों ने महँगाई पर रोक लगाने में विफलता के मुद्दे पर संसद तक मार्च करने का आहवान किया है।

आरक्षण

उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले की गूँज संसद में भी सुनाई दे सकती है।

अदालत ने क्रीमी लेयर को इसके दायरे से बाहर कर दिया है, जिसका राजनीतिक दल इसका विरोध कर रहे हैं।

दूसरी ओर यूपीए और ख़ास कर कांग्रेस पार्टी क्रीमी लेयर को छोड़ कर अदालत के फ़ैसले को कुल मिलाकर सरकार की जीत की तरह पेश कर रही है और साथ ही निजी संस्थानों में भी आरक्षण लागू करने की बात कर रही है जिसका मुद्दा ज़ोर शोर से उठ सकता है।




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Friday, April 11, 2008

Webinfosys's Hindi News : धुन चोरी का विवाद सुलझा, रिलीज़ हुई क्रेज़ी-4

जयदीप सेन निर्देशित फ़िल्म क्रेज़ी-4 के दो गानों को लेकर उठा विवाद अदालत के बाहर सुलझा लिया गया है जिसके बाद फ़िल्म रिलीज़ हो गई है।

संगीतकार राम संपत ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा था कि फ़िल्म के दो गानों के धुन उनके थे और बिना उनसे इजाज़त लिए इन धुनों का इस्तेमाल किया गया।

गुरुवार को न्यायमूर्ति डीजे कार्णिक ने राम संपत के पक्ष में फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि दोनों विवादास्पद गानों को हटाने के बाद फ़िल्म रिलीज़ की जाए।

इसके बाद आनन-फ़ानन में निर्माता राकेश रोशन ने अदालत के बाहर राम संपत से सुलह की। दोनों में कोई समझौता हुआ और अब ये फ़िल्म दोनों गानों के साथ रिलीज़ होगी।

दरअसल इन दोनों गानों, क्रेज़ी फ़ॉर.. और ब्रेक फ़्री.. को इस फ़िल्म की जान कहा जा रहा है। दोनों आइटम सॉंग ऋतिक रोशन और शाहरुख़ ख़ान पर फ़िल्माए गए हैं।

इन दोनों गानों में जो धुन इस्तेमाल किए गए उनसे मिलते जुलते धुन राम संपत ने मोबाइल कंपनी सोनी एरिक्सन के विज्ञापन के लिए बनाया था।

अदालत ने कहा कि विज्ञापन की धुन बेशक कुछ सेकेंडों की है लेकिन यही हिस्सा फ़िल्म के गानों में भी प्रमुखता से इस्तेमाल की गई है।

क्रेज़ी-4 में मुख्य भूमिका निभाई है इरफ़ान ख़ान, अरशद वारसी, राजपाल यादव, सुरेश मेनन और जूही चावला ने।


इस कॉमेडी फ़िल्म में जूही चावला डॉक्टर हैं जो अलग-अलग तरह की परेशानियों से जूझ रहे चार लोगों का इलाज़ करती हैं।





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Webinfosys's Hindi News :इराक़ मामले पर विपक्ष ने बुश को घेरा

अमरीका में विपक्षी डेमोक्रैटिक पार्टी ने राष्ट्रपति जॉर्ज बुश पर आरोप लगाया है कि वो राष्ट्रपति चुनाव को देखते हुए इराक़ के भविष्य पर कोई भी अहम फ़ैसला नहीं ले पा रहे हैं।

विपक्ष का कहना है कि राष्ट्रपति बुश इराक़ के बारे में कोई भी अहम फ़ैसला नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव तक टालना चाहते हैं।

डेमोक्रैटिक पार्टी ने बुश के उस बयान को गंभीरता से लिया है जिसमें उन्होंने जुलाई में इराक़ से सैनिकों की वापसी रोकने की बात कही है।

जॉर्ज बुश ने कहा था कि जुलाई में सैनिकों की वापसी रोक कर इराक़ की स्थिति की समीक्षा की जाएगी।

अमरीकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव की अध्यक्ष और डेमोक्रैटिक पार्टी की नेता नैन्सी पेलोसी ने कहा है कि राष्ट्रपति को जनता को जवाब देना ही होगा।

सैनिकों की संख्या में कटौती

अमरीकी राष्ट्रपति बुश का कहना है कि इराक़ में मिली कामयाबी को ध्यान में रखते हुए अमरीका वहां अपनी फ़ौज में 31 जुलाई तक 25 प्रतिशत की कटौती कर देगा।

यानी वो सारे सैनिक जो पिछले साल एक नई नीति के तहत इराक़ भेजे गए थे, 31 जुलाई तक वापस लौट सकेंगे और इसके बाद वहाँ के हालात की समीक्षा होगी।

राष्ट्रपति बुश ने कहा है कि वो इराक में अमरीकी फ़ौज के कमांडर जनरल डेविड पेट्रयस और राजदूत रायन क्रॉकर की सलाह को मानते हुए ये ऐलान कर रहे हैं।

जनरल पेट्रयस ने इस कटौती के बाद 45 दिनों का और समय मांगा है, इस बात का आकलन करने के लिए कि वहां के हालात फौज में और कटौती की इजाज़त देते हैं या नही।

ग़ौरतलब है कि डेमोक्रैटिक पार्टी इराक़ से जल्दी से जल्दी सेना वापस बुलाने के पक्ष में हैं।




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Webinfosys's Hindi News : संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने चीन को बता दिया है कि वो बीजिंग में अगस्त में होने वाले ओलंपिक खेलों के उदघाटन समारोह

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने चीन को बता दिया है कि वो बीजिंग में अगस्त में होने वाले ओलंपिक खेलों के उदघाटन समारोह में हिस्सा नहीं ले पाएंगे।

संयुक्त राष्ट्र की एक प्रवक्ता का कहना है कि बान की मून ने कुछ महीने पहले ही अपनी असमर्थता जता दी थी और कहा था कि समय की कमी के कारण उनका बीजिंग जाना निश्चित नहीं है।

इस बीच ओलंपिक मशाल अर्जेंटीना पहुँच गई है जहाँ इसकी सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं।

तिब्बत पर चीन के शासन के ख़िलाफ़ तिब्बती शरणार्थियों ने कई देशों में ओलंपिक मशाल का विरोध किया है।

जहाँ लंदन में मशाल छीनने की कोशिश की गई, वहीं पेरिस में सुरक्षा कारणों से इसे बुझाना पड़ा।

इस साल के शुरु में तिब्बत में सबसे पहले चीन विरोधी हिंसक प्रदर्शन हुए थे।

चीन को ओलंपिक की मेज़बानी मिली है और तिब्बती शरणार्थियों ने इसे ध्यान में रखते हुए विरोध प्रदर्शन तेज़ किए हैं ताकि पूरी दुनिया का ध्यान इस मुद्दे की ओर खींचा जा सके।

इसका असर भी दिखाई दे रहा है। कई चर्चित खिलाड़ियों ने ओलंपिक मशाल दौड़ के बहिष्कार की घोषणा की है।

इस कड़ी में नया नाम जुड़ा है नोबल शांति पुरस्कार विजेता वंगारी मथाई का। उन्होंने चीन में मानवाधिकारों की बुरी स्थिति का हवाला देते हुए तंज़ानिया में मशाल दौड़ से अपना नाम वापस ले लिया है।

उन्होंने कहा है कि वो तिब्बत की घटनाओं से चिंतित हैं और वहाँ के लोगों के प्रति सहानुभूति रखती हैं।




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Thursday, April 10, 2008

Webinfosys's Hindi News : कुंबले और इशांत शर्मा का फ़िटनेस टेस्ट

भारत और दक्षिण अफ़्रीका के बीच शुक्रवार से तीसरा और अंतिम टेस्ट कानपुर के ग्रीनपार्क स्टेडियम में शुरू हो रहा है .

भारतीय टीम के सामने फ़िटनेस अब भी एक गंभीर समस्या है।

भारत ने अपनी 16 सदस्यीय टीम में चार स्पिनरों को शामिल किया है लेकिन अनिल कुंबले की फ़िटनेस पर अब भी सवालिया निशान है।

कुंबले का गुरुवार को फ़िटनेस टेस्ट होगा. उनके अलावा तेज़ गेंदबाज़ इशांत शर्मा का भी फ़िटनेस टेस्ट से गुज़रना होगा।

इसके बाद ही दोनों की उपलब्धता का पता चल पाएगा।

अगर कुंबले इसमें नाकाम रहे तो भारत को हरभजन सिंह, पीयूष चावला और रोमेश पवार पर निर्भर रहना होगा।

इधर दोनों टीमें कानपुर पहुँच गईं हैं और बुधवार को दोनों टीमों ने जमकर अभ्यास किया।

अहम टेस्ट

सीरिज़ बराबर करने के लिए भारत को दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ ये टेस्ट जीतना होगा।

यही वजह है कि दोनों टीमें कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम की पिच पर काफ़ी ध्यान दे रही हैं।

दक्षिण अफ़्रीकी खिलाड़ियों का मानना है कि पिच जल्द ही टूटने लगेगी और इस पर से घास हटा दी गई है।

माना जा रहा है कि अहमदाबाद में भारत को तीन दिन में मिली हरारी हार के बाद पिच को लेकर ज़रूर काफ़ी विचार-विमर्श किया जा रहा होगा।

समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में क्यूरेटर शिव कुमार ने कहा, '' हमें कोई निर्देश नहीं मिले हैं. हमने घास पर भारी रोलर का इस्तेमाल किया है. यहाँ पहली पारी में बल्लेबाज़ी में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए, बाद में गेंदबाज़ों को इससे कुछ सहायता मिलेगी।''

वैसे अगर पिच स्पिनरों को मदद करेगी तो टॉस अहम भूमिका निभाएगा क्योंकि कोई भी टीम उस समय बल्लेबाज़ी नहीं करना चाहेगी जब परिस्थितियां कठिन होगी।




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Webinfosys's Hindi News : मौजूदा संकट से उबर जाएगा ओलंपिक'

आईओसी के अध्यक्ष जैक्स रोग ने उम्मीद जताई है कि बीजिंग ओलंपिक अगले कुछ दिनों में मशाल यात्रा के दौरान विरोध प्रदर्शनों के मौजूदा संकट से उबर जाएगा।

उन्होंने ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले देशों से खेलों के इस महाकुंभ को सफल बनाने की अपील की है।

इससे पहले ओलंपिक मशाल रिले को अमरीका में भी विरोध का सामना करना पड़ा।

अमरीका के सैन फ़्रांसिस्को में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ओलंपिक मशाल दौड़ आयोजित की गई।

लेकिन हज़ारों की संख्या में जुटे चीन-विरोधी प्रदर्शनकारियों से बचने के लिए आयोजकों ने अंतिम क्षणों में मशाल दौड़ का रास्ता बदल दिया।

बुधवार को सैन फ़्रांसिस्को में ओलंपिक मशाल दौड़ की दूरी भी आधी कर दी गई। पहले ये रिले दौड़ 10 किलोमीटर की थी.

मशाल के स्वागत में आयोजित समारोह का स्थान भी अंतिम क्षणों में बदलना पड़ा।

सैन फ़्रांसिस्को के मेयर गेविन न्यूसम ने इन बदलावों को ज़रूरी बताते हुए कहा है कि जनसुरक्षा की दृष्टि से ये क़दम उठाने पड़े।

इससे पहले जब ओलंपिक मशाल सैन फ़्रांसिस्को में यात्रा के लिए निकली तो वहाँ नगर के मेयर ने उसका स्वागत किया।

मशाल यात्रा के नियत समय से घंटों पहले ही हज़ारों लोग प्रस्तावित रूट पर जमा हो गए थे।

इनमें तिब्बत समर्थकों की बड़ी संख्या तो थी ही, चीनी मूल के लोग भी अच्छी ख़ासी संख्या में जुटे थे, जो ओलंपिक और मशाल के पक्ष में नारे लगा रहे थे।

आमने-सामने आए समर्थक

ऐसे भी मौक़े आए जब दोनों ही पक्ष के लोग आमने-सामने आ गए। चीन समर्थक और तिब्बत समर्थक एक दूसरे के ख़िलाफ़ नारे लगा

दोनों गुटों के बीच हल्की-फुल्की झड़प की भी खबर है।

मशाल यात्रा का विरोध कर रही एक महिला ने बताया, "हम चीन सरकार से जुड़ी सारी समस्याओं को उठा रहे हैं, जिनमें बर्मा, दारफ़ुर और तिब्बत के साथ-साथ चीन के भीतर की समस्याएँ भी हैं। मैं और स्वतंत्रता देखना चाहती हूँ।"

लेकिन अपने- अपनी बात रखने की हरसंभव कोशिश कर रहे इन लोगों का इंतज़ार बेकार गया। क्योंकि अंतिम क्षणों में अधिकारियों ने मशाल यात्रा का तयशुदा रूट लगभग पूरी तरह बदल दिया

कड़ी सुरक्षा और सैकड़ों सुरक्षाकर्मियों के बीच इस मशाल को ले जाया गया.

क्योंकि मशाल के चारों ओर सैकड़ों की संख्या में सुरक्षाकर्मी चल रहे थे।

इनमें चीनी सुरक्षाकर्मी भी थे, जिन्हें मशाल की सुरक्षा के पहले घेरे के रूप में लगा रखा था।

वैसे, दौड़ शुरू होने से पहले विरोध कर रहे एक शख्स को हिरासत में भी लिया गया।

ओबामा ने भी किया विरोध

अमरीकी राष्ट्रपति पद के चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से उम्मीदवारी के दावेदार बराक़ ओबामा ने राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश से अपील की है कि वो बीजिंग ओलंपिक के उदघाटन समारोह में शामिल न हों।

ओबामा ने कहा कि जब तक चीन तिब्बत में मानवाधिकार की स्थिति सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाता और दारफ़ुर में होने वाले कथित जनसंहार को रोकने में मदद नहीं देता तब तक बीजिंग ओलंपिक का विरोध किया जाना चाहिए।

इससे पहले डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता और राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी की दावेदार हिलेरी क्लिंटन भी राष्ट्रपति बुश से इसी तरह के विरोध की अपील कर चुकी हैं।

हिलेरी क्लिंटन ने ब्रितानिया के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन के बीजिंग ओलंपिक के उदघाटन समारोह में शामिल न होने के फ़ैसले का भी स्वागत

अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश पहले ही चीन से अपील कर चुके हैं कि वो तिब्बत के मामले में वहाँ के निर्वासित नेता दलाई लामा से बातचीत करके इस मसले को सुलझाएँ।

इससे पहले पेरिस और लंदन में भी बीजिंग ओलंपिक मशाल का जमकर विरोध किया गया था।

ओलंपिक मशाल ग्रीस के ओलंपिया में 24 मार्च को ज्योति जलाई गई थी और इसे बीजिंग में आठ अगस्त को ओलंपिक खेलों के उदघाटन से पहले 20 देशों से होकर गुज़ारा जाना है

ओलंपिक मशाल अमरीका के बाद अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस ऑयर्स ले जाई जाएगी। 17 अप्रैल को ये मशाल दिल्ली पहुँचेग




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Webinfosys's Hindi News : नेपाल में कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान जारी

कड़ी सुरक्षा के बीच नेपाल में संविधानसभा के चुनाव के लिए मतदान जारी है।

गुरुवार को नेपाल के समयानुसार सुबह सात बजे से संविधान सभा के लिए मतदान शुरू हुआ।

संविधान सभा की कुल 601 सीटों में से 240 पर सीधा चुनाव हो रहा है जबकी 335 सीटों पर समानुपातिक प्रणाली के आधार पर चयन होगा।

सुबह-सुबह मतदान केंद्र पर वोट डालने वालों की संख्या कुछ कम देखी गई।

लेकिन, जैसे-जैसे दिन चढ़ रहा है लोग अपने मताधिकार का उपयोग करने मतदान केंद्र पहुँच रहे हैं।

मतदान को लेकर उत्साह

लोग पूरे उत्साह के साथ सज-धज कर मतदान करने पहुँच रहे हैं।

काठमांडु के नंदकिशोर महादेव मंदिर इलाक़े के एक मतदान केंद्र पर वोट डालने पहुँचे लोगों की कतार सड़क के दूसरे सिरे तक पहुँच ग ाद में प्रशासन को लोगों को व्यवस्थित करना पड़ा ताकि सड़क पर आने-जाने वालों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

मतदान केंद्रों पर पुरुषों से ज़्यादा तादाद महिलाओं की देखी जा रही है।

मतदान केंद्रों पर सभी राजनीतिक दल पूरे उत्साह से मतदाताओं को पर्चियाँ बनाकर दे रहे हैं.

नेपाल में चुनाव भारत की तरह इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से नहीं हो रहे हैं.
बल्कि, इसके लिए काग़ज़ के मतपत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है.

मतदान केंद्र पर सज-धज कर पहुँची एक महिला ने कहा, "एक नया सुंदर नेपाल बनेगा। ये चुनाव हमारे लिए कुछ अच्छा लेकर आएगा।"

एक दूसरी महिला ने कहा, "किसी तरह का कोई डर कोई भय नहीं है। हमें अपनी जान की ज़रा भी परवाह नहीं है। हम नेपाल के लिए वोट डालने आए कुछ मतदान केंद्रों पर तनाव है लेकिन अब तक मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीक़े से हो रहा है।

इस मतदान पर नज़र रखने के लिए दुनिया भर से लगभग एक हज़ार पर्यवेक्षक नेपाल के अलग-अलग हिस्सों मे पहुंचे हैं।

इन पर्यवेक्षकों में अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति जिमी कार्टर भी शामिल हैं। भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त भी नेपाल के चुनाव देखने पहुंचे हैं।

प्रशासन ने निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव के लिए लगभग डेढ़ लाख सुरक्षाकर्मी तैनात किए हैं।

सुरक्षाकर्मियों ने कुछ माओवादी कार्यकर्ताओं और उन मधेशी संगठनों के कुछ कार्यकर्ताओं को भी गिरफ़्तार किया है जो चुनाव का बहिष्कार कर रहे हैं।

ऐतिहासिक हैं चुनाव

नेपाल में हो रहे संविधानसभा के चुनाव को ऐतिहासिक माना जा रहा है।

माओवादियों के मुख्यधारा में लौटने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने के कारण इस चुनाव को ऐतिहासिक माना जा रहा है।

माओवादी नेता प्रचंड ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वो चुनाव परिणाम को सम्मानपूर्वक स्वीकार करेंगे।

चुनाव से एक दिन पहले पुलिस ने नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी-माओवादी के सात कार्यकर्ताओं को गोली मार दी।

दूसरी ओर नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार ऋषिप्रसाद शर्मा की अज्ञात बंदूकधारियों ने हत्या कर दी।

लेकिन हिंसा की खबरों के बीच विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने अपने कार्यकर्ताओं से संयम बरतने की अपील की है।

माओवादी नेता पुष्पकमल दहल प्रचंड ने अपने कार्यकर्ताओं से किसी भी तरह की हिंसा से दूर रहने को कहा है.कुछ मतदान केंद्रों पर तनाव है लेकिन अब तक मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीक़े से हो रहा है।

इस मतदान पर नज़र रखने के लिए दुनिया भर से लगभग एक हज़ार पर्यवेक्षक नेपाल के अलग-अलग हिस्सों मे पहुंचे हैं।

इन पर्यवेक्षकों में अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति जिमी कार्टर भी शामिल हैं। भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त भी नेपाल के चुनाव देखने पहुंचे हैं।

प्रशासन ने निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव के लिए लगभग डेढ़ लाख सुरक्षाकर्मी तैनात किए हैं।

सुरक्षाकर्मियों ने कुछ माओवादी कार्यकर्ताओं और उन मधेशी संगठनों के कुछ कार्यकर्ताओं को भी गिरफ़्तार किया है जो चुनाव का बहिष्कार कर रहे हैं।

ऐतिहासिक हैं चुनाव

नेपाल में हो रहे संविधानसभा के चुनाव को ऐतिहासिक माना जा रहा है।

माओवादियों के मुख्यधारा में लौटने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने के कारण इस चुनाव को ऐतिहासिक माना जा रहा है।

माओवादी नेता प्रचंड ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वो चुनाव परिणाम को सम्मानपूर्वक स्वीकार करेंगे।

चुनाव से एक दिन पहले पुलिस ने नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी-माओवादी के सात कार्यकर्ताओं को गोली मार दी।

दूसरी ओर नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार ऋषिप्रसाद शर्मा की अज्ञात बंदूकधारियों ने हत्या कर दी।

लेकिन हिंसा की खबरों के बीच विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने अपने कार्यकर्ताओं से संयम बरतने की अपील की है।

माओवादी नेता पुष्पकमल दहल प्रचंड ने अपने कार्यकर्ताओं से किसी भी तरह की हिंसा से दूर रहने को कहा है।

उधर नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के नेता माधव नेपाल ने भी अपने कार्यकर्ताओं से धैर्य से काम लेने को कहा है।

माओवादी नेता प्रचंड और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के नेता माधव नेपाल दो दो सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।

संविधान सभा के पहले सत्र में नेपाल मे राजशाही समाप्त करने और देश को एक संप्रभु गणराज्य घोषित करने पर फ़ैसला किया जाएगा।





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Wednesday, April 9, 2008

Webinfosys's Hindi News : संकट में है रेगिस्तान का जहाज़

राजस्थान मे ऊँटों की घटती संख्या ने सरकार को चिंता में डाल दिया है। सरकार ने अब ऊँटनी के दूध से बने उत्पाद को बाज़ार में लाने का काम अपने हाथ में ले लिया है।

साथ ही सरकार ने ऊँटों का बीमा कराने का भी फ़ैसला किया है ताकि उन्हें बचाया जा सके।

उधर केन्द्र सरकार ऊँटों के निर्यात पर विचार कर रही है। लेकिन राजस्थान ने इसके लिए साफ़ मना कर दिया है.

घटते चारागाह और यांत्रिक सुविधाओं के बोलबाले ने रेगिस्तान के इस जहाज़ को संकट में डाल दिया है। जानकारों के मुताबिक़ पिछले एक दशक में राजस्थान मे ऊँटों की तादाद आधी ही रह गई है।

ऊँटनी के दूध में कई बीमारियों का इलाज छिपा है। राज्य पशुपालन मंत्री प्रभुलाल सैनी ने बताया कि ऊँटनी का दूध मधुमेह से पीड़ित रोगियों को बड़ी राहत पहुंचाता है और इस बारे में कई अध्ययन हो चुके हैं।

लिहाज़ा सहकारी डेयरी ने ऊँटनी के दूध से बनी आइसक्रीम और ज़ायकेदार दूध बिक्री के लिए जारी किया है.

अभी इसे बीकानेर में जारी किया गया है। फिर इसे जयपुर और दिल्ली में भी लोगों को उपलब्ध कराया जाएगा।

घटती संख्या

सैनी कहते हैं, "ऊँटों की संख्या लगातार घट रही है. अभी ये चार लाख 98 हज़ार है. पहले ये सात लाख से ज़्यादा थे. हम ऊँटों और उनके पालकों का बीमा भी कर रहे हैं. शुरु मे पाँच हज़ार ऊँटों का बीमा होगा."

राज्य पशु कल्याण बोर्ड के मुखिया ओतारम देवासी कहते हैं, "जंगल रहे नहीं, चारागाह सिकुड़ गए और मशीन आ जाने से ऊँटों के सामने मुश्किल खड़ी हो गई है. हम प्रयास कर रहे है कि ऊँटों की उपयोगिता फिर से बने."

जयपुर में ऊँट गाड़ी चलाकर गुज़ारा करने वाले उदय सिंह कहते हैं, "अब ऊँट के ज़रिए गुज़ारा करना कठिन हो गया है क्योंकि ऊँटों को अब वाहनों से मुक़ाबला करना पड़ रहा है।"

उधर केन्द्र सरकार ऊँटों के निर्यात पर विचार कर रही है.

पशुपालन मंत्री श्री सैनी ने बताया, "केन्द्र ने हमसे हमारी राय मांगी है। हमने साफ़ कह दिया है कि ऊँटों को शोध, सांस्कृतिक मेलों या सजावट जैसे कामों में तो भेजा जा सकता है। अन्य किसी काम के लिए नहीं क्योंकि इन्हें अब बचाना ज़रुरी है।"

रेगिस्तान का जहाज़

राजस्थान मे ऊँट सदियों तक रेगिस्तान में काम आता रहा है। बीकानेर रियासत दौर में ऊँट शाही सेना में साथ चलता था और सेना में 'गंगा रिसाला' नाम से इसके अलग शाखा थी।

बाद में ये 'गंगा रिसाला' ब्रिटिश सेना का हिस्सा भी बना और विश्व युद्ध में भी भाग लिया।

इस समय ऊँट भारत पाकिस्तान की सरहद पर सीमा रक्षकों के साथ सुरक्षा में भी अपनी अहम भूमिका अदा करता है।

थार मरुस्थल के विकट जीवन में ऊँट ने सैंकडों सालों तक इंसान का साथ दिया है, क्या अब इंसान संकट में फँसे अपने पुराने साथी को यूं ही छोड़ देगा?





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Webinfosys's Hindi News : ओबामा-हिलेरी ने कहा, इराक़ से सेना हटाएँ

अमरीकी राष्ट्रपति पद के डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों बराक ओबामा और हिलेरी क्लिंटन ने दोहराया है कि इराक़ से सेना की वापसी होना चाहिए.

जबकि रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार जॉन मैक्केन ने पार्टी लाइन पर बने रहकर कहा है कि सेना की वापसी ख़तरनाक हो सकती है और अलक़ायदा फिर से ताक़तवर हो जाएगा।

इराक़ में अमरीका के सबसे वरिष्ठ कमांडर जनरल डेविड पेट्रियस ने वॉशिंगटन में चल रही संसद की सुनवाई में कहा है कि इराक़ में अमरीकी सैनिकों की मौजूदगी अभी ज़रूरी है और जुलाई से सैनिकों की वापसी के कार्यक्रम पर पुरर्विचार किया जाना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि इराक़ पर हमले के पाँच सालों में चार हज़ार से अधिक अमरीकी सैनिकों की मौत हो गई है और अब वहाँ सैनिकों की मौजूदगी एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनी हुई है।

अपना-अपना राग

आमतौर पर सीनेट का कमेटी रुम राजनीतिक प्रहसनों का मंच बना होता है और इराक़ के मामले में हो रही सुनवाई में राष्ट्रपति चुनाव के तीनों भावी उम्मीदवार अपने-अपने नाटकीय अंदाज़ में प्रस्तुत थे।

वे चुनाव प्रचार के लिए उपयोग में आने वाली अपनी सबसे अच्छी पंक्तियों के साथ हाज़िर थे और उन्होंने पूरी तैयारी की थी।

डेमोक्रेटिक उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि यदि वे राष्ट्रपति बनीं तो इराक़ से अमरीकी सैनिकों की वापसी साठ दिनों के भीतर शुरु हो जाएगी।

हालांकि बराक ओबामा की लाइन इससे कुछ अलग थी और उन्होंने कहा कि सेना की वापसी के लिए एक टाइमटेबल बनना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इराक़ के मामले में ईरान से भी बात करनी चाहिए।

लेकिन रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के अधिकृत उम्मीदवार होने जा रहे जॉन मैक्केन ने कहा कि इस समय सेना की वापसी ठीक नहीं होगी।

उनका कहना था कि इससे अलक़ायदा फिर मज़बूत हो सकता है।

सुरक्षा

लेकिन इराक़ में अमरीकी सेना की कमान संभाले हुए जनरल पैट्रियस ने कहा कि सरकार को जुलाई से सैनिकों की वापसी के कार्यक्रम पर पुनर्विचार करना चाहिए

उन्होंने कहा कि इराक़ में सुरक्षा के मामले में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है हालांकि यह सभी जगह एक समान नहीं है।

उनका कहना था कि गर्मियों में एक बार इराक़ में सैनिकों की संख्या के बारे में फिर से आकलन करने की ज़रुरत होगी।

उन्होंने माना कि पिछले दिनों बसरा में हुए ऑपरेशन की योजना ठीक तरह से नहीं बनी थी।

उन्होंने सांसदों को बताया कि पिछले सितंबर में उन्होंने इराक़ की जो स्थिति बताई थी अब उसमें काफ़ी सुधार हुआ है।

लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि वहाँ सुधार की वास्तविक स्थिति अभी भी बहुत नाज़ुक है और यह स्थिति पलट भी सकती है।

यानी सब कुछ अभी भी अमरीकी और इराक़ी फ़ौजों के हाथ में नहीं है।

दो दिनों की सुनवाई के पहले दिन इराक़ में अमरीका के राजदूत रायन क्रॉकर ने संसद को इराक़ की स्थिति की ताज़ा स्थिति से अवगत कराया।





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Webinfosys's Hindi News : नेपाल पुलिस की गोली से सात माओवादी मरे

पश्चिमी नेपाल में सुरक्षाबलों ने कम से कम सात माओवादी कार्यकर्ताओं को गोली मार दी है।

एक माओवादी नेता ने बताया कि 16 अन्य लोग घायल हैं।

घटना डांग ज़िले में हुई है और अब वहाँ कर्फ़्यू लगा दिया गया है।

यह घटना उस समय हुई जब गुरुवार को होने वाले चुनावों में खड़े एक उम्मीदवार के लोगों के साथ माओवादियों की झड़प हो गई।

नेपाल में चुनावी हिंसा की यह अब तक की सबसे बड़ी घटना है।

उल्लेखनीय है कि नेपाल में साझा सरकार के साथ माओवादियों के समझौते के बाद से उन्होंने हथियार छोड़ दिए हैं और सरकार में शामिल हो गए हैं।

इसके बाद अब वे अहम चुनावों में भी हिस्सा ले रहे हैं।

हिंसा

घटना मंगलवार को देर रात हुई।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार घटना डांग ज़िले में नेपाली कांग्रेस के एक उम्मीदवार के कार्यकर्ताओं और माओवादियों के बीच शुरु हुई झड़प के बाद हुई।

गृहमंत्रालय के प्रवक्ता मोदराज दोतेल ने कहा है कि पुलिस को छह शव मिले हैं।

माओवादियों का आरोप है कि नेपाली कांग्रेस के उम्मीदवार के कहने पर पुलिस ने माओवादियों पर गोली चलाई।

इससे पहले दूसरे राजनीतिक दल आरोप लगाते रहे हैं कि माओवादी कार्यकर्ता वोटरों को धमका रहे हैं और अपने प्रभाव वाले इलाक़े में चुनाव प्रचार में भी बाधा डाल रहे हैं।

मंगलवार को रात हुई एक अन्य घटना में कम्युनिस्ट पार्टी के एक कार्यकर्ता की सुरखेत ज़िले में मौत हो गई है।

गुरुवार को होने वाले चुनावों के लिए सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं और पूरे देश में एक लाख 35 हज़ार जवानों की तैनाती की गई है।

संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ सहित कई संगठनों के सैकड़ों प्रेक्षक इन चुनावों पर नज़र रखे हुए हैं।





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