कांग्रेस का समर्थन कर रही पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और पैंथर्स पार्टी ने सार्वजनिक रूप से ग़ुलाम नबी आज़ाद सरकार का समर्थन न करने की घोषणा की है।
रिपोर्टों के अनुसार अगर मुख्यमंत्री ज़रुरी मत हासिल करने के प्रति आश्वस्त नहीं होंगे तो वो इस्तीफ़ा भी दे सकते हैं लेकिन इन रिपोर्टों की किसी भी तरह से पुष्टि नहीं हो सकी है।
ग़ौरतलब है कि पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर की कांग्रेस सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था। इसके बाद उनकी सरकार अल्पमत में आ गई थी।
अमरनाथ मंदिर बोर्ड को ज़मीन दिए जाने को लेकर चल रहे विवाद के कारण पीडीपी ने यह फ़ैसला किया था।
पीडीपी अमरनाथ मंदिर बोर्ड की ज़मीन दिए जाने के राज्य सरकार के फ़ैसले से नाराज़ थी।
पीडीपी कांग्रेस के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में शामिल थी और इसके 18 विधायक हैं।
विधानसभा की स्थिति
87 सदस्योंवाली जम्मू कश्मीर विधानसभा में कांग्रेस के 21 विधायक हैं और उसे सीपीएम के दो और आठ निर्दलीय विधायकों का समर्थन हासिल है।
विपक्षी नेशनल कांफ्रेंस के 24 सदस्य हैं और उसने पहले ही कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देने से इनकार कर दिया है।
जबकि चार सदस्यों वाली पैंथर्स पार्टी और गठबंधन सरकार के बीच 2005 से ही मनमुटाव चल रहा है।
इसके पहले राज्यपाल एनएन वोहरा ने मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद सरकार को सात जुलाई तक विधानसभा में अपना बहुमत साबित करने को कहा था।
इसके पहले मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद ने राज्यपाल को भेजे पत्र में सदन में कभी भी बहुमत साबित करने की बात कही थी।
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