Monday, November 5, 2007

Webinfosys's Hindi News : 25 लाख लोग चले जाते हैं अपनों से मिलने

एनबीटी

राजधानी में रोजगार और भविष्य की तलाश में आसपास के राज्यों से लोगों के आने का सिलसिला बहुत पुराना है। इसी कारण दिल्ली की आबादी लगातार बढ़ रही है। पर दीवाली के मौके पर इस राजधानी से आबादी का बोझ थोड़ा उतर जाता है। वजह है कि आसपास के राज्यों से आए लोग इस खास त्योहार पर अपने प्रियजनों के पास अपने घर लौटते हैं। एक अनुमान के मुताबिक, दीवाली पर्व पर दिल्ली में करीब 25 लाख लोग कम हो जाते हैं। नतीजा है कि दीवाली के पास आते ही रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर मुसाफिरों की अथाह भीड़ दिखाई देती है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राजधानी की आबादी में हर साल तकरीबन 5 लाख की संख्या और जुड़ जाती है। चूंकि यहां रोजगार के तमाम अवसर हैं, इसलिए लोग यहां आकर वापस नहीं जाते। पर दीवाली ही ऐसा पर्व है जब लोगों को अपने घर की याद ज्यादा आती है और इसके लिए वे कई दिन पहले से ही घर जाने की कवायद शुरू कर देते है। कोई ट्रेन की टिकट बुक करवा रहा होता है तो कोई इस उधेड़बुन में रहता है कि घर जाने के लिए कौन से दिन किस बस से जाया जाए। जिस किसी के पास अपना वाहन है वह उसे चुस्त-दुरुस्त करा रहा नजर आता है। सबका मकसद यही होता है कि दीवाली अपने लोगों के बीच मनाई जाए। दीवाली पर लोगों को अपने परिजनों से मिलवाने के लिए रेलवे 400 स्पेशल ट्रेनें चलाता है। आसपास के राज्यों के परिवहन विभाग भी मुसाफिरों की बढ़ी तादाद के मद्देनजर ज्यादा बसें चलाते हैं ताकि यात्रियों को सुविधा भी मिले और लगे हाथ विभाग की कमाई भी बढ़े।

दिल्ली छोड़ने की यह प्रवृत्ति दीवाली से एक सप्ताह पहले शुरू हो जाती है। सबसे पहले छात्र निकलना शुरू करते हैं, उसके बाद कामगार मजदूर और बाद में सरकारी अधिकारी या कर्मचारी। इनकम टैक्स विभाग में काम कर रहे कालीचरण के मुताबिक, वह दीवाली से दो दिन पहले बिहार के लिए निकल पड़ते हैं और छठ पर्व मनाकर ही दिल्ली लौटते हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी में पीएचडी कर रहे राजेश सेठ के मुताबिक दीवाली नजदीक आते ही मन घर जाने को करने लगता है। परिवार के लोग भी खुश हो जाते हैं। इस बहाने पुराने संगी-साथियों से भी मुलाकात हो जाती है।




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