जनता पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डालने वाला बजट पेश होने के बाद अब हालात बदल गए हैं।
पिछले दो महीनों में रोज़-मर्रा की ज़रूरतों के सामानों में हुई मूल्य-वृद्धि ने सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी है।
ताज़ा आँकड़ों के मुताबिक महँगाई दर पिछले लगभग साढ़े तीन साल के सर्वोच्च स्तर पर है।
इस मामले पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अगुआई में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) पहले ही आंदोलन छेड़ने की घोषणा कर चुका है।
वामपंथी भी नाराज़
ख़ुद यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दलों ने भी बढ़ती महँगाई को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि सरकार को इसका राजनीतिक ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ सकता है।
संसद सत्र शुरू होते ही वामपंथी दल न सिर्फ़ सदन के भीतर बल्कि उसके बाहर भी आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।
वाम दलों ने महँगाई पर रोक लगाने में विफलता के मुद्दे पर संसद तक मार्च करने का आहवान किया है।
आरक्षण
उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले की गूँज संसद में भी सुनाई दे सकती है।
अदालत ने क्रीमी लेयर को इसके दायरे से बाहर कर दिया है, जिसका राजनीतिक दल इसका विरोध कर रहे हैं।
दूसरी ओर यूपीए और ख़ास कर कांग्रेस पार्टी क्रीमी लेयर को छोड़ कर अदालत के फ़ैसले को कुल मिलाकर सरकार की जीत की तरह पेश कर रही है और साथ ही निजी संस्थानों में भी आरक्षण लागू करने की बात कर रही है जिसका मुद्दा ज़ोर शोर से उठ सकता है।
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