नेपाल के पर्यटन मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग ने कहा है कि 10 मई तक किसी भी पर्वतारोही को एवरेस्ट के बेस कैंप से आगे जाने की इजाज़त नहीं दी जाएगी।
मंत्री ने बताया कि चीन के अनुरोध पर यह क़दम उठाया गया है।
चीन ने अगस्त में होने वाले बीजिंग ओलंपिक की मशाल को एवरेस्ट की चोटी तक ले जाने की योजना बना रखी है।
तिब्बती विद्रोह की 49 वें सालगिरह से शुरू हुए प्रदर्शनों के दौर से चीन चिंतित है। उसे लगता है कि एवरेस्ट पर मशाल ले जाने के दौरान विरोध कर रहे तिब्बती भी वहाँ पहुँच सकते हैं.
फैलता विरोध, बढ़ती चिंता
चीन एक तरफ़ ओलंपिक खेलों की तैयारियों में जुटा है तो दूसरी तरफ़ तिब्बत क्षेत्र की राजधानी ल्हासा में बौद्ध भिक्षुओं ने अपना आंदोलन तेज़ कर दिया है।
तिब्बती शरणार्थी भारत और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों में भी प्रदर्शन कर रहे हैं। कहीं उन्हें बलपूर्वक तितर-बितर किया जा रहा है तो कहीं हिरासत में लिया जा रहा है।
इस बीच नेपाली राजधानी काठमांडू में पुलिस ने तिब्बती शरणार्थियों की एक सभा पर चालू सप्ताह में दूसरी बार बलप्रयोग किया।
प्रत्यक्षदर्शिंयों ने बताया कि सभा में रही बौद्ध भिक्षुणियों पर भी लाठी बरसाने में पुलिस ने कोई परहेज़ नहीं किया।
नेपाली पर्यटन मंत्री ने समाचार एजेंसी रायटर से कहा कि चीन के आग्रह पर 10 मई तक एवरेस्ट की चढ़ाई रोक दी गई है।
उन्होंने कहा, "ऐसा इसलिए किया गया है ताकि जब वे मशाल लेकर चोटी पर जाएँ तब कोई घुसपैठ कर उसमें व्यवधान न पैदा कर सके।"
अभी तक चीन ने मशाल को एवरेस्ट पर ले जाने की तारीख़ तय नहीं की है लेकिन ख़बर है कि अप्रैल के अंत या मई की शुरुआत में यह यात्रा हो सकती है।
वैसे मई महीने को 8,848 मीटर की ऊंचाई वाली दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है।
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