हनैन्सी पलोसी ने ये विचार धर्मशाला में निर्वासित तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के साथ मुलाकात के बाद एक सभा में व्यक्त किए हैं। पलोसी के साथ प्रतिनिधि सभा के नौ अन्य सदस्य भी हैं।
इससे पहले अमरीका की विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने चीन के नेताओं से अनुरोध किया था कि वे तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के साथ बातचीत शुरु करें।
उधर तिब्बत में प्रदर्शनों के बाद बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती जारी है। गान्सु प्रांत की राजधानी में चारो ओर सुरक्षाबलों के नाके लगे हैं।
तिब्बत में प्रदर्शन 10 मार्च को शुरु हुए थे जब दुनिया भर में रह रहे तिब्बतियों ने चीनी शासन के ख़िलाफ़ विद्रोह की 49वीं वर्षगाँठ मनाई थी।
चीन ने गुरुवार को पहली बार स्वीकार किया है कि सुरक्षाबलों ने तिब्बती प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाई थी।अमरीका तिब्बतियों के साथ'
नैन्सी पलोसी ने धर्मशाला में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा - "यदि दुनिया में आज़ादी चाहने वाले लोग चीन के दमनचक्र की बारे में और तिब्बत के बारे में अब भी बात नहीं करते, तो हमें विश्व में कहीं भी मानवाधिकारों के बारे में बात करने का अधिकार नहीं होगा।"
उनका कहना था कि इस दुखद समय में अमरीका तिब्बत के लोगों के साथ है। उन्होंने ये भी कहा कि दुनिया में जो लोग भी आज़ादी की कदर करते हैं उन्हें इस समय अपनी आवाज़ बुलंद करनी चाहिए। उनका ये भी कहना था कि वे 'इस चुनौती का सामना करने के लिए तिब्बतियों के साथ हैं।'
उनका कहना था कि ये पता चलना चाहिए कि तिब्बत में क्या हो रहा है और ये ज़रूरी है कि दुनिया के सामने सच आए।
हालाँकि नैन्सी पलोसी की यात्रा प्रदर्शनों से कई हफ़्ते पहले ही तय हो गई थी दलाई लामा के समर्थक नैन्स पलोसी की इस यात्रा को अमरीका की ओर से मिल रही सहानुभूति के तौर पर देख रहे हैं।
अन्य पर्यवेक्षक नैन्सी पलोसी के विचारों को तिब्बत में प्रदर्शनकारियों के लिए एक प्रमुख अमरीकी नेता की हिमायत के तौर पर देख रहे हैं।
चीन नैन्स पलोसी की दलाई लामा के साथ मुलाक़ात का विरोध कर चुका है और माना जा रहा है कि चीन की सरकार की उनकी इस यात्रा पर नजर है।
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