परमाणु समझौते के मुद्दे पर घटक दलों के बीच सहमति बनाने और सरकार के भविष्य को सुरक्षित रखने की दृष्टि से ये बैठक ख़ासी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इससे पहले शनिवार को भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा था कि वो यूपीए सरकार और वामपंथी दलों के बीच भारत-अमरीका परमाणु समझौते के मुद्दे पर सहमति बनने को लेकर आशान्वित हैं।
हालांकि वामदल अब भी इस समझौते के कुछ प्रावधानों से सहमत नहीं हैं और इसका विरोध कर रहे हैं।
विदेशमंत्री ने उम्मीद जताई कि जल्द ही वामपंथी दलों और यूपीए सरकार के बीच परमाणु समझौते संबंधी मतभेद सुलझा लिए जाएंगे।
उनका कहना था कि इस दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं और वो वामपंथी दलों के साथ लगातार संपर्क में हैं।
ग़ौरतलब है कि अमरीका के साथ परमाणु समझौते का वामदल यह कहते हुए विरोध करते रहे हैं कि इससे देश की संप्रभुता को ख़तरा है और अमरीका का इस समझौते पर रवैया पक्षपातपूर्ण है।
विदेशमंत्री इसी महीने की 23 तारीख को अमरीका की यात्रा पर जा रहे हैं और जानकारों का मानना है कि इस यात्रा से पहले विदेशमंत्री समझौते की अड़चनें कम करना चाहते हैं।
जानकारों की मानें तो विदेशमंत्री अपनी अमरीका यात्रा से पहले इस बात की पूरी कोशिश करेंगे कि केंद्र सरकार के घटक दलों और बाहर से समर्थन दे रहे वामदलों के बीच समझौते पर सहमति बन जाए।
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