नई दिल्ली। अन्ना हजारे को प्रधानमंत्री द्वारा पत्र लिखकर जवाब देने के बाद कांग्रेस अब उन्हें बेवजह नाराज नहीं करना चाहती। कांग्रेस का कहना है कि जब प्रधानमंत्री ने अन्ना के पत्र के जवाब में उन्हें चिट्ठी लिख दी है, अब आगे किसी तरह के पत्र या संवाद की जरूरत नहीं है। पार्टी महासचिव जनार्दन द्विवेदी की ओर से यह बयान कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह की बुधवार को अन्ना को लिखी गई दूसरी चिठ्ठी के बाद आया है। पत्र में दिग्विजय ने अन्ना को संघ के समर्थन का उल्लेख है।
जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि, ‘अन्ना हजारे को प्रधानमंत्री की ओर से लिखे गए पत्र के बाद अब उनसे किसी तरह के पत्र या संवाद की जरूरत नहीं है।’ वे दिग्विजय की ओर से लिखे गए पत्र पर पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे। अन्ना को आरएसएस भाजपा के समर्थन पर पूछे गए सवाल के जवाब में मीडिया प्रकोष्ठ के चेयरमैन ने कहा कि भाजपा और संघ के लोगों ने खुद बार बार यह कहा है कि वह उन्हें सहयोग कर रहे हैं।
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पार्टी अपनी ओर से पूरे मामले को तूल नहीं देना चाहती। पार्टी अन्ना और उनकी टीम के हर एक्शन को देखने के बाद ही जवाब देने के पक्ष में है। दरअसल कांग्रेस पांच राज्यों में आसन्न चुनाव को देखते हुए अन्ना को जितना संभव हो साधे रखना चाहती है। पार्टी ने महाराष्ट्र से जुड़े नेताओं के जरिए उनसे लगातार संपर्क भी बनाए रखा है। अन्ना को यह समझाने की कोशिश सत्ताधारी दल करता रहा है कि वह उनके उठाए हर मुद्दे का सम्मान करती है। लेकिन कुछ सियासी मजबूरियां भी हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस अन्ना मामले में बहुत फूंक फूंक कर कदम रख रही है। पार्टी ने हिसार चुनाव में अन्ना टीम के शिरकत करने के बाद चुनाव मैदान में अन्ना और उनके साथियों का संघ से जुड़ाव का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। वहीं मुखर रूप से दिग्विजय सिंह भी अपनी बात कहते रहे।
पार्टी चुपचाप अन्ना और उनकी टीम पर अपने नेताओं की ओर से सियासी हमले को देखती रही। यही नहीं पार्टी के आधिकारिक फोरम से भी दिग्विजय सिंह के पत्र और उनके मुद्दों पर मौन समर्थन दिखाई पड़ा। चुप्पी टूटी भी तो इस तरह कि प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि लोग यह सवाल उठा रहे है कि अन्ना और उनकी टीम की लड़ाई भ्रष्टाचार से है या फिर एंटी कांग्रेस की मुहिम है।
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