नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने बहुचर्चित शिवानी भटनागर हत्याकांड में पूर्व आईपीएस अधिकारी रविकांत शर्मा को बरी कर दिया। शर्मा के अलावा दो अन्य को भी अदालत ने बरी कर दिया। हत्याकांड के चौथे आरोपी प्रदीप शर्मा की उम्र कैद की सजा बरकरार रखी गई। मामले में निचली अदालत ने चारों आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील पर बुधवार को फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति बीडी अहमद और न्यायमूर्ति मनमोहन सिंह की खंडपीठ ने कहा कि आरके शर्मा, श्रीभगवान शर्मा और सत्य प्रकाश को संदेह का लाभ मिला है , प्रदीप की दोषी होने की पुष्टि होती है। प्रदीप शर्मा की सजा को बरकरार रखते हुए अदालत ने कहा कि हालांकि शिवानी की हत्या की मंशा स्पष्ट नहीं होती लेकिन यह सवाल उठता है कि क्या प्रदीप शर्मा ने स्वयं कार्रवाई की या आरके शर्मा या अन्य लोगों के कहने पर।
अदालत के समक्ष जो कागजात हैं उनके आधार पर अदालत इन सवालों का जवाब नहीं दे सकती। न्यायमूर्ति अहमद और न्यायमूर्ति सिंह ने कहा, ‘आम लोगों की तरह न्यायाधीशों की भी शंकाएं होती हैं लेकिन जज अपने निष्कर्ष पर पहुंचने को स्वतंत्र हैं। महज शंका के आधार पर किसी को सजा नहीं दी जा सकती।’ चौरासी पन्नों के फैसले में अदालत ने कहा कि सरकारी पक्ष आरके शर्मा और पत्रकार शिवानी के हत्यारे के बीच की कड़ी साबित करने में विफल रही है। फोन कॉल के बारे में पेश रिकॉर्ड के साथ भी छेड़छाड़ किया गया है।
लिहाजा, अदालत इस पर भरोसा नहीं कर सकती। कोर्ट ने कहा, ‘हालांकि शिवानी भटनागर की हत्या की मंशा साफ नहीं है, लेकिन इस संबंध में अदालत की नजर में आए वैज्ञानिक सबूत और परिस्थितिजन्य कारणों से साफ है कि प्रदीप शर्मा ने ही शिवानी भटनागर की हत्या की।’ आरके शर्मा को बरी करने की मांग करते हुए उनके वकील ने दलील दी थी कि टेलीफोन कॉल के रिकॉर्ड और उस दौरान इस श्रृंखला की कई कड़ियां गुम हैं। उनके मुवक्किल को फंसाने के लिए रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की गई है।
सरकारी वकील पवन शर्मा ने बचाव पक्ष की दलील को खारिज करते हुए कहा कि आरोपी ने अपने उच्च पद का लाभ लेते हुए गवाहों को प्रभावित किया जिससे अभियोजन पक्ष के 43 गवाह मुकर गए। अभियोजन पक्ष के अनुसार पूर्व आईपीएस अधिकारी आरके शर्मा ने शिवानी को कुछ गोपनीय दस्तावेज दिए थे। शिवानी उन दस्तावेजों को सार्वजनिक करना चाहती थी जिससे उसकी हत्या की गई।
जस्टिस बीड़ी अहमद और जस्टिस मनमोहन सिंह की बेंच ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील पर सुनवाई पूरी कर 21 दिसंबर 2010 को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। आरके शर्मा सहित तीन अन्य लोग लगभग 10 सालों से तिहाड़ में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार शिवानी भटनागर की 23 जनवरी 1999 को पूर्वी दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन स्थित नवकुंज अपार्टमेंट में हत्या कर दी गई थी।

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ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील पर बुधवार को फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति बीडी अहमद और न्यायमूर्ति मनमोहन सिंह की खंडपीठ ने कहा कि आरके शर्मा, श्रीभगवान शर्मा और सत्य प्रकाश को संदेह का लाभ मिला है , प्रदीप की दोषी होने की पुष्टि होती है। प्रदीप शर्मा की सजा को बरकरार रखते हुए अदालत ने कहा कि हालांकि शिवानी की हत्या की मंशा स्पष्ट नहीं होती लेकिन यह सवाल उठता है कि क्या प्रदीप शर्मा ने स्वयं कार्रवाई की या आरके शर्मा या अन्य लोगों के कहने पर।
अदालत के समक्ष जो कागजात हैं उनके आधार पर अदालत इन सवालों का जवाब नहीं दे सकती। न्यायमूर्ति अहमद और न्यायमूर्ति सिंह ने कहा, ‘आम लोगों की तरह न्यायाधीशों की भी शंकाएं होती हैं लेकिन जज अपने निष्कर्ष पर पहुंचने को स्वतंत्र हैं। महज शंका के आधार पर किसी को सजा नहीं दी जा सकती।’ चौरासी पन्नों के फैसले में अदालत ने कहा कि सरकारी पक्ष आरके शर्मा और पत्रकार शिवानी के हत्यारे के बीच की कड़ी साबित करने में विफल रही है। फोन कॉल के बारे में पेश रिकॉर्ड के साथ भी छेड़छाड़ किया गया है।
लिहाजा, अदालत इस पर भरोसा नहीं कर सकती। कोर्ट ने कहा, ‘हालांकि शिवानी भटनागर की हत्या की मंशा साफ नहीं है, लेकिन इस संबंध में अदालत की नजर में आए वैज्ञानिक सबूत और परिस्थितिजन्य कारणों से साफ है कि प्रदीप शर्मा ने ही शिवानी भटनागर की हत्या की।’ आरके शर्मा को बरी करने की मांग करते हुए उनके वकील ने दलील दी थी कि टेलीफोन कॉल के रिकॉर्ड और उस दौरान इस श्रृंखला की कई कड़ियां गुम हैं। उनके मुवक्किल को फंसाने के लिए रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की गई है।
सरकारी वकील पवन शर्मा ने बचाव पक्ष की दलील को खारिज करते हुए कहा कि आरोपी ने अपने उच्च पद का लाभ लेते हुए गवाहों को प्रभावित किया जिससे अभियोजन पक्ष के 43 गवाह मुकर गए। अभियोजन पक्ष के अनुसार पूर्व आईपीएस अधिकारी आरके शर्मा ने शिवानी को कुछ गोपनीय दस्तावेज दिए थे। शिवानी उन दस्तावेजों को सार्वजनिक करना चाहती थी जिससे उसकी हत्या की गई।
जस्टिस बीड़ी अहमद और जस्टिस मनमोहन सिंह की बेंच ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील पर सुनवाई पूरी कर 21 दिसंबर 2010 को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। आरके शर्मा सहित तीन अन्य लोग लगभग 10 सालों से तिहाड़ में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार शिवानी भटनागर की 23 जनवरी 1999 को पूर्वी दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन स्थित नवकुंज अपार्टमेंट में हत्या कर दी गई थी।
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