Monday, June 23, 2008

Webinfosys's Hindi News : ई-कचरे के बढ़ते ख़तरों पर सम्मेलन

इंडोनेशिया के बाली द्वीप में इलेक्ट्रानिक और कंप्यूटर कचरा प्रबंधन पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सोमवार से शुरू हो रहा है जिसमें इसके ख़तरों से आगाह किया जाएगा।

इस सम्मेलन में लगभग 170 देशों के मंत्री हिस्सा लेंगे और इसमें इलेक्ट्रानिक और कंप्यूटर कचरे यानी ई-कचरे से निपटने के लिए एक नई सलाहकार समिति भी गठित की जा सकती है।

सम्मेलन में एक नीति पर भी चर्चा होगी ताकि मेडिकल, केमिकल और कंप्यूटर के नुक़सानदेह कचरे से सुरक्षित तरीके से निपटा जा सके।

हांगकांग स्थित बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ग्रीनपीस नामक संगठन अमरीकी कंप्यूटर कचरे को चीन भेजने के विरोध में अभियान चला रहा है।

चीन में मजदूर अपने स्वास्थ्य को ख़तरे में डाल कर कंप्यूटर सर्किट बोर्डों को गलाते हैं ताकि उनसे बहुमूल्य धातु निकाल सके।

इस बैठक में उन 170 देशों के मंत्री शामिल होंगे जिन्होंने कचरा प्रबंधन पर संयुक्त राष्ट्र के बेसल समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

बेसल समझौता

ग्रीनपीस के एडवर्ड चेन का कहना, ''चीन ने भी उस बेसल समझौते को स्वीकार किया है जो नुकसानदेह कचरे को नियंत्रित करता है।''

उन्होंने कहा, ''हम हांगकांग में इस समस्या पर प्रकाश डालने के लिए अभियान चला रहे हैं क्योंकि इस पर बेसल समझौते के तहत ही नियंत्रण रखा जा सकता है।''

उनका कहना था, ''चीन में इस कचरे के आयात पर प्रतिबंध है लेकिन ई-कचरा अक्सर हांगकांग से तस्करी के माध्यम से चीन पहुँचता है।''

एडवर्ड चेन ने बताया,'' हांगकांग में ई-कचरे के ख़िलाफ़ कानून है लेकिन इसमें सर्किट बोर्ड शामिल नहीं किए गए हैं। यही वजह है कि तस्करी के माध्यम से इन्हें बड़ी मात्रा में दक्षिण चीन पहुँचा दिया जाता है।''

उनका कहना था कि हमारी समझ से पिछले 10 साल से हांगकांग देश ई-कचरे को भेजने का माध्यम बना हुआ है।

बेसल समझौता तो 16 साल पुराना है लेकिन अभी इसमें काफ़ी काम किया जाना बाकी है।

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