Friday, June 20, 2008

Webinfosys's Hindi News : 'युद्ध में हथियार न बने बलात्कार'

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एकमत से कहा है कि युद्ध में बलात्कार का हथियार की तरह इस्तेमाल रोका जाना चाहिए क्योंकि इससे विश्वशांति को ख़तरा हो सकता है।

इस पर सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव रखा गया था जिस पर सभी ने सहमति दी।

इस प्रस्ताव में विवरण दिए गए हैं कि किस तरह बलात्कार को सोची समझी रणनीति में शामिल करने से अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा पैदा हो रहा है।

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने कहा कि कुछ ऐसे समाज जो अभी विवाद से उबर रहे हैं वहाँ 'महिलाओं की स्थिति अकथनीय' है।

संयुक्त राष्ट्र एक जाँच समिति भी बना रहा है जो अगले साल जून में इस बात की रिपोर्ट देगा कि यह समस्या कितनी बड़ी है और इससे किस तरह निपटा जा सकता है।

मानवाधिकार संगठनों ने इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक बताया है।

हथियार

चाहे वह पश्चिमी सूडान में दारफ़ूर का विवाद हो या फिर कांगो का, रवांडा हो या फिर लाइबेरिया, हर जगह महिलाओं के साथ बलात्कार होता है, जीतने के लिए या फिर धमकाने के लिए।

कई बार तो महिलाओं के साथ वो शांति सैनिक बलात्कार करते हैं जिनका काम उनको सुरक्षा देना होता है।
कांगो में तो हर रोज़ 40 महिलाओं के साथ बलात्कार होता है.

यह पहली बार है कि संयुक्त राष्ट्र ने स्वीकार किया है कि बलात्कार का उपयोग युद्ध में हथियार की तरह किया जाता है।

और यह भी कि इससे विश्व शांति को ख़तरा हो सकता है।

जब इस प्रस्ताव को तैयार करते हुए चर्चा चल रही थी तो चीन, रूस, इंडोनेशिया और वियतनाम सभी ने हिचकिचाहट दिखाते हुए पूछा था कि क्या सचमुच बलात्कार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का मसला है?

जिन देशों में विद्रोह की स्थिति बनी हुई है उनको डर था कि इसके बाद संयुक्त राष्ट्र यौन हिंसा के मामलो की जाँच करने लगेगा।

लेकिन इस पर चर्चा का अंत सर्वसम्मति पर हुआ।

ख़ामोश युद्ध

यह प्रस्ताव अमरीका ने रखा था और इसे सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यों ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया।

इस प्रस्ताव में कहा गया है, "यौन हिंसा एक ऐसी रणनीति है जो अपमानित करने, दबदबा क़ायम करने, डर पैदा करने, बिखराव पैदा करने और किसी समुदाय या जाति विशेष के लोगों को ज़बरदस्ती विस्थापित करने के लिए उपयोग में लाई जाती है।"

प्रस्ताव में कहा गया है कि इस तरह की हिंसा 'सशस्क्ष संघर्ष को बढ़ा सकता है और इससे विश्व में शांति और सुरक्षा क़ायम रखने में बाधा पहुँचा सकती है।'

सुरक्षा परिषद में इस बहस में हिस्सा लेते हुए बान की मून ने कहा, "महिलाओं और लड़कियों के ख़िलाफ़ इस ख़ामोश युद्ध से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नेताओं की ज़रुरत है।"

इस प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने की।

उन्होंने कहा कि अब दुनिया को समझ में आ रहा है कि यौन हिंसा न केवल महिलाओं के स्वास्थ्य को नुक़सान पहुँचाती है बल्कि यह देश की राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता पर भी विपरीत असर डालती है।

इस प्रस्ताव को एक बड़ा सांकेतिक क़दम माना जा रहा है।

इसका अगला चरण महत्वपूर्ण होगा जब अगले साल जून में दुनिया भर में इस तरह की घटनाओं की रिपोर्ट आएगी और इससे निपटने के लिए उपाय सुझाए जायेंगे ।


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