मेजर जनरल जैफ़री शलोएसर का कहना है कि विद्रोही आर्थिक विकास को बाधित करने के मक़सद से अपने लक्ष्य का चयन कर रहे हैं।
उनकी ये टिप्पणी तब आई है जब नान्गरहार प्रांत में बारूदी सुरंग से किए गए हमले में एक नैटो सैनिक मारा गया।
उधर पाकिस्तान के साथ सटे अफ़ग़ानिस्तान के इलाक़ों में हुए नैटो के हमलों में 14 विद्रोही मारे गए। इससे पहले पाकटिया प्रांत में अफ़ग़ान पुलिस और विद्रोहियों के बीच झड़पें हुई थीं।
मेजर जनरल शलोएसर का कहना था कि पाकिस्तान की सीमा के साथ लगते इलाक़ों में होने वाले विद्रोहियों के हमले कुल हमलों का 12 प्रतिशत थे।
'शरण मिलती है, आज़ादी से घूमते हैं'
इस क्षेत्र में अप्रैल से अब तक अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद गठबंधन सेनाओं के 40 सदस्य - सैनिक और उनसे जुड़े नागरिक - मारे गए हैं।
अमरीकी सैन्य कमांडर ने तालेबान और अल क़ायदा के अफ़ग़ान और पाकिस्तानी सदस्यों को इन हमलों के लिए ज़िम्मेदार ठहराया है।
वाशिंगटन में रिपोर्टरों से वीडियो लिंक के ज़रिए बात करते हुए उन्होंने कहा, "दुश्मनों को शरण मिल रही है और वह सीमांत इलाक़ों में कुछ आज़ादी से घूम-फिर रहे हैं। दुश्मन उग्र तरीक़े से स्कूलों को आग लगा रहे हैं, शिक्षकों और विद्यार्थियों को जान से मार रहे हैं।"
उनका कहना था, "अगर पूरी स्थिति पर नज़र डालें तो आपको दिखाई देगा कि जानबूझकर उन सभी गतिविधियों को निशाना बनाया जा रहा है जिन से आम अफ़ग़ान नागरिक के जीवन का स्तर बेहतर होता है।"
हाल के दिनों में अमरीका के पाकिस्तान के साथ रिश्ते कुछ ख़राब हुए हैं। ऐसा तब से हुआ है जब से पाकिस्तान को 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ जंग' में अहम साथी मानने वाले अमरीका ने पाकिस्तान पर सरहदी इलाक़ों में सक्रिय चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का दबाव बढ़ाया है।
उधर पाकिस्तान ने जून की अमरीकी हवाई कार्रवाई की निंदा की थी जिसमें उसके 11 सैनिक मारे गए थे।
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