कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अगुआई में हुई इस बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी, गृह मंत्री शिवराज पाटिल और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) और वाम दलों के बीच अमरीका के साथ प्रस्तावित परमाणु समझौते पर कोई सहमति नहीं बनने के तुरंत बाद ये बैठक शुरु हो गई।
समाचार एजेंसियों के मुताबिक बैठक में ज़ोर दिया गया कि वाम दलों के विरोध के बावजूद सरकार अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ सुरक्षा मापदंडों से संबंधित समझौते पर आगे बढ़े।
समाचार एजेंसी यूएनआई के मुताबिक प्रधानमंत्री जहाँ समझौते पर आगे बढ़ने के पक्ष में हैं, वहीं सोनिया गांधी भी इसका समर्थन करती हैं लेकिन वह कम से कम यूपीए के घटक दलों को साथ लेकर चलना चाहती है।
ग़ौरतलब है कि यूपीए में शामिल राष्ट्रीय जनता दल, लोक जनशक्ति पार्टी, डीएमके, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और अन्य दलों के नेताओं से सोनिया गांधी पिछले कुछ दिनों में मिल चुकी हैं।
यूपीए के अधिकतर घटक दल परमाणु समझौते के पक्ष में हैं। हलाँकि कुछ दलों का ये भी कहना है कि समझौता महत्वपूर्ण है लेकिन इस मुद्दे पर ऐसी स्थिति पैदा नहीं हो जिसमें सरकार गिर जाए।
ग़ौरतलब है कि वाम दल अमरीका के साथ प्रस्तावित असैनिक परमाणु समझौते का विरोध करते आए हैं और इस दिशा में आगे बढ़ने पर सरकार से समर्थन वापस लेने की धमकी दे चुके हैं।
बेनतीजा रही बैठक
इससे पहले भारत-अमरीका परमाणु सहयोग समझौते के मुद्दे पर यूपीए और वामदलों की बुधवार को हुई नौवीं बैठक एक बार फिर बिना किसी नतीजे के ख़त्म हो गई ।विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने बैठक में भाग लेने के बाद कहा कि अगली बैठक जल्द होगी और उसमे समिति अपनी सिफारिशें रखेगी।
विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी और सीपीएम नेता सीताराम यचुरी ने लगभग डेढ घंटे चली बैठक के बाद चार वाक्यों का एक बयान पढा कि दोनों पक्षों ने अपनी अपनी बात रख दी है और इस मसले पर एक और बैठक होगी जिसकी तारीख़ अभी तय नही है।
इस बैठक के बाद जो कहा गया उससे महत्वपूर्ण वो है जो नहीं कहा गया और जो नहीं कहा गया वो ये की वामपंथी पार्टियों ने एक लिखित नोट सरकार को दे दिया है जिसमें उन्होंने साफ़तौर पर कह दिया है की सरकार अतंरराष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी के साथ क़रार पर हस्ताक्षर ना करे वरना वो सरकार से समर्थन वापस ले लेगें, और इसमे कोई नई बात नही है।
जहाँ तक सरकार की बात है उसने वामपंथी पार्टियों को कहा है की भारत अमरिका परमाणु समझौते पर आगे बढने के अलावा कोई विकल्प नही है, हालाँकि इससे पहले वो यूपीए के घटकदलों को ये अहसास कराना चाहती है की उसने वामदलों को साथ रखने की पूरी कोशिश की।
वामदलों के साथ बैठक के बाद विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात की और ख़बर है की प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आगामी शुक्रवार को मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई है।
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