'ब्रीदिंग' नाम का यह स्मारक बीबीसी के मुख्यालय ब्रॉडकास्टिंग हाउस की छत पर स्थापित किया गया है।
यह एक रोशनी का एक स्तंभ है जिसकी ऊँचाई 32 फ़ुट है। इसका प्रकाश रात को आकाश में एक किलोमीटर तक चमकेगा।
हर रात आधा घंटे यह उस समय रौशन होगी जब बीबीसी का प्रमुख समाचार बुलैटिन प्रसारित होता है। यानी रात दस बजे.
यह स्मारक उन सभी पत्रकारों और उनके साथ काम करने वाले लोगों को समर्पित है, जो अपना काम करते हुए मारे गए, इनमें ड्राइवर हैं और अनुवादक भी।
पिछले दस सालों में औसतन हर हफ़्ते दो ऐसे पत्रकार मारे गए हैं जो युद्ध की रिपोर्टिंग करते हैं, कई अन्य पत्रकार भ्रष्टाचार की रिपोर्टिंग करते हुए मारे गए हैं।
श्रद्धांजलि
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने उन पत्रकारों को श्रद्धांजलि अर्पित की है जो रिपोर्टिंग करते हुए मारे गए।
बान की मून ने कहा, "यह स्मारक उन लोगों की याद में खड़ा किया गया है जिन्होने अपनी जान गवाँ दी जिससे हम तक ख़बर पहुंच सके। लेकिन यह उन पत्रकारों के लिए भी है जो इस समय ख़तरों का सामना कर रहे हैं और रिपोर्टें भेजने के लिए अपनी जान को जोख़िम में डाल रहे हैं।"
इस स्मारक के अनावरण के अवसर पर बीबीसी के महानिदेशक मार्क टॉमसन ने कहा कि समाचार जुटाने का काम दिन पर दिन ख़तरनाक होता जा रहा है। पिछले दस सालों में औसतन हर सप्ताह दो पत्रकार मारे जाते रहे हैं और 90 प्रतिशत मामलों में किसी पर मुक़दमा नहीं चला है।
अनावरण समारोह में उन पत्रकारों के परिजन भी आए थे जो या तो मारे गए या जिनकी हत्या हुई।
इनमें बीबीसी की प्रोड्यूसर केट पेटन के परिवार वाले थे जो 2005 में सोमालिया में मारी गई थीं और कैमरामैन साइमन कम्बर्स के सगे संबंधी भी जो सउदी अरब में मारे गए थे।
इस अवसर पर बीबीसी के वरिष्ठ पत्रकार जॉन सिम्पसन जो वर्ष 2003 में स्वयं एक अमरीकी मिसाइल हमले में मरते-मरते बचे थे उन्होंने जेम्स फ़ैंटन की एक कविता पढ़कर सुनाई।
पूर्व युद्ध रिपोर्टर और कवि जेम्स फ़ैंटन ने यह कविता विशेष तौर पर बीबीसी के लिए लिखी है।
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