बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम की मंगलवार को पहली बरसी है.
इस रैली को 'सावधान रहो-आगे बढ़ो' का नारा दिया गया है.
इस रैली के लिए देश भर के कार्यकर्ता लखनऊ पहुँचे हैं और इसके लिए भारी-भरकम तैयारियाँ की गईं हैं.
संभावना है कि रैली में मुख्यमंत्री मायावती अपने दिवंगत नेता कांशीराम की नाम से हज़ारों करोड़ रुपयों की योजनाओं की घोषणाएँ करेंगी.
माना जा रहा है कि मायावती की कोशिश कांशीराम को बीआर अंबेडकर के समकक्ष खड़ा करने की है.
जबकि कुछ लोग इसे लोकसभा चुनाव की तैयारी के रुप में देख रहे हैं.
रैली की तैयारियाँ
इस रैली के लिए 65 करोड़ रुपए खर्च करके एक नया मैदान तैयार किया गया है.
हवाई अड्डे के पास तैयार किए गए इस मैदान को रमामाई अंबेडकर मैदान का नाम दिया गया है.
अनुमान है कि रैली में हिस्सा लेने के लिए कई लाख लोग पहुँचे हैं.
रैली में लोगों को लाने के लिए राज्य की सरकारी बसों को लगाया गया है और निजी ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि उनकी भी बसें इसके लिए ले ली गई हैं.
मैदान चूँकि नया है और शहर से कुछ दूर है इसलिए वहाँ पहले से पहुँच गए लोगों को खाने और पानी की दिक़्कत का सामना करना पड़ा है.
रैली में आने वाले लोगों की परेशानी कम करने के लिए लखनऊ के चारबाग़ स्टेशन को 'नो ट्रैफ़िक ज़ोन' घोषित कर दिया गया है. इससे आम लोगों को परेशानी हो रही है.
मंशा
संभावना है कि रैली में मायावती कांशीराम के नाम से हज़ारों करोड़ रुपयों की परियोजनाओं की घोषणाएँ करेंगी.
इसमें स्कूल, आवासीय योजना, अस्पताल से लेकर से लेकर टेक्नॉलॉजी इंस्टिट्यूट खोलने तक कोई दस योजनाएँ शामिल हैं. उत्तर प्रदेश के कई शहरों में शुरु होने जा रही इन परयोजनाओं को शुरु करके उनका शिलान्यास आज ही किया जाना है.
इसके अलावा मायावती कांशीराम के नाम से खेल के एक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार की स्थापना की घोषणा करने वाली हैं.
कई राजनीतिक विश्लेषकों को लगता है कि मायावती अपने दिवंगत नेता कांशीराम को बीआर अंबेडकर के समकक्ष खड़ा करना चाहती हैं.
जबकि कुछ लोग मानते हैं कि वे कांशीराम को अंबेडकर से भी ऊपर स्थापित करने की कोशिश कर रही हैं.
अपने चार महीने के कार्यकाल में मायावती ने केंद्र सरकार से उत्तरप्रदेश के विकास के लिए 80 हज़ार करोड़ माँगे हैं और अब वे लोगों को बता रही हैं कि केंद्र से पैसे मिल नहीं रहे हैं.
इससे संकेत मिल रहा है कि मायावती अपने लोगों को बताने में लगी हुई हैं कि यदि विकास चाहिए तो दिल्ली की गद्दी तक पहुँचना ज़रूरी है.
केंद्र में यूपीए और वामपंथी दलों के बीच परमाणु समझौते को लेकर चल रही खींचतान के चलते भी लग रहा है कि मायावती लोकसभा चुनाव की तैयारी में लग गई हैं.
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