Monday, October 15, 2007

Webinfosys's Hindi News : चरमपंथ दोबारा नहीं पनप सकता: बादल

भारत में पंजाब राज्य के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने लुधियाना में हुए बम धमाके के सिलसिले में ज़ोर देकर कहा है कि राज्य में चरमपंथ के दोबारा पनपने की कोई संभावना नहीं है.

रविवार की रात पंजाब के लुधियाना शहर के एक सिनेमाघर में हुए धमाके में छह लोग मारे गए और 35 अन्य घायल हो गए. इसके बाद राज्य में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है.
पंजाब के पुलिस महानिदेशक एनपीएस ऑलक ने बताया था कि राज्य में सुरक्षाबलों को अलर्ट कर दिया गया है. उन्होंने ऐसी संभावना व्यक्त की थी कि यह एक चरमपंथी घटना हो सकती है.

उधर केंद्रीय गृह मंत्री मधुकर गुप्ता का कहना है कि स्थानीय प्रशासन और जनता को भीड़-भाड़ वाली जगहों पर सतर्क रहना चाहिए और सुरक्षा के पर्याप्त इंतज़ाम करने पड़ेंगे.

दूसरी ओर केंद्रीय गृह राज्यमंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा है कि केंद्र सरकार पंजाब सरकार से इस घटना पर विस्तृत रिपोर्ट आने का इंतज़ार कर रही है.


'जनसमर्थन ही नहीं'


सोमवार सुबह पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने लुधियाना का दौरा किया है और स्थानीय अस्पताल जाकर घायल लोगों से मुलाकात की है.

पत्रकारों के सवाल करने पर उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस घटना से कतई ये संकेत नहीं मिलता कि पंजाब में चरमपंथ दोबारा पनप सकता है या इसकी कोई संभावना है.
उनका कहना था, "चरमपंथ के पनपने के लिए जन-समर्थन की ज़रूरत होती है लेकिन पंजाब में एक या फिर 0.5 प्रतिशत जनता भी ऐसा नहीं चाहती. पंजाब में चरमपंथ दोबारा पनप ही नहीं सकता."

मुआवज़ा


पंजाब के मुख्यमंत्री ने हर मृतक व्यक्ति के परिजन के लिए दो लाख रुपए के मुआवज़े की घोषणा की है.
उधर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ओर से पहले ही हर मृतक व्यक्ति के परिजनों के लिए एक लाख रुपए और हर घायल व्यक्ति के लिए 50 हज़ार रुपए के मुआवज़े की घोषणा की जा चुकी है.
जब सिनेमा हॉल में धमाका हुआ तब वहाँ भोजपुरी फ़िल्म 'जनम जनम का साथ' दिखाई जा रही थी.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार फ़िल्म देखने वाले अधिकतर लोग भोजपुरी बोलने-समझने वाले बिहार-उत्तर प्रदेश के लोग थे.
पंजाब के उद्योग का केंद्र कहे जाने वाले लुधियाना शहर में लगभग बीस लाख लोग बिहार और उत्तर प्रदेश से हैं जो विभिन्न कारखानों में काम करते हैं.
पंजाब में जब 1980 और 90 के दशक में चरमपंथी सक्रिय थे तब कुछ गुटों और कट्टरपंथी नेताओं ने स्थानीय लोगों और अन्य राज्यों से पंजाब आकर काम करने वाले लोगों के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश की थी लेकिन ये कोशिशें नाकाम रही थीं.




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