Tuesday, October 9, 2007

Webinfosys's Hindi News : परमाणु समझौते पर अहम बैठक

भारत-अमरीका परमाणु समझौते को लेकर यूपीए और वामपंथी दलों के बीच बढ़ते मतभेद के बीच दिल्ली में समिति की अहम बैठक चल रही है.

यूपीए और वामपंथी दलों के बीच परमाणु समझौते के मतभेदों को दूर करने के लिए बनी समिति की यह चौथी औपचारिक बैठक है.
समिति के संचालक प्रणव मुखर्जी सोमवार को सीपीएम के नेता प्रकाश करात और सीताराम येचुरी से इस अनुरोध के साथ मिले थे कि सरकार को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा समिति (आईएईए) से बातचीत करने दिया जाए.
लेकिन सीपीएम नेताओं ने इसे ख़ारिज कर दिया है.
इस बीच आईएईए के प्रमुख अल बारादेई भारत पहुँच चुके हैं.
वे मंगलवार को परमाणु ऊर्जा केंद्र का दौरा करेंगे और फिर बुधवार को उनकी मुलाक़ात प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कई भारतीय अधिकारियों से होनी है.

बढ़ता मतभेद

सोमवार को वामदलों और यूपीए के बीच बढ़ते मतभेदों का एक और उदाहरण सामने आया.
सोमवार को विदेशमंत्री प्रणव मुखर्जी ने सीपीएम के नेता प्रकाश करात और सीताराम येचुरी से मुलाक़ात की.
प्रणव मुखर्जी ने दोनों नेताओं के सामने यह अनुरोध रखा कि सरकार को आईएईए के साथ बातचीत करने दिया जाए.
ख़बरें हैं कि प्रणव मुखर्जी ने आश्वासन दिया था कि सरकार बातचीत के हर पहलू से वामदलों को अवगत करवाती रहेगी.
इसके बाद प्रकाश करात और सीताराम येचुरी ने यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाक़ात की.
आख़िर इन नेताओं ने सरकार का आईएईए से बातचीत करने देने का अनुरोध ठुकरा दिया.
बाद में कांग्रेस कोर समिति की भी एक बैठक सोमवार को हुई.
उधर मंगलवार को अल बरदेई सोमवार को मुंबई पहुँच चुके हैं. वे मंगलवार को भारतीय परमाणु ऊर्जा केंद्र में रहेंगे.
बुधवार को वे दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कई भारतीय अधिकारियों से मिलेंगे.
हालांकि बातचीत के इन दौर को औपचारिक ही बताया जा रहा है.
सीपीआई के महासचिव एबी बर्धन ने बातचीत में कहा है कि सरकार अगर आईएईए से अनौपचारिक बात करती है तो वामपंथी दलों को कोई आपत्ति नहीं है.
उन्होंने कहा, "लेकिन अल बारादेई अपनी तकनीकी टीम लेकर बैठें और भारत सरकार अपने परमाणु विशेषज्ञों के साथ बैठकर यदि बातचीत करेगी तो दिक़्कत होगी."
उन्होंने कहा कि मतभेदों को दूर करने के लिए समिति बनी है और जब तक समिति में बातचीत चल रही है मतभेद दूर होने की संभावना बनी हुई है.
हालांकि इस समिति की पहली तीन बैठकों में कोई नतीजा निकलना तो दूर, मतभेद कम होने का एक भी संकेत नहीं मिला है.




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