भारतीय शेयर बाज़ारों में बुधवार को रिकॉर्ड शुरुआती गिरावट के बाद कुछ सुधार हुआ और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स में 1100 अंकों का सुधार दर्ज किया गया.
गिरावट की रफ़्तार इतनी तेज़ थी कि बाज़ार को एक घंटे के लिए बंद करना पड़ा.
सेंसेक्स के इतिहास में यह अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है.
बाज़ार के जानकारों का मानना है कि भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड यानी सेबी की विदेशी संस्थागत निवेशकों पर सख़्ती के चलते ही बाज़ार में गिरावट का रुख रहा.
राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ़्टी 9.25 फ़ीसदी लुढ़ककर 5143 अंक पर पहुँच गया.
चिंता नहीं
उधर, वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने शेयर धारकों को आश्वस्त किया कि घबराने की फिलहाल कोई ज़रूरत नहीं है.
उन्होंने कहा कि सरकार की पार्टिसिपेट्री नोट्स यानी भागीदारी परिपत्र को प्रतिबंधित करने की मंशा नहीं है और उम्मीद जताई कि दिन गुजरने के साथ-साथ बाज़ार की स्थिति में सुधार आएगा.
उन्होंने कहा, "अगर आप लोग बारीकी से देखेंगे तो पाएँगे कि सेबी और एनएसई में अधिकांश ख़रीदारी विदेशी संस्थागत निवेशक कर रहे हैं."
उन्होंने कहा कि यही वजह रही कि सेबी ने बाज़ार के हित में बाज़ार में सुधार के क़दम उठाए हैं और ये प्रयास दिन भर जारी रहेंगे.
वित्त मंत्री ने कहा कि सेबी के क़दम आम निवेशकों के हित में हैं और इसके दूरगामी परिणाम दिखाई देंगे.
संकेत
मंगलवार को दुनियाभर के शेयर बाज़ारों में मंदी की ख़बरों के बीच इन्फोसिस, हिंदुस्तान लीवर और रिलायंस जैसी ब्लूचिप कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली के कारण सेंसेक्स में हल्की गिरावट रही थी.
कारोबार के दौरान नए रिकॉर्ड बनाने के बावजूद सोमवार की तुलना में सेंसेक्स में सात अंक और निफ़्टी में दो अंक की गिरावट दर्ज की गई थी.
मंगलवार को सेंसेक्स 19051 अंक पर बंद हुआ था, जबकि निफ़्टी 5708 अंक की ऐतिहासिक ऊँचाई छूने के बाद कारोबारी सत्र खत्म होने पर 5668 अंक पर बंद हुआ था.
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