कांग्रेस और केंद्र में सत्तारूढ़ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा है कि अमरीका के साथ परमाणु समझौते का विरोध करने वाले देश के विकास के दुश्मन हैं.
उनकी टिप्पणी इसलिए अहम है कि केंद्र सरकार को बाहर से समर्थन रहे वाम दल परमाणु क़रार को आगे बढ़ाने की दशा में समर्थन वापस लेने की धमकी दे चुके हैं.
सोनिया गांधी ने झज्जर में इंदिरा गांधी सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट का शिलान्यास करने के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "परमाणु समझौते का विरोध करने वाले न केवल कांग्रेस बल्कि शांति और विकास के दुश्मन हैं. हमें उन्हें जवाब देने के लिए हाथ मिलाना चाहिए."
यूपीए अध्यक्ष का कहना था कि भारत की आर्थिक तरक्की जारी रखने के लिए बिजली उत्पादन में भी वृद्धि करना ज़रूरी है.
उन्होंने कहा, "हमें तेज़ आर्थिक विकास के सथ बिजली का उत्पादन भी बढ़ाना है और इसी को ध्यान में रखते हुए अमरीका के साथ परमाणु क़रार किया गया है."
सोनिया गांधी यूपीए सरकार के प्रयासों का ज़िक्र करते हुए कहा कि भारत के सभी इलाक़ों में बिजली की माँग पूरी करने की कोशिश की जा रही है.
ग़ौरतलब है कि केंद्र सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वाम दल परमाणु समझौते का कड़ा विरोध कर रहे हैं और मामले को सुलझाने के लिए एक समिति भी गठित की गई है.
'रामसेतु'
कांग्रेस अध्यक्ष ने 'रामसेतु' की आड़ में सेतुसमुद्रम परियोजना को राजनीतिक मुद्दा बनाने की आलोचना की.
उन्होंने कहा, "कांग्रेस हमेशा से सभी धर्मों का समान रूप से सम्मान करती रही है. हम चाहते हैं कि कोई भी ऐसा काम नहीं किया जाए जिससे लोगों की भावनाएँ आहत हों."
सोनिया गांधी ने इस मामले को शांतिपूर्वक बातचीत के जरिए सुलझाने की अपील की.
सेतुसमुद्रम का मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में है. इस मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया था जब केंद्र सरकार ने अपने हलफ़नामे में कहा था कि राम के अस्तित्व के प्रमाण नहीं है.
Monday, October 8, 2007
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