पाकिस्तान में राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान चल रहा है. हालाँकि इसके नतीजों पर रोक लगा दी गई है क्योंकि मौजूदा राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ की उम्मीदवारी पर अदालत का फ़ैसला आना बाकी है.
चुनाव में पाकिस्तान की संसद के दोनों सदनों और चारों प्रांतीय असेंबलियों के सदस्य भाग ले रहे हैं.
जनरल मुशर्रफ़ के अलावा वजीहुद्दीन अहमद, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के मख़दूम अमीन फ़हीम और फ़रियाल तालपोर चुनाव मैदान में हैं.
सेना प्रमुख रहते राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के विरोध में विपक्षी गठबंधन ऑल पार्टीज़ डेमोक्रैटिक मूवमेंट (एपीडीएम) में शामिल संसद और प्रांतीय असेंबलियों के 164 सदस्यों ने इस्तीफ़ा दे दिया था.
प्रांतीय असेंबलियों और संसद के लगभग 1100 सदस्य राष्ट्रपति चुनाव में मतदान कर सकते हैं जिनमें से दो सौ सदस्य इस्तीफ़ा दे चुके हैं.
शुक्रवार को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि छह अक्तूबर को राष्ट्रपति पद के लिए होने वाला चुनाव पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार हो सकता है मगर परिणामों के लिए इंतज़ार करना होगा.
दरअसल, राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के दो प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएँ दाख़िल की थीं कि परवेज़ मुशर्रफ़ सेनाध्यक्ष रहते हुए यह चुनाव नहीं लड़ सकते.
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसे इन याचिकाओं पर विचार करने के लिए कुछ और समय की ज़रूरत है.
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले के बाद राष्ट्रपति चुनावों के बारे में और भ्रम पैदा हो गया है.
मुशर्रफ़ की मुश्किलें
संभावना जताई जा रही है कि परवेज़ मुशर्रफ़ राष्ट्रीय एसेंबली और प्रांतीय एसेंबलियों में अपने चुनाव के लिए ज़रूरी बहुमत हासिल कर सकते हैं.
मगर संवाददाताओं का कहना है कि अगर परवेज़ मुशर्रफ़ छह अक्तूबर को होने वाले चुनावों में जीत के लिए ज़रूरी बहुमत हासिल भी कर लेते हैं तो भी उनकी हार-जीत का फ़ैसला तब तक नहीं हो सकता जब तक सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर कोई फ़ैसला नहीं सुनाए कि सेनाध्यक्ष पद पर रहते परवेज़ मुशर्रफ़ की उम्मीदवारी संवैधानिक थी या नहीं.
ग़ौरतलब है कि 17 अक्तूबर से मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ दायर याचिकाओं की सुनवाई का काम शुरू होना है. इसके ठीक एक दिन बाद यानी 18 अक्तूबर को पूर्वी प्रधानमंत्री और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) की नेता बेनज़ीर भुट्टो ने स्वदेश लौटने की घोषणा कर रखी है.
सुप्रीम कोर्ट का यह फ़ैसला ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ और पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो के बीच सुलह हो गई है.
समझौते के तहत बेनज़ीर भुट्टो के ख़िलाफ़ चल रहे पुराने मामले वापस ले लिए गए हैं. इसे सत्ता साझीदारी के समझौते की ओर एक अहम क़दम माना जा रहा है.
ऐसी संभावना है कि सुलह समझौते के बाद पीपीपी के सदस्य राष्ट्रपति चुनाव का बहिष्कार नहीं करेंगे.
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