भारत के कई राज्यों से भूमि सुधारों की मांग कर रहे हज़ारों किसानों और आदिवासियों की दिल्ली पहुंची रैली आज संसद मार्च करने वाली है.
ग्वालियर से चल कर 'जनादेश 2007' रैली रविवार को राजधानी दिल्ली पहुंची और अब ये सारे लोग रामलीला मैदान में हैं.
रैली के आयोजकों का कहना है कि अब वो जंतर मंतर पर धरना देंगे और संसद कूच करेंगे.
हालांकि अब तक उन्हें संसद की ओर जाने की अनुमति नहीं मिली है.
रामलीला मैदान में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के नेता एबी बर्धन सहित कई राजनेताओं ने प्रदर्शनकारियों से मुलाक़ात की है.
अपने हक़ की आवाज़ बुलंद करने देश के 18 राज्यों से आए लगभग 22 हजार प्रदर्शनकारी दो अक्तूबर को ग्वालियर से चले थे और अब दिल्ली में है.
हज़ारों लोगों के इस मार्च के दौरान कुछ लोगों की दुर्घटना में मौत भी हो गई लेकिन उनका हौसला कम नहीं हुआ.
रविवार को जब ये मार्च दिल्ली पहुंचा तो लोग "भूख की जंग में, हम सब संग में" जैसे नारे लगा रहे थे.
ये प्रदर्शनकारी छत्तीसगढ़, उड़ीसा, महाराष्ट्रट पंजाब, झारखंड, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश और बिहार जैसे राज्यों से आए हैं.
भूमि सुधार की माँग
जनादेश रैली को आयोजित करने वाले एकता परिषद के अध्यक्ष पीवी राजगोपाल का कहना था कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर विचार नहीं करती उनका प्रदर्शन जारी रहेगा.
ग्वालियर से पैदल ही लगभग 400 किलोमीटर की यात्रा करके दिल्ली पहुँचे इन ग़रीब, आदिवासी और भूमिहीन किसानों किसानों की माँग ज़मीनों से जुड़ी हुई है.
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि भूमि सुधार कानून लागू किया जाएं और वंचितों को उनका हक दिलाने के लिए एक राष्ट्रीय भूमि आयोग का भी गठन किया जाए जो भूमि विवादों का जल्दी निपटारा करे और ज़मीन का दोबारा आवंटन करे.
सरकार ने वादा किया है कि आने वाले दिनों में एक आयोग का गठन किया जाएगा जो भूमि सुधारों पर विचार करेगा.
ग्वालियर से ये लोग महात्मा गांधी के जन्मदिन दो अक्तूबर को निकले थे. इस जनादेश 2007 यात्रा का समर्थन व्यक्त करने के लिए नौ देशों के लगभग 200 विदेशी समाज सेवक भी यात्रा में शामिल थे.
इन प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मुलाक़ात की है और माना जा रहा है कि सोमवार को वो प्रधानमंत्री से भी मिल सकते हैं.
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