कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एचडी कुमारस्वामी सरकार से समर्थन वापस ले लिया है. इसके साथ ही सरकार अल्पमत में आ गई है.
भाजपा संसदीय बोर्ड की शनिवार को राजधानी दिल्ली में हुई बैठक में जनता दल सेक्युलर (जेडएस) के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार से समर्थन वापसी का फ़ैसला किया.
संवाददाताओं को बोर्ड के फ़ैसले की जानकारी देते हुए उपाध्यक्ष यशवंत सिन्हा ने कहा कि जेडीएस ने 20 महीने पहले हुए समझौते का उल्लंघन किया है.
उन्होंने कहा, "मुद्दा सत्ता हस्तांतरण नहीं है. मुद्दा धोखा है. जेडीएस समझौते पर अमल के लिए तैयार नहीं है और उसने हमें धोखा दिया है."
सबक
सिन्हा ने कहा कि इस घटना से पार्टी को सबक मिला है और भविष्य में सावधान रहना होगा.
पार्टी ने कहा कि वह नए जनादेश के लिए तैयार है. सिन्हा ने कहा, "यह 2004 के जनादेश का अपमान है. इसलिए हम चाहते हैं कि नया चुनाव हो. जनता तय करे कि वह राज्य में किसे सत्ता में देखना चाहती है."
यह पूछे जाने पर कि भाजपा क्या भविष्य में किसी दल के साथ गठबंधन सरकार नहीं बनाएगी. सिन्हा ने कहा, "राजनीति में हर तरह की संवैधानिक स्थिति की संभावना बनी रहती है. इसलिए अभी से इस बारे मे कुछ कहना ठीक नहीं है."
भाजपा नेता वेंकैया नायडू ने कहा कि कुमारस्वामी ने भाजपा के साथ धोखा किया है. उन्होंने कहा , "राज्य की जनता जेडीएस को माफ़ नहीं करेगी. ये जनमत का माखौल है."
उल्लेखनीय है कि कर्नाटक में पिछले 20 महीने से भाजपा और जेडीएस की मिलीजुली सरकार चल रही थी और दोनों दलों के बीच हुए समझौते के तहत तीन अक्तूबर को जेडीएस को मुख्यमंत्री का पद भाजपा को सौंप देना था.
लेकिन जेडीएस ने इससे इनकार कर दिया, जिसके बाद राज्य में राजनीतिक संकट गहरा गया.
शक्ति परीक्षण
इससे पहले मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की अध्यक्षता में शुक्रवार सुबह हुई कैबिनेट की बैठक में 18 अक्तूबर को विधानसभा की बैठक बुलाने का फ़ैसला किया गया था.
उन्होंने कहा था कि इस बैठक में शक्ति परीक्षण होगा.
हालाँकि इस बैठक में भाजपा के विधायकों ने हिस्सा नहीं लिया था.
जेडीएस महासचिव ने कहा है कि शुक्रवार को सुबह लिए गए इस फ़ैसले में कोई फ़ेरबदल नहीं हुआ है.
कर्नाटक में वर्ष 2004 में चुनाव हुए थे, जिसमें 225 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा 79 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी.
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