Sunday, October 7, 2007

Wwbinfosys Hindi News : मुशर्रफ़ ने राष्ट्रीय सुलह का आह्वान किया

जीत की ख़बर के बाद पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने टीवी पर देश के नाम संदेश में कहा कि वो उन सबका शुक्रिया अदा करना चाहते हैं जिन्होंने उनका साथ दिया और दोबारा राष्ट्रपति बनने में उनकी मदद की.


उन्होंने अपने पक्ष में वोट देने वाले राष्ट्रीय और प्रांतीय असेंबलियों के सदस्यों को ख़ास तौर पर धन्यवाद देते हुए कहा कि वो इस जीत को ऊपर वाले के सामने सिर झुकाते हुए स्वीकार करते हैं.
उन्होंने उम्मीद जताई कि लोग अब हड़तालों में हिस्सा नहीं लेंगे और उनका विरोध कर रहे वक़ील भी वही करेंगे जो पाकिस्तान के लिए सही है.
राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने राष्ट्रीय सुलह की बात भी दोहराई.
परवेज़ मुशर्रफ़ ने विपक्ष के साथ मिल कर काम करने की इच्छा जताई और कहा कि मीडिया को भी संतुलित रुख़ अपनाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि वो ख़ुद मीडिया की स्वतंत्रता के सबसे बड़े हिमायती हैं.
ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने रविवार को घोषणा की थी कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ चुनाव जीत गए हैं.
लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के मुताबिक़ इस नतीजे की आधिकारिक सूचना तब तक जारी नहीं की जाएगी जब तक मुशर्रफ़ के विरोधी उम्मीदवारों की याचिका पर अदालत सुनवाई पूरी नहीं कर लेती.
प्रधानमंत्री शौक़त अज़ीज़ ने चुनाव के बारे में कहा कि इससे पाकिस्तान के लोकतांत्रिक मूल्यों का पता चलता है.

चुनाव पर विवाद


हालांकि परवेज़ मुशर्रफ़ ने पहले ही घोषणा कर रखी है कि अगर वो दोबारा राष्ट्रपति बन जाते हैं तो फ़ौजी वर्दी उतार देंगे लेकिन विपक्ष ने अदालत से गुहार लगाई है कि मुशर्रफ़ सेनाध्यक्ष रहते हुए चुनाव लड़ ही नहीं सकतेकुछ लोगों का मानना है कि ये चुनाव पाकिस्तान को संपूर्ण लोकतंत्र की तरफ़ ले जाने की दिशा में एक क़दम है.
जबकि सच ये भी है कि देश में राजनीतिक मतभेद भी बढ़े हैं जिन्हें देख कर कुछ लोग मानते हैं कि अब देश में अस्थिरता पहले से बढ़ेगी.
शनिवार को हुए चुनावों के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी काज़ी मोहम्मद फ़ारूक़ ने पत्रकारों को बताया था कि कुल 257 वोट पड़े थे जिनमें से 252 वोट मुशर्रफ़ के पक्ष में गए जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी वजीहुद्दीन को सिर्फ़ दो वोट मिले जबकि तीन वोट रद्द कर दिए गए.
विपक्षी गठबंधन ऑल पार्टी डेमोक्रेटिक मूवमेंट (एपीडीएम) ने इस चुनाव को ग़ैरक़ानूनी बताते हुए इसका बहिष्कार किया था.
बेनज़ीर भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के सदस्यों ने भी मतदान में हिस्सा नहीं लिया.




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