आर्थिक मंदी का सवाल इतना बड़ा मुद्दा बन चुका है कि डेमोक्रेट पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी बराक ओबामा ने इसे ही अपने प्रतिद्वंद्वी जॉन मैकेन के ख़िलाफ़ चुनावी हथियार बना लिया है।
अब तक हिलेरी क्लिंटन के साथ पार्टी की ओर से प्रत्याशी चुने जाने की लड़ाई लड़ रहे ओबामा अब खुलकर रिपब्लिकन पार्टी के प्रत्याशी जॉन मैकेन के ख़िलाफ़ उतर आए हैं।
बराक ने उत्तरी कैरोलिना में दिए गए अपने एक भाषण में कहा है कि रिपब्लिकन प्रत्याशी मैकेन दरअसल उसी आर्थिक नीति के पैरोकार हैं जो वर्तमान राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की है।
उन्होंने कहा कि अगर वो सत्ता के शीर्ष पद पर आते हैं तो एक नया पैकेज लाएंगे जिससे अर्थव्यवस्था में सुधार हो सके।
वैसे बराक के लिए अपनी पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बनना आसान नहीं था। उन्हें पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की पत्नी हिलेरी क्लिंटन की ओर से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा था।
दोनों के बीच कांटे की टक्कर थी पर आखि़रकार बराक ने अपनी जीत की घोषणा की और हिलेरी ने लोगों से बराक के समर्थन में मतदान की अपील करने की बात की।
रिपब्लिकन पार्टी पहले ही जॉन मैकेन को राष्ट्रपति पद के लिए अपना प्रत्याशी घोषित कर चुकी है।
अब अमरीका का चुनाव पार्टियों के दायरे से निकलकर पूरी तरह के आमने-सामने वाला हो चुका है। बराक का ताज़ा बयान इसकी प्रत्यक्ष शुरुआत का उदाहरण है।
चुनाव और तेल का मुद्दा
दुनिया के बाकी कई देशों की तरह अमरीका भी आर्थिक मंदी के बुरे दौर से गुज़र रहा है और समाधान की कोशिशें कारगर साबित नहीं हो रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के बढ़ते दामों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है और इसका असर बाज़ार पर देखने को मिल रहा है।
ऐसे में जबकि अमरीका के राष्ट्रपति पद का चुनाव इसी वर्ष के अंत तक पूरा हो जाना है, तेल अमरीका के चुनाव में एक अहम मुद्दा बनता जा रहा है।
तेल के मुद्दे पर बयानबाज़ी भी शुरू हो गई है बराक ओबामा ने कहा कि अमरीकी तेल कंपनियाँ अच्छा मुनाफ़ा कमाती हैं और उनपर और कर लगाने की ज़रूरत है।
आर्थिक मंदी पर बात करके ओबामा उन मतदाताओं को रिझाने की कोशिश कर रहे हैं जिन्होंने अभी किसी भी पार्टी के पक्ष में अपना मन नहीं बनाया है।
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