सोमवार को वे पीलूपुरा से जयपुर पहुँचकर इस अहम चर्चा में हिस्सा लेंगे।
हालांकि गूजर नेता और सरकार दोनों पक्ष इस मसले पर कुछ नहीं कह रहे हैं लेकिन इस चर्चा से मसले में प्रगति की उम्मीद की जा रही है।
यह उम्मीद इसलिए भी की जा रही है क्योंकि रविवार को राज्य सरकार से चर्चा के बाद दो गूजर नेता समझौते का एक मसौदा लेकर किरोड़ी सिंह बैंसला के पास गए थे और उन्होंने इस मसौदे में कुछ परिवर्तन करने के सुझाव दिए थे।
उल्लेखनीय है कि गूजर समुदाय अनुसूचित जनजाति में शामिल कर आरक्षण देने की माँग को लेकर आंदोलन कर रहा है और पिछले तीन हफ़्तों में पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच हुई झड़पों और पुलिस फ़ायरिंग में दो पुलिसकर्मियों समेत 41 लोग मारे गए हैं।
बैंसला आएँगे
गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला रविवार से पहले तक कह रहे थे कि वे राजस्थान सरकार से बातचीत के लिए जयपुर नहीं जाएँगे।
उनका कहना था कि जब निर्णायक बातचीत होगी तब वे जयपुर जाएँगे।
कई दौर की बातचीत में गूजर नेताओं और सरकार के बीच ऐसी कोई स्थिति बनती दिख नहीं रही थी कि किरोड़ी सिंह बैंसला को जयपुर आना पड़ता।
लेकिन रविवार को उन्हें पीलूपुरा से जयपुर आने का संदेश भेजा गया।
गूजर नेता मसूद चौधरी और रामवीर सिंह ने रविवार को बैंसला से मुलाकात की और बताया कि बैंसला ने बैठक में हिस्सा लेने का फ़ैसला किया है।
रामवीर सिंह दिल्ली के गूजर नेता हैं और गूजरों की ओर से गठित 28 सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य हैं जो सरकार के साथ वार्ता कर रहा है।
कहा जा रहा है कि मसूद चौधरी और रामवीर सिंह अपने साथ समझौते का कोई मसौदा लेकर गए थे जिस पर किरोड़ी सिंह बैंसला ने कुछ सुझाव दिए।
हालांकि दोनो ही पक्ष इस पर कुछ कह नहीं रहे हैं।
सत्तारुढ़ भाजपा के वरिष्ठ नेता रामदास अग्रवाल कहते हैं, "आपको ऐसा समझना चाहिए कि अगर दोनों पक्ष मिलकर बात कर रहे हैं तो कोई न कोई निर्णय तो होना ही है।"
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया, "गूजरों की सारी माँगें यथावत हैं। हमने कोई मसौदा नहीं दिया है सिर्फ़ चर्चा की है।"
मसूद चौधरी ने भी ऐसे ही संकेत दिए, "आप देख रहे हैं कि मैं बहुत रिलेक्स सा हूँ। उम्मीद करना चाहिए कि कोई हल निकलेगा।"
अभी तय नहीं है कि किरोड़ी सिंह बैंसला कब आएँगे। लेकिन राज्य सरकार ने मौसम को देखते हुए उन्हें लेने के लिए अपना हैलिकॉप्टर भेजा है।
मीणा नाराज़
लेकिन गूजरों की इस माँग को लेकर राजस्थान के आदिवासी मीणा समुदाय में विरोध भी है।
वे नहीं चाहते कि गूजरों को भी मीणा की तरह अनुसूचित जनजाति में शामिल किया जाए।
भाजपा के तीन मीना विधायकों - किरोड़ी लाल मीणा, कांतिलाल मीणा और कन्यालाल मीणा ने विधानसभा से इस्तीफ़ा दे दिया है।
मीणा नेताओं को लगता है कि सरकार गूजरों के साथ एकतरफ़ा बातचीत कर रहे हैं।
किरोड़ी लाल मीणा नाराज़गी के साथ कहते हैं, "सरकार ने 28 गूजर नेताओं को बिठा रखा है, दो गूजर मंत्रियों को भी बिठा रखा है. यह एकतरफ़ा बातचीत है, हम क्या इसे मान लेंगे?"
उनका कहना था, "राज्य में तीन मीणा मंत्री हैं, 31 विधायक हैं उनमें से कुछ को तो इस बैठक में बिठाया जाना चाहिए था।"
जयपुर में होने जा रही बैठक के नतीजे अगर सकारात्मक रहते हैं तो यह एक समुदाय में उत्साह का संचार करेगा तो दूसरे समुदाय में मायूसी पैदा करेगी।
फ़िलहाल सरकार के लिए अभी रास्ता लंबा दिख रहा है।
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