संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन के प्रमुख ज़ाक डियूफ़ ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए 20 से 30 अरब डॉलर की ज़रूरत होगी।
खाद्यान्न संकट के कारण दुनिया के कई देशों में दंगों की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।
इसको देखते हुए रोम में खाद्यान्न सुरक्षा सम्मेलन बुलाया गया है।
इस सम्मेलन की शुरुआत विवाद से हुई। सम्मेलन में ज़िम्बाब्वे के राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे के हिस्सा लेने पर ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया ने कड़ी आपत्ति प्रकट की।
पिछले कुछ वर्षों में कृषि क्षेत्र में निवेश में भारी कमी आई है।
बढ़ती लागत
इसके पहले संयुक्त राष्ट्र ने कहा था कि खाद्य पदार्थों की विकासशील देशों से माँग बढ़ रही है और उत्पादन की लागत भी बढ़ रही है।
संयुक्त राष्ट्र संस्था खाद्य और कृषि संगठन ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि दुनिया भर में खाद्य पदार्थों की जो क़ीमतें बढ़ी हैं वो पिछले सभी रिकॉर्ड से कहीं ज़्यादा है और उसकी कुछ वजह ये भी थी कि ख़राब मौसम की वजह से बहुत सी फ़सलें तबाह हो गई थीं।
विश्व खाद्य संगठन की वार्षिक अनुमान रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2017 तक गेहूँ की क़ीमतों में 60 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हो सकती है और वनस्पति तेल उस समय तक लगभग 80 प्रतिशत महंगा हो सकता है।
दुनिया भर में वर्ष 2005 और 2007 के बीच गेहूँ, मक्का और तिलहन फ़सलों के दाम लगभग दोगुने हो चुके हैं।
संगठन ने हालाँकि इन चीज़ों क़ीमतों में कुछ कमी होने की संभावना जताई है लेकिन यह कमी हाल के समय में हुई महंगाई के मुक़ाबले बहुत धीमी होगी।
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