वैसे तो किसी आदमी का शास्त्रीय नृत्य करना भी अनोखी बात नहीं है लेकिन मंच पर नाच रहे आदमी की अच्छी खासी दाढी मूंछ हो और सिर पर पटका भी बंधा हो तो ऐसी कल्पना भी कुछ अटपटी सी लगती है
लेकिन इस कल्पना को मूर्त रूप दिया मुंबई के जतिंदरपाल सिंह जिनका दावा है कि वो दुनिया के एकमात्र सिख भरतनाट्यम नर्तक हैं।
छोटे से कद के 47 वर्षीय जतिंदरपाल पिछले 18 वर्षों से भरतनाट्यम से जुड़े हुए हैं और अब पेशेवर नर्तक हैं।
लंदन के नेहरू सेंटर में मंगलवार शाम को इस अनोखे नर्तक ने अपनी प्रतिभा से सबका मन मोह लिया।
एक सिख व्यक्ति को भांगड़ा की बजाए भरतनाट्यम करते देखने के लिए लोगों में भी कितनी उत्सुकता थी, ये इसी बात से पता चल रहा था कि कार्यक्रम देखने पहुंचे दर्शकों में सिर्फ़ भारतीय ही नहीं कई विदेशी भी शामिल थे।
लेकिन जतिंदरपाल का झुकाव शास्त्रीय नृत्य की तरफ कैसे हुआ।
उनका कहना था,'' मैं आठ बरस का था जब मैने प्रसिद्ध नृत्यांगना यामिनी कृष्णमूर्ति का कार्यक्रम देखा था। मन में भरतनाट्यम के प्रति जुड़ाव तो तभी पैदा हो गया था लेकिन उस वक्त घर वालों ने मुझे न गंभीरता से लिया और न ही सीखने की इजाज़त दी।''
वो बताते है कि 16 साल की उम्र में मुझे एक कॉलेज की तरफ से छात्रवृत्ति मिली और उन पैसों से मैने चोरी छिपे अभिनेत्री वैजयंती माला के स्कूल में नृत्य सीखना शुरू कर दिया। उनका स्कूल बंद होने के बाद मैने गुरु श्रीमणि से तालीम हासिल की और तब से शुरू हुआ ये सफ़र आज तक चल रहा है।
मुश्किल सफ़र
लेकिन ये सफ़र जतिंदरपाल के लिए बिल्कुल आसान नहीं था।
एक तरफ उन्हें घरवालों का विरोध झेलना पड़ा तो दूसरी तरफ समाज, रिश्तेदारों और आसपास के लोगों ने उपहास का पात्र बना दिया
वो बताते हैं,'' परिवार में दो बड़ी बहनों के बाद मैं सबसे छोटा था, जब लड़की होने के बावजूद उन्होंने नहीं सीखा तो मेरा ज़िद करना उन्हें बहुत अजीब लगता था। वहीं स्कूल और कॉलेज में भी लोगों ने मेरा मज़ाक उड़ाया लेकिन मैने अपना इरादा नहीं छोड़ा।''
समाज और परिवार के दबाव में आकर जतिंदरपाल ने मुंबई में नौकरी भी की लेकिन बाद में उन्होने नौकरी छोड़कर खुद को पूरी तरह से भरतनाट्यम के लिए समर्पित कर दिया।
इस अनूठी लगन की वजह से आज उनका नाम गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है और फिलहाल वे मुंबई के दिल्ली पब्लिक स्कूल में नृत्य के शिक्षक हैं।
सबसे अलग होने की वजह से उन्हें पहचान तो जल्दी मिली लेकिन कई बार नुक़सान भी उठाना पड़ा।
वो बताते हैं,'' मै शुरू शुरू में जब दक्षिण भारत में कार्यक्रम करने जाता था तो मेरे उत्तर भारतीय होने और खासतौर से सिख होने की वजह से मुझे गंभीरता से नहीं लिया गया। कई बार मेरी लगन और मेहनत को शक की नज़र से देखा गया। कुछ कलाकार मुझे एक भरतनाट्यम के नर्तक के रुप में स्वीकार नहीं कर पाते थे।''
लेकिन नेहरु केन्द्र में उनका कार्यक्रम देखने आए दर्शकों ने न सिर्फ़ उन्हे स्वीकार किया बल्कि भरपूर सराहना भी की।
अपनी महिला मित्र कटरीना के साथ कार्यक्रम देखने आए आइक के अनुसार उन्होंने ऐसा कार्यक्रम कभी नहीं देखा
आइक का कहना था,'' मुझे भारतीय नृत्य के बारे में ज़्यादा नहीं मालूम लेकिन मेरी दोस्त ने मुझे इसके बारे में बताया और मैं ऐसा नाच देखने के लिए बहुत उत्सुक था। मुझे जतिंदर की भावभंगिमाएं और नृत्य के ज़रिए कहानी सुनाने का अंदाज़ बहुत पंसद आया।''
ब्रिटेन में ही पली-बढ़ी और कथक की विद्यार्थी जानकी का कहना था, '' मैने जब जतिंदरपाल जी के बारे में सुना तो मैं खुद को रोक नहीं पाई। मैं उनकी लगन को देखकर बहुत प्रभावित हुई।''
लेकिन एक सवाल फिर भी लाज़मी था कि क्या जतिंदरपाल भांगड़ा पर भी उसी जोश के साथ थिरक सकते हैं।
हंसते हुए उन्होंने कहा,'' जी हां बिल्कुल॥ मेरा भांगड़ा देंखेगे तो यकीन नहीं होगा कि मैं भरतनाट्यम का शिक्षक हूँ।''
To know More About Share Market Technical Analysis Click Here For Share Gurukul
No comments:
Post a Comment