बुधवार को संसद के निचले सदन हाउस ऑफ़ कॉमन्स में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गोर्डन ब्राउन ने बहस के दौरान कहा कि अगर संसद इस विधेयक को पास नहीं करती तो वो अपना कर्तव्य निभाने में असफल रहेगी।
हालाँकि विधेयक पर सदन की मुहर लग गई पर इसके लिए सरकार को बहुत कम समर्थन प्राप्त हुआ।
संसद ने ये विधेयक केवल नौ मतों के बहुमत से पास किया। विधेयक के समर्थन में 315 और विरोध में 306 मत पड़े।
विधेयक के विरोधियों का कहना था कि इस क़ानून से लोगों की स्वतंत्रता का भारी हनन होगा।
सत्ताधारी लेबर पार्टी के 36 सांसदों ने भी इस विधेयक के ख़िलाफ़ मतदान किया।
इस विधेयक को क़ानून का रूप देने के लिए सरकार को इसे अब संसद के ऊपरी सदन से पारित कराना होगा जहाँ इस प्रस्ताव का भारी विरोध है।
अपनी तरह का यह बहुत कड़ा क़ानून हैं। बिना अभियोग के कम से कम 28 दिनों और अधिकतम 42 दिनों तक हिरासत में रखने कि अवधि अमरीका और ऑस्ट्रेलिया के क़ानूनों की अवधि से ज़्यादा है।
पर यूरोप के अन्य देशो में चरमपंथी होने के संदिग्ध व्यक्ति को महीनों तक हिरासत में रखा जा सकता है।
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