Monday, June 2, 2008

Webinfosys's Hindi News : इस जीत जैसी पटकथा कौन लिख सकता है भल

फ़ाइनल मुक़ाबले में धोनी की टीम को हराकर आईपीएल का पहला ख़िताब हासिल करने का इतिहास रच चुकी टीम की खुशी का आकलन उनके लिए मुश्किल ही है जिन्होंने रविवार का मैच नहीं देखा।

मैच की आखिरी गेंद तक चला एक शानदार मुक़ाबला और उसके बाद जीत का सेहरा, पूरी टीम सहित शेन वार्न के लिए यह दीवाना कर देने वाला क्षण था।

मुंबई में खेले गए इस रोमांचक फ़ाइनल में राजस्थान रॉयल्स ने चेन्नई सुपर किंग्स को तीन विकेट से हरा दिया।

मुंबई में हुआ फ़ाइनल मैच किसी थ्रिलर से कम नहीं था। चेन्नई ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए पाँच विकेट पर 163 रन बनाए।

जीत के लिए राजस्थान को 20 ओवरो में 164 रन बनाने थे। मुकाबले काँटे का था। आख़िरी ओवर में जीतने के लिए राजस्थान को आठ रन चाहिए थे।

और जब फ़ाइनल मैच के आखिरी ओवर की स्थिति ऐसी हो तो सांसों का रुक जाना, धड़कन बढ़ना और नाख़ून चबाना भी मददगार साबित नहीं होता।

हर गेंद पर उन्माद और रोमांच बढ़ता जा रहा था। फिर स्थिति बनी एक गेंद और एक रन की। राजस्थान रॉयल्स ने इसे भी पार किया और जीत उनकी हुई।

जीत के बाद शेन वार्न ने कहा, "कड़ी मेहनत, अच्छी रणनीति और तैयारी और साथ ही टीम की वजह से हम यह मैच जीत सके हैं।"

उन्होंने कहा, "आईपीएल हम लोगों के लिए एक शानदार सफ़र था। मुझे नौजवान खिलाड़ियों को क्रिकेट खेलते और अपनी प्रतिभा को साबित करते देखकर गर्व हुआ। इस आख़िरी मुक़ाबले में जिस तरह से आखिरी गेंद पर हम जीते, मुझे नहीं लगता कि इससे अच्छी पटकथा भी कोई लिख सकता है।"

मैच में हार गई धोनी की टीम के लिए यह कठिन समय था पर धोनी ने अपनी भाषा में संयम बनाए रखा। उन्होंने कहा, "हम नहीं जीत सके क्योंकि हम वैसा प्रदर्शन नहीं कर सके जैसा कि हमें करना चाहिए था। पर हमें इसका कोई अफ़सोस नहीं है क्योंकि हमने अच्छा करने की कोशिश की। मैच आखिरी गेंद तक चला। मेरे ख़्याल से इससे बेहतर क्रिकेट और क्या होगा।"

'वाह पठान... वाह'

यूसुफ़ पठान ने बल्ले और गेंद दोनों से कमाल दिखाया। उन्होंने 56 रन बनाए और तीन अहम विकेट भी लिए।

मैच में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए यूसुफ़ पठान को मैन ऑफ़ द मैच चुना गया है जबकि पूरी सिरीज़ में शानदार प्रदर्शन के लिए शेन वाटसन को मैन ऑफ़ द सिरीज़ घोषित किया गया है।

पूरे मैच का रोमांच मानो आख़िर के एक ओवर में सिमट गया। राजस्थान के कप्तान शेन वॉर्न और सोहेल तनवीर क्रीज़ पर थे।

इस अंतिम ओवर का एक-एक क्षण नाटकीय था। आख़िरी ओवर की पहली गेंद पर तनवीर ने एक रन लिया। लक्ष्य हुआ पाँच गेंदों में सात रन।

आख़िरी ओवर की दूसरी गेंद पर कोई रन नहीं बना। आख़िरी ओवर की तीसरी गेंद पर वॉर्न ने एक रन लिया। यानी राजस्थान को तीन गेंदों में छह रन बनाने थे।

अंतिम ओवर की चौथी गेंद में बालाजी ने दो वाइड दे दिए। फिर वॉर्न ने एक रन भी ले लिया। शायद यहीं से मैच का रुख़ बदला यानी दो गेंदों में राजस्थान को तीन रन बनाने थे।

अंतिम ओवर की पाँचवी गेंद॥रोमांच पूरे उफ़ान पर था। इस गेंद पर भी सोहेल तनवीर ने दो रन जुटा लिए। राजस्थान का स्कोर हो गया 163 रन।

फिर बच गई मैच की अंतिम गेंद। राजस्थान को जीतने के लिए एक रन चाहिए थे। पूरे स्टेडियम में जैसे लोगों की धड़कनें थमी हुई थी। क्या तनवीर ये बेशकीमती रन जुटा पाएँगे? लेकिन तनवीर ने निराश नहीं किया। जैसे ही उन्होंने आख़िरी रन जुटाया पूरा स्टेडियम तालियों से गूँज उठा।

आईपीएल शुरू होने से पहले शायद सबसे कमज़ोर आँकी जाने वाली राजस्थान रॉयल्स की टीम ने दिखा दिया कि उनमें कितना दम है।

चेन्नई की पारी

रविवार के मैच में राजस्थान रॉयल्स टीम ने टॉस जीता और चेन्नई से पहले बल्लेबाज़ी करने के लिए कहा। चेन्नई के बल्लेबाज़ों ने शुरु में तो तेज़ी से रन बटोरे लेकिन इस गति को अंत तक बरकरार नहीं रख पाए।

शुरुआत पार्थिव पटेल और विद्युत सिवारामाकृष्णन ने की। दोनों ने तेज़ी से रन बटोरे। पहले पाँच ओवरों में दोनों ने मिलकर 39 रन जुटाए। गेंदबाज़ों में ख़ासकर शेन वाटसन की धुनाई हुई।

लेकिन छठे ओवर में सोलह के स्कोर पर विद्युत यूसुफ़ की गेंद का शिकार हुए। इस बीच पार्थिव पटेल लगातार गेंदबाज़ों को पीटते रहे।

लेकिन नवें ओवर में यूसुफ़ पठान ने एक बार फिर अपना कमाल दिखाया और फ़ॉर्म में चल रहे पार्थिव पटेल को आउट कर दिया। पटेल ने पांच चौकों की मदद से 38 रन बनाए।

पार्थिव पटेल के जाने के बाद सुरेश रैना और मॉर्केल ने रन जुटाने शुरु किए। लेकिन पठान पूरी रवानी में थे और उन्होंने 13वें ओवर में 16 के निजी स्कोर पर मॉर्केल को चलता किया।

चेन्नई ने 13।2 ओवरों में अपने 100 रन पूरे किए जिसमें सुरेश रैना की अहम भूमिका रही। उन्होंने मात्र 30 गेंदों में 43 रन बनाए लेकिन 17वें ओवर में वाटसन की गेंद पर जडेजा को कैच थमा बैठे। पर उस समय तक उन्होंने चेन्नई को 128 के स्कोर तक पहुँचा दिया था।

आख़िर के ओवरों में मैदान पर थे कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और श्रीलंका के चमारा। लेकिन आख़िरी में चमारा सोहेल तनवीर के गेंद पर आउट हो गए।

अंतिम ओवर में धोनी ने बद्रीनाथ के साथ मिलकर कुल 15 रन जोड़े। धोनी 29 रन बनाकर नाबाद रहे। चेन्नई ने पाँच विकेट के नुकसान पर 163 रन बनाए।

राजस्थान की पारी

जवाबी पारी में राजस्थान की शुरुआत अच्छी नहीं रही। राजस्थान की ओर से नीरज पटेल और स्वप्निल असनोडकर बल्लेबाज़ी करने उतरे लेकिन चौथे ही ओवर में गोनी ने राजस्थान को पहला झटका दिया। गोनी ने मात्र दो के स्कोर पर नीरज पटेल को आउट कर दिया।

लेकिन असनोडकर अच्छी फ़ॉर्म में दिख रहे थे। उन्होंने चार चौके लगाए लेकिन सातवें ओवर में 28 के स्कोर पर मॉर्केल की गेंद का शिकार हो गए।

अभी असनोडकर पविलियन लौटे ही थे कि कामरान अकमल रन आउट हो गए। वे छह रन ही बना सके। तीन विकेट गंवाने के बाद यूसुफ़ पठान और शेन वाटसन ने राजस्थान की स्थिति को संभाला।

दोनों ने समय-समय पर ज़बरदस्त शॉट लगाए। जब दोनों लय में नज़र आ रहे थे तभी मुरलीधरन ने वाटसन को आउट कर राजस्थान को बड़ा झटका दिया।

लेकिन यूसुफ़ पठान के रन बनाने की रफ़्तार पर इसका कोई ख़ास असर नहीं पड़ा। वे चौके और छक्कों की बरसात करते रहे और अपना अर्धशतक पूरा किया।

मुकाबला नज़दीकी होता जा रहा था। एक समय राजस्थान को जीतने के लिए 26 गेंदों में 20 रन चाहिए थे। लेकिन इसी बीच जल्दी-ज ल्दी मोहम्मद कैफ़ और रवींद्र जडेजा के विकेट गिर गए जिसके चलते पठान पर दवाब बढ़ गया। वे 18वें ओव र में 56 क े स्को र पर रन आउट हो बै ठे।

ये राजस्थान के लिए बड़ा झटका था। आख़िरी के दो ओवर बचे थे। सारा दारोमदार कप्तान शेन वॉर्न और सोहेल तनवीर पर था। 19वें ओवर में दोनों ने दस रन बनाए। आख़िरी ओवर में आठ रन चाहिए थे। दोनों मौका मिलने पर एक-एक रन जुटाते रहे। बालाजी ने दो वाइड गेंदें देकर इनका काम आसान कर दिया।

आख़िरी गेंद पर राजस्थान को एक रन चाहिए था जो तनवीर ने आसानी से जुटा लिया। राजस्थान ने ये मैच तीन विकेट से जीत लिया।





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