शाहरुख़ ख़ान सबसे बेहतर अभिनेता को करीना कपूर सबसे बेहतरीन अभिनेत्री के पुरस्कार से नवाजी गईं।
इसके अलावा इस बार का लाइफ़ टाइम एचीवमेंट पुरस्कार दिया गया जानी-मानी अदाकारा मुमताज को। उन्हें ये पुरस्कार वरिष्ठ बॉलीवुड अभिनेता फ़िरोज़ ख़ान ने दिया।
वर्ष 2008 के आइफ़ा फ़िल्म पुरस्कारों में 'चक दे इंडिया' को सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म का खिताब दिया गया।
इसी फ़िल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार भी दिया गया और वो मिला किंग ख़ान यानी शाहरुख़ ख़ान को।
सर्वश्रेष्ठ निर्देशन का पुरस्कार भी इसी फ़िल्म को मिला और जयदीप साहनी को इसी फ़िल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ पटकथा लेखन का पुरस्कार मिला।
पुरस्कृत हुआ काम
करीना का जादू एक बार फिर सिर चढ़कर बोला। उन्हें 'जब वी मेट' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का खिताब दिया गया।
सह अभिनेता और सह अभिनेत्री का पुरस्कार मिला 'लाइफ़ इन ए मैट्रो' के लिए इरफ़ान ख़ान और कोंकणा सेन को।
वहीं 'शूटआउट एट लोखंडवाला' में अपनी नकारात्मक भूमिका के लिए विवेक ओबरॉय को भी सम्मानित किया गया।
पिछले एक वर्ष के दौरान जो नए लोग इंडस्ट्री में आए, उनमें से जॉनी गद्दार में अपनी भूमिका के लिए नील नितिन मुकेश को सम्मानित किया गया।
बच्चन परिवार को एक पुरस्कार मिला और वो भी अमिताभ बच्चन को। उन्हें स्टाइल आइकन ऑफ़ दि ईयर से सम्मानित किया गया।
पार्टनर फ़िल्म में हास्य भूमिका के लिए अभिनेता और सांसद गोविंदा को सम्मानित किया गया।
गुरू फ़िल्म के संगीत निर्देशक हैं एआर रहमान। उन्हें इस फ़िल्म के संगीत निर्देशन के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का पुरस्कार मिला है।
पर रहमान के लिए एक और सम्मान भी था और वो था अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म जगत में विशेष योगदान देने वाले भारतीय का। इस विशेष श्रेणी के तहत एआर रहमान को सम्मानित किया गया।
सबसे अच्छे अक्षय
बड़ी तैयारी और साजो सज्जा के बीच आइफ़ा फ़िल्म पुरस्कारों की घोषणा की गई। सितारों का जमावड़ा इसमें चार चाँद लगा रहा था।
कई रंगारंग कार्यक्रम भी मंच पर आते रहे पुरस्कारों के वितरण के साथ ही।
पर सबसे ज़्यादा तालियाँ बटोरीं अक्षय कुमार ने। अपने स्टंटों से लोगों को हतप्रभ कर देने वाली प्रस्तुति देते हुए अक्षय जब लोगों के सामने आए तो पूरे हॉल में छा गए।
तालियों की गड़गड़ाहट और दर्शकों के शोर से इस बात का अंदाज़ा लगाया जा सकता था कि वाकई सबसे अच्छे हैं अक्षय।
मंच संभालने का काम किया बोमेन ईरानी, उर्मिला मातोंडकर, रीतेश देशमुख और करण जौहर ने।
बीच-बीच में अमिताभ बच्चन भी मंच पर आते थे। वैसे करण जौहर का दखल भी कम ही रहा और बाकी तीन लोगों ने ही संचालन का बड़ा हिस्सा संभाला।
समारोह में शाहरुख़ ख़ान, इरफ़ान ख़ान, कोंकणा सेन मौजूद नहीं थे इसलिए ये लोग अपना पुरस्कार ख़ुद स्वीकार नहीं कर सके।
आमिर ख़ान की फ़िल्म, तारे ज़मीन पर... को इस समारोह की पुरस्कार की विभिन्न श्रेणियों के नामांकन से बाहर रखा गया था इसलिए यह फ़िल्म न तो समारोह का हिस्सा बनी और न ही इसे पुरस्कार मिले।
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